कुछ कर गुजरने की अगर चाह हो तो आप क्या नहीं कर सकते हैं। आपमें आगे बढ़ने का हौसला हो तो आप कभी आगे-पीछे नहीं देखते हैं, आपकी उम्र भी आपकी कामयाबी के आड़े नहीं आती है। सिर्फ एक प्रेरणा आपके सफल होने की ताकत बन जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बनारस के अर्जुन ने।
यूपी: बाहुबली देखकर महाभारत का 'अर्जुन' बन गया, पिता की ट्रेनिंग ने दिलवाया अटल अवार्ड
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अर्जुन उम्र में बहुत छोटे हैं। लेकिन उनका हौसला और उनकी प्रेरणा बाहुबली ने उन्हें बहुत आगे पहुंचा दिया है। दिल्ली में हुए सम्मान समारोह में 70 लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। अटल भारत स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एसोसिएशन और नेहरू युवा केंद्र संगठन की ओर से समारोह में काशी के तीरंदाज आदित्य सिंह राठौर उर्फ अर्जुन और जिला हैंडबाल के सचिव शम्स तबरेज शम्पू को भी अटल अवार्ड सम्मान मिला।
वाराणसी के बड़ा लालपुर का रहने वाला अर्जुन जब सोमवार को अपने घर पहुंचा तो लोगों का तांता लग गया जो बधाई देने उसके घर पहुंच रहे थे। पिता ने बताया कि बेटे ने बाहुबली फिल्म देखी थी। इसके बाद वह तीर-धनुष चलाने लगा। उन्होंने बताया कि इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह आगे चलकर निशानेबाज बनेगा। अर्जुन की ट्रेनिंग उसके पिता ही घर पर कराते हैं। अर्जुन कहता है कि उसे ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड चाहिए। उसे बाहुबली की तीरंदाजी बेहद पसंद है।
अटल अवार्ड के साथ अर्जुन
अमेरिका के लॉस वेगास में होने वाली अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले अर्जुन ने चीन के मकाऊ में साल 2019 के तीरंदाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था। मात्र तीन साल की उम्र से तीरंदाजी में निशाना लगा रहे अर्जुन कक्षा चार के छात्र हैं। जो 2010 में रिलीज हुई फिल्म बाहुबली-2 से प्रेरित होकर तीरंदाजी को चुना।
अर्जुन ने अक्टूबर 2017 में पहला नेशनल अंडर 9 विजवाड़ा में खेला था। उसका 16 वां स्थान था। अप्रैल 2018 में इंदौर नेशनल खेला, इसमें उसे कोई स्थान हासिल नहीं हुआ। साल 2018 में उसका सेलेक्शन इंटरनेशनल प्रिंसेस कप अंडर 12 थाईलैंड के लिए हुए। जहां वह क्वाटर फाइनल में हार गया था। लेकिन उसने हार नहीं मानी।