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बनारस की झोली में पांच पद्म पुरस्कार
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 26 Jan 2016 01:53 AM IST
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पद्म पुरस्कारों की घोषणा में इस बार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार बनारस पर मेहरबान रही। काशी को पांच पद्म सम्मान हासिल हुए हैं। संगीत जगत की दो ठुमरी गायिकाओं के अलावा चिकित्सा क्षेत्र में दो और विज्ञान के क्षेत्र से एक नाम इसमें शामिल है। ठुमरी गायिका गिरिजा देवी को पद्म विभूषण और सोमा घोष को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है।
पूरब अंग की गायकी को नया आयाम देने वाली गिरिजा देवी ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा के बाद ‘अमर उजाला’ से फोन पर कहा कि यह सम्मान मुझे नहीं पूरी काशी को मिला है।
इसका श्रेय मेरे उन संगीत गुरुओं को जाता है, जिन्होंने मुझे इस लायक बनाया। अपनों के बीच ‘अप्पा जी’ के नाम से मशहूर गिरिजा देवी ने कहा कि सम्मान मिलना गर्व की बात है। बाबा विश्वनाथ करें कि इसी तरह संगीत गुरुओं को आदर मिलता रहे। उन्होंने कहा कि संगीत की परंपरा को जीने वालों को इस क्षेत्र में अच्छा काम करने की जरूरत है, ताकि बनारस के संगीत की खुशबू विश्व भर में फैलती रहे।
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उधर, ठुमरी गायिका सोमा घोष को पद्मश्री से नवाजे जाने की जब सूचना मिली तब वह प्रफुल्लित हो उठीं। उन्होंने इस मौके पर अपने धर्मगुरु मौनी बाबा के अलावा मां अर्चना चक्रवर्ती, ठुमरी गायिका बागेश्वरी देवी और डॉ. राजेश्वर आचार्य का नाम लिया। कहा कि ऐसी विभूतियों के मार्ग दर्शन की वजह से मुझे इस मुकाम तक पहुंचने की ताकत मिल सकी। अब जिम्मेदारी बढ़ गई है। संगीत ग्राम बसाने का सपना मैं साकार करूंगी।
शताब्दी वर्ष में बीएचयू के नाम आए तीन पद्मश्री
प्रो. टीके लहरी : सेवा के प्रतिमूर्ति, वक्त के पक्के और मरीजों के लिए किसी भगवान से कम नहीं। न किसी की सिफारिश ना ही अमीर-गरीब में कोई भेदभाव। जाने-माने कार्डियोथोरेसिक सर्जन बीएचयू के डॉ. टीके लहरी की यही खासियत है। रिटायर्ड होने के बाद भी मरीजों के लिए दिलोजान से लगे रहने वाले डॉ. टीके लहरी को ओपन हार्ट सर्जरी में महारत हासिल है। 1974 में बतौर लेक्चरर काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़े तो उन्होंने यहां से जैसे नाता ही जोड़ लिया है। 2003 में रिटायर्ड होने के बाद उनकी इन्हीं खासियतों को देखते हुए विश्वविद्यालय ने उन्हें इमेरिटस प्रोफेसर का दर्जा दिया। 2003 से वो 2011 तक यहां इमेरिटस प्रोफेसर रहे। इसके बाद भी उनकी कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए उनकी सेवा इमेरिटस प्रोफेसर के तौर पर अब तक ली जा रही है। 75 साल की उम्र में भी वक्त के इतने पक्के हैं कि उनके आने-जाने के समय से लोग अपनी घड़ियों का समय मिलाते हैं।
प्रो. रामहर्ष सिंह : बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के काय चिकित्सा विभाग में 1964 से 2004 तक लगातार 40 सालों तक शिक्षण, शोध और चिकित्सा कार्य में अनवरत लगे रहे। प्रो. रामहर्ष सिंह जीर्ण व्याधियों की चिकित्सा में वैशिष्ट्य रखते हैं। आयुर्वेदिक रसायनतंत्र विशेषकर मेध्य रसायनों पर उनके शोध महत्वपूर्ण हैं। शिक्षण एवं शोध कार्य के साथ प्रो. सिंह एक सफल आयुर्वेद चिकित्सक हैं और आज भी मरीज उनसे परामर्श लेने के लिए पहुंचते हैं। राष्ट्रपति द्वारा उन्हें रामनारायण शर्मा राष्ट्रीय आयुर्वेद अनुसंधान पुरस्कार, त्रिगुण अवार्ड, हरिओम आश्रम अवार्ड, धनवंतरि पुरस्कार जैसे सम्मान मिल चुके हैं। प्रो. रामहर्ष सिंह ने राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति की जिम्मेदारी भी निभाई है। वर्तमान में वे बीएचयू के आयुर्वेद संस्थान में इमेरिटस प्रोफेसर के पद पर हैं।
प्रो. ओएन श्रीवास्तव : हाइड्रोजन ऊर्जा और नैनो साइंस के विशेषज्ञ प्रो. ओएन श्रीवास्तव ने भी विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा योगदान किया है। हाइड्रोजन ऊर्जा से चलने वाले वाहन विज्ञान के क्षेत्र में उनका सबसे अहम योगदान रहे हैं। उनकी बनाई गई हाइड्रोजन कार की सवारी साल 2013 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने की थी और उनके इस कार्य को सराहा था। 1971 में बीएचयू से एमएससी और इसके बाद पीएचडी करने के बाद वो कार्नेल विश्वविद्यालय गए लेकिन फिर लौटकर उन्होंने यहीं अपनी सेवाएं देनी शुरू की। 1998 में उन्हें शांति स्वरूप भटनागर सम्मान से नवाजा गया। होमी जे भाभा अवार्ड, गोयल अवार्ड जैसे सम्मानों से उन्हें नवाजा जा चुका है। प्रो. श्रीवास्तव बीएचयू के भौतिकी विभाग में सेवारत हैं।
