राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के इंटर्न डॉक्टरों की मानदेय बढ़ाए जाने की मांगें पूरी न होने से नाराज डॉक्टरों ने शनिवार को ओपीडी, वार्ड, पढ़ाई आदि कामकाज छोड़कर फिर कॉलेज कैंपस में धरना दे दिया। इस दौरान उनकी कॉलेज के एक शिक्षक से नोकझोंक भी हो गई। शिक्षक ने पैदल मार्च निकाले जाने पर कार्रवाई की धमकी भी दी लेकिन डॉक्टर नहीं माने। करीब 200 डॉक्टरों ने एक स्वर से मानदेय बढ़ाने की मांग की। चेतावनी दी कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो वह लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री और शासन के उच्चाधिकारियों को हकीकत बताएंगे।
आयुर्वेदिक कॉलेज में सेवा करने वाले इंटर्न डॉक्टरों को इस समय 7500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इससे डॉक्टर कई दिनों से नाराज चल रहे थे। इसके पहले बृहस्पतिवार को भी डॉक्टरों ने धरना देकर अपनी आवाज बुलंद की थी। शनिवार को धरने पर बैठे डॉक्टरों ने बताया कि 15 वर्षों से अटके मानदेय संशोधन की मांग को लेकर अब तक कई बार आवाज उठाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। डॉक्टरों ने हाथों में चरक संहिता, गले में स्टेथोस्कोप और बांह पर काली पट्टी बांधकर कक्षाओं एवं ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया। राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) के स्पष्ट नियमों और अन्य राज्यों (जैसे दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश) की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी मानदेय बढ़ाकर 25,000 प्रति माह करने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन शासन स्तर पर केवल उपेक्षा ही मिल रही है। शासन स्तर से अगर जल्द ही 25 हजार रुपये मानदेय करने का शासनादेश जारी नहीं किया जाता है तो लखनऊ पहुंचकर शासन के उच्चाधिकारियों से मिलकर हकीकत बताई जाएगी।