अवधेश राय हत्याकांड: 21 सितंबर को होगी जिरह, गवाह को कोर्ट ने किया तलब, सुरक्षा के लिए पुलिस को निर्देश
31 साल पुराने अवधेश राय हत्याकांड की सुनवाई फिर शुरू हो गई है। कोर्ट ने इस मामले के गवाह विजय कुमार पांडेय को 21 सितंबर को जिरह के लिए तलब किया है
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विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) सियाराम चौरसिया की अदालत में अवधेश राय हत्याकांड की सुनवाई फिर शुरू हो गई है। कोर्ट ने इस मामले के गवाह विजय कुमार पांडेय को 21 सितंबर को जिरह के लिए तलब किया है और गवाह की सुरक्षा के लिए पुलिस को निर्देशित किया है।
पिछले दिनों बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने अदालत में इस आशय का प्रार्थना दिया था कि चश्मदीद साक्षी से शेष जिरह करने से पूर्व प्रयागराज की अदालत में विचाराधीन सरकार बनाम राकेश न्यायिक व अन्य के मुकदमे में मूल पत्रावली के मुआयने व एसएसपीजी अस्पताल से अवधेश राय के मेडिकल संबंधित प्रपत्र पत्रावली में उपलब्ध न होने के कारण बिना उसके मंगवाए शेष जिरह हो पाना संभव नहीं है।
इस संबंधी आवेदन पर अभियोजन की ओर से एडीजीसी ज्योति शंकर उपाध्याय ने आपत्ति की। अभियोजन की ओर से बताया गया कि अब सभी दस्तावेज पत्रावली में उपलब्ध हो गया है। तब कोर्ट ने आगे की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। प्रकरण के अनुसार तीन अगस्त 1991 को लहुराबीर स्थित आवास के गेट पर ही अवधेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अवधेश के भाई अजय राय ने मुख्तार अंसारी, पूर्व विधायक अब्दुल कलाम, भीम सिंह, कमलेश सिंह व राकेश न्यायिक समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
युवती से दुष्कर्म मामले में दरोगा की जमानत अर्जी खारिज
सत्र न्यायाधीश डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने युवती से दुष्कर्म के मामले में निलंबित पुरानापुल चौकी प्रभारी संग्राम सिंह यादव की जमानत अर्जी खारिज कर दी। डीजीसी फौजदारी आलोक चन्द्र शुक्ल के मुताबिक आरोपी दारोगा पर आरोप है कि वह सारनाथ क्षेत्र की युवती को जबरन उसके घर से लाकर पांडेयपुर क्षेत्र के एक कमरे में रखकर दुष्कर्म करने के साथ ही मारता पीटता और धमकाता था। युवती उसके चंगुल से भागकर पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद बीते 30 मई को मुकदमा दर्ज किया गया। आरोपी ने पुलिस दबाव बढ़ने पर गुपचुप तरीके से समर्पण कर दिया।
किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म के मामले में दोषी को 10 साल की कैद
शेष न्यायाधीश (पॉक्सो प्रथम) त्रिभुवन नाथ की अदालत ने किशोरी से दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त पवन पांडेय को दोषी पाया और दस साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने 28 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं, एक अन्य आरोपी प्रह्लाद पांडेय को आरोप सिद्ध न होने पर दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष विशेष लोक अभियोजक आदित्य नारायण सिंह और बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुज यादव के अनुसार चेतगंज थाना क्षेत्र निवासी वादी ने 17 दिसंबर 2013 को चेतगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
आरोप था कि उसकी लड़की 12 दिसंबर 2013 को स्कूल गई थी। इसी दौरान अभियुक्त पवन पांडेय, प्रह्लाद पांडेय, गौरी देवी व प्रीति पांडेय उसकी लड़की को बहला-फुसलाकर कहीं भगा ले गए। पुलिस ने विवेचना के दौरान अभियुक्त को गिरफ्तार कर पीड़िता को कब्जे से बरामद किया था। अदालत ने मुकदमे के विचारण के बाद गवाहों के बयान व साक्ष्यों के अवलोकन के बाद अभियुक्त को दोषी पाने पर सजा सुना दी।