भदोही पुलिस एनकाउंटर: पिता के साथ करता था ये काम, ऐसे शुरू हुआ आपराधिक सफर
छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम देते हुए तकरीबन आठ वर्ष पूर्व अपराध की दुनिया में कदम रखने वाला दीपक गुप्ता भदोही जिले के सुरियावां बाजार के एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है। लेकिन, पुलिस रिकॉर्ड में वह शातिर अपराधी था।
दीपक 2012 के अधिवक्ता हत्याकांड के बाद से फरारी काट रहा था और दूसरे जिलों के अपराधियों के संपर्क में आकर वारदातों को अंजाम देता था। उसके पिता शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में हलवाई के साथ खाना बनाने वाले सहायक का काम करते हैं।
इसी से परिवार की आजीविका चलती है। 10 साल पहले मां की मौत हो चुकी है। तीन भाइयों में सबसे बड़े राजन की एक वर्ष पूर्व गंभीर बीमारी से मौत हो गई थी। हालांकि उसका नाम भी कुछ आपराधिक घटनाओं में सामने आया था। दीपक तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था।
भदोही के एसपी रामबदन सिंह के अनुसार, भदोही जिले के सुरियावां निवासी दीपक उर्फ रवि पुत्र छोटेलाल बदमाश वाराणसी की जेल से फरार था। उस पर भदोही जिले में 25,000 रुपये, अंबेडकरनगर में 15,000 रूपये और वाराणसी जिले में 10,000 रूपये का इनाम घोषित था।
सोमवार की देर रात लगभग 1:30 बजे जब थानाध्यक्ष सुरियावां व स्वाट प्रभारी पर चेकिंग के दौरान दोनों बदमाशों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। जहां कांस्टेबल सचिन झा के बुलट प्रूफ जैकेट में गोली लगी और स्वाट प्रभारी अजय सिंह के पैर में गोली लगी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश मारा गया और दूसरा फायर करता हुआ भाग गया।