अमर उजाला संवाद: ज्योतिष में 66 डिग्री से ऊपर की गणना ही नहीं एआई 90 डिग्री पर बना रहा जन्मपत्री-कुंडली
अमर उजाला ऑफिस में ज्योतिष और एआई पर आयोजित संवाद में विशेषज्ञों ने कहा कि वैदिक ज्योतिष की गहराई को कोई एआई या सॉफ्टवेयर पूरी तरह नहीं समझ सकता। उनका तर्क था कि जन्मपत्री निर्माण में कई सूक्ष्म जानकारियां महत्वपूर्ण होती हैं, जिन्हें एआई एप नजरअंदाज कर देते हैं। वैदिक काल से हाथ से तैयार की जा रही कुंडली और ज्योतिष के हजारों ग्रंथों का विकल्प आधुनिक तकनीक नहीं बन सकती।
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ज्योतिष के एआई एप और सॉफ्टवेयर 67 डिग्री, 75 डिग्री और 80-90 डिग्री अक्षांश पर गणना करके फर्जी कुंडली और जन्मपत्री बना रहे हैं। जबकि धर्मशास्त्र कहता है कि 66 डिग्री अक्षांश के ऊपर विचित्र स्थिति होने से कुंडली बनाना और फलादेश संभव नहीं है।
एआई का यह ज्ञान ज्योतिष के 2000 ग्रंथों से परे है। प्रसव कक्ष में दीया कितना जला, बच्चा पैदा हुआ तो कक्ष में कितनी महिलाएं थीं, इससे लग्न देखा जाता है। यह सब एआई एप नहीं पूछता, इसलिए जब तक प्रोग्रामिंग बेहतर न हो, तब तक हाथ से बनी कुंडली का कोई तोड़ नहीं है। हर एप के अलग-अलग गणितीय मान हैं। एप से पूछेंगे कि मेरी मृत्यु कब होगी, तो जवाब दे देगा, मगर इसका विश्लेषण नहीं करेगा कि इससे आप कितनी जल्दी डिप्रेशन में चले जाएंगे।
वैदिक युग से हाथ से कुंडलियां बन रही हैं। तब धूपघड़ी और हनुमत ध्वजा से ही गणना होती थी। हर एप के अपने-अपने ग्रह-नक्षत्र तय हैं। जबकि गणितीय डेटा जितना ज्यादा हो और मिक्सिंग जितनी कम हो, तभी सॉफ्टवेयर की कुंडली सटीक होगी। प्रसव के समय कमरे में कितनी महिलाएं थीं, इसका ज्ञान कर लग्न को चेक करना पड़ता था। सामने आकर समस्या बताइए, तभी बेहतर फलादेश होगा। क्या यह एआई से संभव है? आजकल उपाय बताकर ठगी वाली ओटीपी भी भेजी जा रही है। - प्रो. शत्रुध्न त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष, ज्योतिष विभाग, बीएचयू
आज का एआई शैशवावस्था में है, लेकिन यह खराब नहीं है। 21वीं सदी में हमें विज्ञान को साथ लेकर चलना है। उसे बताना होगा कि आपकी विद्या भी प्रमाणिक है। सन् 2000 में कुंडली के सॉफ्टवेयर बने। यदि कुंडली का निर्माण करना है, तो दिक् गणित को लेना होगा। सूर्य सिद्धांत पर पंचांग और कुंडली दो मिनट में बन जाएगी। यदि सॉफ्टवेयर प्रमाणिक है, तो उसका गणित लेकर फलादेश अपना करेंगे। ज्योतिषाचार्य में आंतरिक और आध्यात्मिक शक्ति भी होती है। - प्रो. सुभाष पांडेय, ज्योतिष विभाग, बीएचयू
ज्योतिष शास्त्र केवल हमारे इस जन्म को ही नहीं, पूर्व जन्मों का भी परिणाम बताता है। कुंडलियां अब महीनों नहीं, मिनटों में बनती हैं। लेकिन अलग-अलग एप पर एक ही समय और जन्म विवरण डालने पर दशाएं बदल जाती हैं। कई बार बच्चे का सिर मां के शरीर से बाहर नहीं आया होता, लेकिन रोने की आवाज आ जाती है, तभी जन्म का समय माना जाता है। लेकिन यदि बच्चा दुनिया में आ गया और 20 सेकेंड बाद रोया, तो वही जन्म समय होगा। यह ज्ञान और अनुभव के आधार पर ही संभव है। - प्रो. अमित शुक्ला, विभागाध्यक्ष, ज्योतिष विभाग, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
कंप्यूटर, एआई और हाथ से बनी तीनों कुंडलियों में दशा और महादशा का अंतर आ जाता है। दोनों गणित में अंतर के पीछे कारण यह है कि सवा दो नक्षत्र में एक राशि होती है और एक नक्षत्र का चरण छह घंटे का होता है। नक्षत्र संधिकाल होगा तो महादशा में अंतर आ जाएगा। बिना सूक्ष्म गणना के अच्छा फलित नहीं किया जा सकता। सॉफ्टवेयर कुंडली नासा की गणित पर आधारित है। - पंडित ऋषि द्विवेदी, ज्योतिषी
हम ज्योतिष में दो और दो जोड़ रहे हैं, तो उसे भी मशीन से कन्फर्म कर रहे हैं कि वह सही है या नहीं। कुंडली वाले सॉफ्टवेयर आधुनिक गणित की पद्धति पर बन रहे हैं। इनमें सूर्य सिद्धांत आधारित सॉफ्टवेयर भी हैं। यदि भारतीय रीति से सॉफ्टवेयर बनें, तभी गणना सटीक हो सकती है। सूक्ष्म स्तर की गणितीय गणना के आधार पर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना चाहिए। - डॉ. मधुसूदन मिश्र, ज्योतिष विभाग, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
ज्योतिष का एप शरीर है और विद्वान की बनाई कुंडली आत्मा है। इसके बिना जीवन की कामना नहीं की जा सकती। देश-काल के अनुसार ही ज्योतिषीय गणना होनी चाहिए। यह काम एआई से संभव नहीं है। एप आपको मांगलिक तो बता देगा, लेकिन भाव हाथ से ही निकलेगा। मृत्यु कब होगी, यह बता देगा, लेकिन ज्योतिषीय मनोभाव नहीं बताएगा कि इससे आप डिप्रेशन में चले जाएंगे। - सैयद हसन रजा, एमए (एस्ट्रोलॉजी), बीएचयू
ज्योतिषीय गणना के जितने भी अलग-अलग सिद्धांत हैं, वे स्पष्ट हो जाएं। विद्वानों को एकमत होना चाहिए कि हमें किस एप या माध्यम का पालन करना है। हाथ, सॉफ्टवेयर और एआई की गणना में जन्म के समय का नक्षत्र और लग्न सब बदल जा रहा है। एआई का इस्तेमाल हर कोई कर रहा है, मगर ज्योतिष विद्या का सटीक ज्ञान उनके पास नहीं है। यह समस्या तब खत्म की जा सकती है, जब सिद्धांत एक ही हो। - डॉ. अधोक्षज पांडेय, पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप, ज्योतिष विभाग, बीएचयू