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Varanasi News: आत्मा का भोजन है भागवत, जितना ग्रहण करें उतना ही कम
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- मणिमंदिर में प्रेमधन लालन महाराज की भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। वृंदावन के कथाव्यास प्रेमधन लालन महाराज ने कहा कि भागवत आत्मा का भोजन है। अन्न से तो तृप्ति मिल जाती है लेकिन भागवत से कभी तृप्ति नहीं मिलती। जितना उसे ग्रहण करेंगे उतना कम है। भागवत ही एक ऐसा ग्रंथ है जिसे भागवत भगवान कहकर पुकारा जाता है। उन्होंने बताया कि भागवत में 18 हजार श्लोक वर्णित हैं। वह बुधवार को दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे।
प्रेमधन महाराज ने कहा कि भागवत वेद रूपी वृक्ष का पका हुआ फल है। जिस प्रकार पके हुए फल का स्वाद अधिक मनोहारी लगता है, उसी प्रकार भागवत में प्रभु की लीलाओं का वर्णन सुनकर मन प्रेम और करुणा के भाव से रससिक्त हो जाता है। त्रिदेव मंदिर सेवक परिवार एवं राधाकृपा परिवार की ओर से आयोजित कथा में भागवत श्रवण कराते हुए लालन महाराज ने कहा कि हमें जो सुख दुख प्राप्त होता है, वह हमारे ही पूर्व कर्मों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कभी किसी चीज का अहंकार नहीं करना चाहिए। कथा के शुभारंभ में मुख्य यजमान भरत सराफ व किरण सराफ ने व्यासपीठ की पूजा की। अंत में आरती में राधे गोविंद केजरीवाल, अनूप सराफ, भूपेंद्र अग्रवाल, कमल अग्रवाल, श्याम सुंदर अग्रवाल सुरेश तुलस्यान शामिल हुए।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। वृंदावन के कथाव्यास प्रेमधन लालन महाराज ने कहा कि भागवत आत्मा का भोजन है। अन्न से तो तृप्ति मिल जाती है लेकिन भागवत से कभी तृप्ति नहीं मिलती। जितना उसे ग्रहण करेंगे उतना कम है। भागवत ही एक ऐसा ग्रंथ है जिसे भागवत भगवान कहकर पुकारा जाता है। उन्होंने बताया कि भागवत में 18 हजार श्लोक वर्णित हैं। वह बुधवार को दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे।
प्रेमधन महाराज ने कहा कि भागवत वेद रूपी वृक्ष का पका हुआ फल है। जिस प्रकार पके हुए फल का स्वाद अधिक मनोहारी लगता है, उसी प्रकार भागवत में प्रभु की लीलाओं का वर्णन सुनकर मन प्रेम और करुणा के भाव से रससिक्त हो जाता है। त्रिदेव मंदिर सेवक परिवार एवं राधाकृपा परिवार की ओर से आयोजित कथा में भागवत श्रवण कराते हुए लालन महाराज ने कहा कि हमें जो सुख दुख प्राप्त होता है, वह हमारे ही पूर्व कर्मों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कभी किसी चीज का अहंकार नहीं करना चाहिए। कथा के शुभारंभ में मुख्य यजमान भरत सराफ व किरण सराफ ने व्यासपीठ की पूजा की। अंत में आरती में राधे गोविंद केजरीवाल, अनूप सराफ, भूपेंद्र अग्रवाल, कमल अग्रवाल, श्याम सुंदर अग्रवाल सुरेश तुलस्यान शामिल हुए।
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