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अमरनाथ यात्रा: 3000 भक्तों ने करवाया पंजीकरण, इसमें 70 फीसदी युवा; भंडारे में रोजाना ठहरते हैं चार जत्थे

Fri, 28 Jun 2024 12:22 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 28 Jun 2024 12:22 PM IST
सार

Varanasi News: बाबा बर्फानी का दर्शन करने के लिए काशी के भक्त भी रवाना हो रहा हैं। इसमें युवाओं की भागीदारी ज्यादा है। युवा भक्त वहां आयोजित भंडारे में भी अपनी सेवा देते हैं। बाबा अमरनाथ के भक्तों की सेवा कर वे पुण्य लाभ कमाते हैं।

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Amarnath Yatra 3000 people registered four groups stay for Bhandaar in Jammu every day
श्री अमरनाथ धाम। - फोटो : फिरदौस, गांदरबल

विस्तार

बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा में बाबा अमरनाथ के दर्शन 29 जून से शुरू होंगे। दर्शन-पूजन के लिए बनारस से भी श्रद्धालुओं के जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। बुधवार को काशी से दो जत्था अमरनाथ के लिए रवाना हुआ। 

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वहीं, जिले में तीन हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अस्पतालों में सेहत की जांच के लिए पंजीकरण करवाया है। दर्शन के लिए सबसे ज्यादा युवा रुचि दिखा रहे हैं। पंजीकरण कराने वालों में 70 फीसदी 20 से 40 वर्ष के हैं।
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बुधवार को बेगमपुरा एक्सप्रेस से लक्सा के नई बस्ती से आठ श्रद्धालुओं की टोली हाथ में त्रिशूल लिए बाबा के जयकारे लगाते हुए रवाना हुई। जबकि श्री बाबा काशी विश्वनाथ सेवा समिति के बैनर तले जम्मू में भंडारा शिविर लगाने के लिए 60 सेवादारों का जत्था भी रवाना हुआ। 
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समिति के अध्यक्ष दिलीप सिंह बंटी ने बताया कि बनारस से हर साल तीन से चार हजार श्रद्धालु दर्शन पूजन करने पहुंचते हैं। शिविर में यहां के करीब सभी श्रद्धालु आकर ठहरते हैं। प्रतिदिन तीन से चार जत्था ठहरता है। हर जत्थे में 10 से 30 श्रद्धालु होते हैं। हालांकि कुछ यात्री ऑनलाइन भी पंजीकरण करवाकर जाते हैं। बाबा अमरनाथ के दर्शन 29 जुलाई से शुरू होकर रक्षाबंधन तक होते हैं।

तीन अस्पतालों में हो रही है जांच

जिले में मंडलीय अस्पताल, पं. दीनदयाल अस्पताल और लालबहादुर शास्त्री अस्पताल रामनगर में अमरनाथ यात्रियों का पंजीकरण हो रहा है। उनकी सेहत की जांच कर फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जा रहा है। मंडलीय अस्पताल में 15 सौ से अधिक श्रद्धालुओं ने पंजीकरण करवाया है। जबकि अन्य दोनों अस्पतालों में भी 1500 से अधिक का पंजीकरण हुआ है। अभी और पंजीकरण हो रहे हैं।

बोले अधिकारी
अमरनाथ यात्रा की सेहत की जांच के लिए मंडलीय, जिला अस्पताल और लालबहादुर शास्त्री अस्पताल में पंजीकरण हो रहा है। जांच के बाद उन्हें हेल्थ सर्टिफिकेट दिया जाता है। जांच करवाने वालों में सबसे ज्यादा 20 से 45 वर्ष के युवा शामिल हैं। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ

कालाष्टमी: शोभन योग में कल शिवस्वरूप में भैरव बाबा की होगी पूजा

भगवान शिव के स्वरूप बाबा भैरव का कालाष्टमी पर शनिवार को दर्शन-पूजन होगा। श्रद्धालु व्रत रखकर भैरव मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगे और आरोग्य सुख की प्राप्ति की कामना करेंगे। इस बार शोभन योग का अनूठा संयोग बन रहा है। बाबा के दर्शन से अकाल मृत्यु का भय और कठिनाइयों का निवारण होता है।

भगवान शिव के दो स्वरूप हैं। पहला भक्तों को अभय प्रदान करने वाले विश्वेश्वर का रूप और दूसरा दंड देने वाला भैरव रूप। भगवान विश्वेश्वर अत्यंत सौम्य और शांति के प्रतीक हैं, जबकि भैरव बाबा का रूप अत्यंत रौद्र व प्रचंड है। कालाष्टमी परभैरव बाबा के दर्शन और पूजन का विधान है। 

श्रद्धालु व्रत रखकर भैरव बाबा का पंचोपचार, दशोपचार और षोडशोपचार पूजन करेंगे। भैरव मंदिरों में शृंगार होगा। धूप-दीप, नैवेद्य, पुष्प, ऋतुफल आदि अर्पित कर पूजा की जाएगी। बाबा को उड़द की दाल से बने बड़े, इमरती और अन्य मिष्ठान का भोग लगेगा। 

ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि शुक्रवार की शाम 4:28 बजे से 29 जून को दोपहर 2:28 बजे तक रहेगी। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र शुक्रवार को सुबह 10:11 बजे से शनिवार 29 जून को सुबह 8:50 बजे तक रहेगा। इसके बाद रेवती नक्षत्र शुरू हो जाएगा।

कई जन्मों के पुण्य से काशी में मिलता है कथा सुनने का अवसर

भट्ट ब्राह्मण महासभा काशी की ओर से दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय में चल रही नौ दिवसीय शिवमहापुराण कथा का हवन पूजन के साथ समापन हुआ। 

अंतिम दिन कथाव्यास आचार्य महामाया प्रसाद ने कहा कि जब कई जन्मों के पुण्यफल के बाद व्यक्ति को काशी में शिवमहापुराण कथा श्रवण का अवसर मिलता है। यहां पर देह त्यागने पर उनको मोक्ष की प्राप्ति होती है। गुड़गांव और दिल्ली से आए 150 श्रद्धालु कथा में शामिल हुए। 

संस्था के अध्यक्ष पं. बसंत राय और आयोजक पं. अशोक शर्मा ने आयोजक मंडल टीम को सम्मानित किया। इस मौके पर संरक्षक डाॅ. हरिद्वार शर्मा, महेंद्र शर्मा, विनोद कुमार, राजेश कुमार शर्मा, आचार्य देव नारायण भट्ट, पं. महेंद्र शरण आदि रहे। 

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