Atique Ahmed: अतीक अहमद का बनारस से रहा सियासी कनेक्शन, 2019 में लड़ा था लोकसभा चुनाव
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान माफिया अतीक अहमद प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में बंद था। अतीक के प्रतिनिधि ने वाराणसी आकर उसका नामांकन पत्र दाखिल कर दिया था।
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उमेश पाल अपहरण कांड में उम्रकैद की सजा से दंडित माफिया अतीक अहमद शनिवार रात प्रयागराज में मारा गया। मेडिकल कॉलेज के पास अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोनों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आया गया था। अतीक वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव वाराणसी से लड़ा था।
जेल में रहते हुए नामांकन पत्र दाखिल कराया था। उसे 833 मत मिले थे। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान माफिया अतीक अहमद प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में बंद था। अतीक ने उस दौरान घोषणा की थी कि वह भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ेगा।
अतीक के प्रतिनिधि ने वाराणसी आकर उसका नामांकन पत्र दाखिल कर दिया था। अतीक को उम्मीद थी कि कोई न कोई प्रमुख राजनीतिक दल उसे समर्थन और सिंबल जरूर देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। चुनाव लड़ने के लिए अदालत से पैरोल भी नहीं मिल सकी।
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इसके बाद अतीक ने पत्र जारी कर चुनाव मैदान से हटने की घोषणा की थी। मगर, तब तक देर हो चुकी थी। अतीक का नामांकन पत्र वापस नहीं हो पाया था। चुनावी मैदान से हटने के एलान के बाद भी उसे मत मिले थे।
वाराणसी में अतीक और अशरफ के पैसे से व्यापार
दिल्ली से दूसरों के नाम-पते पर अतीक और अशरफ के गिरोह के लोग होजरी, इलेक्ट्रॉनिक व कॉस्मेटिक उत्पादों के साथ ही पान मसाला मंगवाते हैं। इसके बाद वह सामान बनारस और प्रयागराज के बाजार में खपाया जाता है।
यह सब बेहद ही गोपनीय तरीके से होता है। जो सामान दिल्ली से आता है, उसका सीजीएसटी व जीएसटी का भुगतान भी नहीं किया जाता है। अतीक और अशरफ के गिरोह से जुड़े इन लोगों पर भी जल्द ही शिकंजा कसे जाने की तैयारी है।
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