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Exclusive: बनारसी जे लैंप के जापान और ऑस्ट्रेलिया से आ रहे ऑर्डर, काशी की कला विश्व स्तर पर बना रही पहचान
Tue, 17 Jun 2025 11:19 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 17 Jun 2025 11:19 PM IST
सार
बनारस की कला की विश्व स्तर पर अलग पहचान बन रही है। यहां के जे लैंप की मांग विदेशी ग्राहकों में बढ़ी है। जापान और ऑस्ट्रेलिया में इसकी काफी डिमांड है।
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जे लैंप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
काशी की पारंपरिक काष्ठ कला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। बनारस में तैयार होने वाला जे लैंप अब जापान और ऑस्ट्रेलिया में भी पहुंचने लगा है। विदेशी ग्राहकों की बढ़ती मांग को देखते हुए स्थानीय कारीगरों में उत्साह का माहौल है। यह लैंप न केवल दिखने में आकर्षक है, बल्कि तकनीक और पारंपरिकता का सुंदर समन्वय भी है।
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हैंडीक्राफ्ट कारीगर रामेश्वरम सिंह ने बताया कि जे लैंप आमतौर पर आम और यूकेलिप्टस की लकड़ी से तैयार किया जाता है। सबसे पहले लकड़ी को 2 से 3 महीनों तक प्राकृतिक रूप से सुखाया जाता है, ताकि उसमें नमी न रहे और वह टिकाऊ बने। इसके बाद 100 पीस तैयार करने में लगभग एक महीने का समय लगता है।
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यह लैंप सिर्फ सजावटी वस्तु नहीं, बल्कि इसमें आधुनिक फीचर्स भी जोड़े गए हैं। इसमें चार्जिंग सुविधा, सेंसर और बैटरी भी लगी होती है। यह लैंप एक बार चार्ज होने पर 6-8 घंटे तक चलेगा। इसकी कीमत दो से 20 हजार रूपए तक है।
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कारीगरों के अनुसार यह लैंप बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता। काष्ठ कला बनारस की पारंपरिक पहचान रही है। इसे अब लोकल फॉर वोकल अभियान के तहत नए आयाम मिल रहे हैं। इससे इन उत्पादों को वैश्विक बाजारों में पहचान मिलने लगी है।
पांच साल में पांच गुना बढ़े लकड़ी के दाम
काशी की काष्ठ कला को भले ही बढ़ावा मिल रहा हो, लेकिन लकड़ी की बढ़ती कीमतों को लेकर कारीगर और व्यापारी परेशान हैं। कारीगरों का कहना है कि पहले यूकेलिप्टस की लकड़ी पांच वर्ष पहले 500 रूपए प्रति कुंतल मिलती थी। अब 2500 रूपए प्रति कुंतल मिलती है। अधिकतर लकड़ी कानपुर, सीतापुर, अमेठी, लखनऊ से आती है।