सावधान! साइबर ठग बिछा रहे जाल, प्रधानमंत्री बेरोजगारी भत्ता के लिए लिंक या ई-मेल आए तो हो जाएं सतर्क
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वाराणसी के सिकरौल क्षेत्र के अनिल पांडेय के ई-मेल पर हाल ही में प्रधानमंत्री बेरोजगारी भत्ता योजना 2021 से संबंधित लिंक आया। अनिल ने लिंक को क्लिक कर विवरण भरा तो कुछ देर बाद उनके बैंक खाते से 11,500 रुपये कट गए। कुछ ऐसा ही भगवानपुर के निशांत सिंह और कमच्छा क्षेत्र के रौनक शर्मा के साथ भी हुआ है। दरअसल, ऐसी कोई योजना ही नहीं है और यह साइबर ठगी का एक तरीका है।
साइबर ठगों ने प्रधानमंत्री बेरोजगारी भत्ता योजना 2021 के नाम पर फर्जी ब्लॉग बनाया है।
इस ब्लॉग में वर्ष 2021 में 10 करोड़ से अधिक परिवारों और 50 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को योजना से लाभान्वित करने की बात कही गई है। इसके साथ ही 18 साल से अधिक उम्र के प्रत्येक भारतीय नागरिक को प्रतिमाह 3,500 रुपये बेरोजगारी भत्ता देने का दावा किया गया है। इस फर्जी ब्लॉग के यूआरएल/लिंक को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप के जरिए वायरल किया जा रहा है।
लिंक पर क्लिक करते ही नाम, मोबाइल नंबर, उम्र, शैक्षणिक योग्यता और नागरिकता जैसी जानकारियां मांगी जाती है। विवरण भरने के बाद स्क्रीन पर - मुबारक हो आप पीएम बेरोजगारी भता योजना के पात्र हैं... संदेश के साथ यह बताया जाता है कि आप 3,500 रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता अपने ग्राम विकास अधिकारी से प्राप्त कर सकेंगे। अंतिम सूची में नाम जुड़वाने के लिए लिंक को 10 लोगों को शेयर करने को कहा जा रहा है। इतना सब करने के बाद भी मिलता कुछ नहीं, बल्कि निजी जानकारियां हासिल कर जालसाज आर्थिक चपत लगा देते हैं।
जालसाज डेटा चोरी कर ठगी को अंजाम देते हैं
साइबर क्राइम एक्सपर्ट विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि साइबर जालसाज प्रधानमंत्री बेरोजगारी भत्ता योजना के नाम पर डेटा चोरी कर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। जिस पेज पर विवरण भरना है, वह गूगल फॉर्म के रूप में खुल रहा है। विवरण भरने के कुछ दिन बाद साइबर ठग फोन कर योजना की पात्रता की जांच के नाम पर अन्य जानकारियां हासिल कर तगड़ी चपत लगा रहे हैं। इसलिए सही सरकारी वेबसाइट पर ही सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें।
इस तरह निशाना बना रहे जालसाज
साइबर क्राइम एक्सपर्ट विजय ने बताया कि व्हाट्सएप पर जो अनजान लिंक प्राप्त हो रहे हैं, वे अपनों द्वारा ही भेजे जाते हैं। लिंक में स्टेनोग्राफी तकनीक के जरिये रिमोट एक्सेस ट्रोजन (रैट) अटैच कर जालसाज मोबाइल फोन में एक्सेस प्राप्त कर चूना लगा रहे हैं। लिंक को क्लिक करते ही बैकग्राउंड में रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड हो जाता है, जो स्क्रीन पर दिखाई नहीं देता।
त्योहार के समय में ऑफर के ई-मेल और लिंक से सतर्क रहें
साइबर क्राइम एक्सपर्ट विजय ने कहा कि होली नजदीक है। इसे देखते हुए साइबर जालसाज भी सक्रिय हो गए हैं। जालसाज लोगों को नामीगिरामी कंपनी के नाम से छूट के ई-मेल और लिंक भेजते हैं। ई-मेल और लिंक पर क्लिक करते ही जालसाज निजी डेटा हैक कर लेते हैं और फिर बैंक खाते में सेंध लगाते हैं। इसलिए यदि किसी कंपनी का कोई उत्पाद खरीदना है या छूट की जानकारी लेनी है तो सीधे उसकी वेबसाइट को ही एक्सेस करें। अन्यथा की स्थिति में साइबर क्राइम का शिकार होने में देर नहीं लगेगी।