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पूरब अंग की गायकी को नया आयाम देने वाली गिरिजा देवी ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा के बाद ‘अमर उजाला’ से फोन पर कहा कि यह सम्मान मुझे नहीं पूरी काशी को मिला है।
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इसका श्रेय मेरे उन संगीत गुरुओं को जाता है, जिन्होंने मुझे इस लायक बनाया। अपनों के बीच ‘अप्पा जी’ के नाम से मशहूर गिरिजा देवी ने कहा कि सम्मान मिलना गर्व की बात है। बाबा विश्वनाथ करें कि इसी तरह संगीत गुरुओं को आदर मिलता रहे। उन्होंने कहा कि संगीत की परंपरा को जीने वालों को इस क्षेत्र में अच्छा काम करने की जरूरत है, ताकि बनारस के संगीत की खुशबू विश्व भर में फैलती रहे।
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उधर, ठुमरी गायिका सोमा घोष को पद्मश्री से नवाजे जाने की जब सूचना मिली तब वह प्रफुल्लित हो उठीं। उन्होंने इस मौके पर अपने धर्मगुरु मौनी बाबा के अलावा मां अर्चना चक्रवर्ती, ठुमरी गायिका बागेश्वरी देवी और डॉ. राजेश्वर आचार्य का नाम लिया। कहा कि ऐसी विभूतियों के मार्ग दर्शन की वजह से मुझे इस मुकाम तक पहुंचने की ताकत मिल सकी। अब जिम्मेदारी बढ़ गई है। संगीत ग्राम बसाने का सपना मैं साकार करूंगी।
शताब्दी वर्ष में बीएचयू के नाम आए तीन पद्मश्री
प्रो. टीके लहरी : सेवा के प्रतिमूर्ति, वक्त के पक्के और मरीजों के लिए किसी भगवान से कम नहीं। न किसी की सिफारिश ना ही अमीर-गरीब में कोई भेदभाव। जाने-माने कार्डियोथोरेसिक सर्जन बीएचयू के डॉ. टीके लहरी की यही खासियत है। रिटायर्ड होने के बाद भी मरीजों के लिए दिलोजान से लगे रहने वाले डॉ. टीके लहरी को ओपन हार्ट सर्जरी में महारत हासिल है। 1974 में बतौर लेक्चरर काशी हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़े तो उन्होंने यहां से जैसे नाता ही जोड़ लिया है। 2003 में रिटायर्ड होने के बाद उनकी इन्हीं खासियतों को देखते हुए विश्वविद्यालय ने उन्हें इमेरिटस प्रोफेसर का दर्जा दिया। 2003 से वो 2011 तक यहां इमेरिटस प्रोफेसर रहे। इसके बाद भी उनकी कर्तव्य निष्ठा को देखते हुए उनकी सेवा इमेरिटस प्रोफेसर के तौर पर अब तक ली जा रही है। 75 साल की उम्र में भी वक्त के इतने पक्के हैं कि उनके आने-जाने के समय से लोग अपनी घड़ियों का समय मिलाते हैं।
प्रो. रामहर्ष सिंह : बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के काय चिकित्सा विभाग में 1964 से 2004 तक लगातार 40 सालों तक शिक्षण, शोध और चिकित्सा कार्य में अनवरत लगे रहे। प्रो. रामहर्ष सिंह जीर्ण व्याधियों की चिकित्सा में वैशिष्ट्य रखते हैं। आयुर्वेदिक रसायनतंत्र विशेषकर मेध्य रसायनों पर उनके शोध महत्वपूर्ण हैं। शिक्षण एवं शोध कार्य के साथ प्रो. सिंह एक सफल आयुर्वेद चिकित्सक हैं और आज भी मरीज उनसे परामर्श लेने के लिए पहुंचते हैं। राष्ट्रपति द्वारा उन्हें रामनारायण शर्मा राष्ट्रीय आयुर्वेद अनुसंधान पुरस्कार, त्रिगुण अवार्ड, हरिओम आश्रम अवार्ड, धनवंतरि पुरस्कार जैसे सम्मान मिल चुके हैं। प्रो. रामहर्ष सिंह ने राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति की जिम्मेदारी भी निभाई है। वर्तमान में वे बीएचयू के आयुर्वेद संस्थान में इमेरिटस प्रोफेसर के पद पर हैं।
प्रो. ओएन श्रीवास्तव : हाइड्रोजन ऊर्जा और नैनो साइंस के विशेषज्ञ प्रो. ओएन श्रीवास्तव ने भी विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा योगदान किया है। हाइड्रोजन ऊर्जा से चलने वाले वाहन विज्ञान के क्षेत्र में उनका सबसे अहम योगदान रहे हैं। उनकी बनाई गई हाइड्रोजन कार की सवारी साल 2013 में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने की थी और उनके इस कार्य को सराहा था। 1971 में बीएचयू से एमएससी और इसके बाद पीएचडी करने के बाद वो कार्नेल विश्वविद्यालय गए लेकिन फिर लौटकर उन्होंने यहीं अपनी सेवाएं देनी शुरू की। 1998 में उन्हें शांति स्वरूप भटनागर सम्मान से नवाजा गया। होमी जे भाभा अवार्ड, गोयल अवार्ड जैसे सम्मानों से उन्हें नवाजा जा चुका है। प्रो. श्रीवास्तव बीएचयू के भौतिकी विभाग में सेवारत हैं।