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संत रविदास जयंती: वाराणसी के सीरगोवर्धन में आकार लेने लगा आस्था का बेगमपुरा, इस बार किसी भी नेता को निमंत्रण नहीं
Mon, 24 Jan 2022 12:39 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 12:39 AM IST
सार
मन चंगा तो कठौती में गंगा ... का संदेश देने वाले संत रविदास की जयंती पर 16 फरवरी को उनके जन्मस्थान वाराणसी के सीर गोवर्धन गांव में आस्था का कुंभ लगेगा। माघी पूर्णिमा पर संत की जयंती पर हर साल लाखों की तादाद में अनुयायी यहां पहुंचते हैं।
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तंबू व लंगर हॉल के निर्माण आरंभ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संत रविदास के सपनों का गांव बेगमपुरा फिर से सजने लगा है। वाराणसी के सीरगोवर्धन में कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण इस बार रैदासियाें की संख्या कम रहने के आसार हैं। इस बार विधानसभा चुनाव होने के कारण मंदिर ट्रस्ट की तरफ से किसी भी राजनेता को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। जिसको आना होगा वह आएंगे।
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संत रविदास की जयंती सीरगोवर्धन में 16 फरवरी को मनेगी। जयंती उत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं और तंबुओं का शहर सजना शुरू हो गया है। पंडाल के साथ ही लंगर हाल के निर्माण में सेवादार जुटे हुए हैं। मंदिर परिसर को भी सजाने का काम शुरू हो चुका है। नगर निगम, बिजली विभाग और जिला प्रशासन को भी मंदिर प्रबंधन ने पत्र भेजकर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने का अनुरोध किया है।
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रैदासियों से अपील- बिस्तर और कंबल भी साथ लाएं
मंदिर के ट्रस्टी केएल सरोआ ने बताया कि इस वर्ष रैदासियों की संख्या कम होगी। आने वाले रैदासियों से अपील की गई है कि वो अपने साथ बिस्तर और कंबल भी साथ लाएं। इस बार ट्रस्ट की ओर से कोरोना संक्रमण को देखते हुए बिस्तर नहीं दिया जाएगा। रैदासियों को लाने के लिए बसों की संख्या बढ़ाई गई है, साथ ही रैदासियों से अपील भी की गई है कि बेहतर होगा वो अपने साधन से ही गुरु की जन्मस्थली पहुंचे।
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14 फरवरी को काशी आएंगे संत निरंजन दास
बेगमपुरा स्पेशल ट्रेन से संत निरंजन दास संगत के साथ 14 फरवरी को कैंट स्टेशन पर पहुंचेंगे। पंजाब हरियाणा से सेवादारों का पहला जत्था माह के आखिरी सप्ताह तक पहुंचेगा। होटल की बुकिंग कराने वाले लोग ऑनलाइन बुकिंग करा रहे हैं।
पंजाब चुनाव के कारण कम हो सकती हैं संगत
संत रविदास की जयंती पर शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में संगत पंजाब से आती है, लेकिन इस बार पंजाब में चुनाव होने के कारण संगत कम हो सकती है। इस बारे में रविदास मंदिर ट्रस्ट के लोगों का मानना है कि पंजाब चुनाव होने के कारण आने वाली संगत की संख्या कम हो सकती है। मंदिर के ट्रस्टी ने बताया कि पंजाब चुनाव के कारण आने वाली संगत कम आने की संभावना है।
ऑनलाइन ही जुड़ें एनआरआई
कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने एनआरआई श्रद्धालुओं से अपील की है कि वो ऑनलाइन ही इस पर्व से जुड़ें। हर साल विदेश से आने वाले एनआरआई अपने गुरु संत रविदास की पालकी को कंधे पर लेकर चलने को आतुर रहते हैं।
पढ़ेंः वाराणसी में रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई सुरक्षा, चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर
ऑनलाइन ही जुड़ें एनआरआई
कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने एनआरआई श्रद्धालुओं से अपील की है कि वो ऑनलाइन ही इस पर्व से जुड़ें। हर साल विदेश से आने वाले एनआरआई अपने गुरु संत रविदास की पालकी को कंधे पर लेकर चलने को आतुर रहते हैं।
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