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वाराणसी: सब्जी और अनाज के बाद अब गोबर की खाद भी जाएगी विदेश, दक्षिण कोरिया ने की 25 टन वर्मी कंपोस्ट की मांग
Sat, 06 Nov 2021 12:12 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sat, 06 Nov 2021 12:12 PM IST
सार
मिर्जापुर के नव चेतना किसान संगठन (एफपीओ) से 25 टन वर्मी कंपोस्ट खाद की मांग दक्षिण कोरिया की ओर से की गई है। जिसमें बनारस के किसान धर्मेंद्र का भी 10 टन वर्मी कंपोस्ट शामिल किया गया है।
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वर्मी कंपोस्ट
- फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
सब्जी और अनाज के बाद अब बनारस के किसानों की गोबर की खाद भी विदेश भेजी जाएगी। इसके लिए मिर्जापुर के नव चेतना किसान संगठन (एफपीओ) से 25 टन वर्मी कंपोस्ट खाद की मांग दक्षिण कोरिया की ओर से की गई है।
एफपीओ के निदेशक चंद्रमौली पांडेय ने बताया कि संगठन की ओर से बीते 2020 से वर्मी कंपोस्ट (गोबर की खाद) का निर्यात किया जा रहा है। मार्च 2020 से अब तक नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश में वर्मी कंपोस्ट का निर्यात किया जा चुका है। अब दक्षिण कोरिया से भी 25 टन की मांग की गई है। जिसमें बनारस के आराजीलाइन के रखउना गांव के युवा किसान धर्मेंद्र का भी 10 टन वर्मी कंपोस्ट शामिल किया गया। जिसे इसी माह के अंत में कोलकाता से पानी के जहाज के माध्यम से भेजा जाएगा।
पढ़ेंः वाराणसी के जयापुर में बनेगा पहला सीड प्रोसेसिंग यूनिट, केंद्र से मंजूरी मिलने का इंतजार
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इधर, पहली बार वर्मी कंपोस्ट का निर्यात कर रहे धर्मेंद्र ने बताया कि अभी तक उनकी खाद बनारस सहित चंदौली, मिर्जापुर, आजमगढ़ के सैकड़ों ग्राहक हैं जो किचन गार्डेन और नर्सरी में प्रयोग के लिए खरीदते हैं। पहली बार यह मौका है जब वर्मी कंपोस्ट विदेश जाएगा।
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एफपीओ के निदेशक चंद्रमौली पांडेय ने बताया कि संगठन की ओर से बीते 2020 से वर्मी कंपोस्ट (गोबर की खाद) का निर्यात किया जा रहा है। मार्च 2020 से अब तक नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश में वर्मी कंपोस्ट का निर्यात किया जा चुका है। अब दक्षिण कोरिया से भी 25 टन की मांग की गई है। जिसमें बनारस के आराजीलाइन के रखउना गांव के युवा किसान धर्मेंद्र का भी 10 टन वर्मी कंपोस्ट शामिल किया गया। जिसे इसी माह के अंत में कोलकाता से पानी के जहाज के माध्यम से भेजा जाएगा।
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इधर, पहली बार वर्मी कंपोस्ट का निर्यात कर रहे धर्मेंद्र ने बताया कि अभी तक उनकी खाद बनारस सहित चंदौली, मिर्जापुर, आजमगढ़ के सैकड़ों ग्राहक हैं जो किचन गार्डेन और नर्सरी में प्रयोग के लिए खरीदते हैं। पहली बार यह मौका है जब वर्मी कंपोस्ट विदेश जाएगा।
20 हजार रुपये की लागत से शुरू किया था काम
वर्ष 2018 में मजदूर पिता के सहयोग जैसे तैसे करके हाथरस से एग्रीकल्चर में डिप्लोमा कोर्स करके पांच से 10 हजार की नौकरी तलाश करते रहे लेकिन नौकरी नहीं मिली। थक हार कर धर्मेंद्र ने केवीके में पांच दिनों का वर्मी कंपोस्ट बनाने का प्रशिक्षण डॉ. नवीन कुमार सिंह के निर्देशन में लिया। इसके बाद दोस्त के सहयोग से 20 हजार रुपये की लागत से वर्मी कंपोस्ट खाद के निर्माण का कार्य शुरू किया। बीते तीन साल में धर्मेंद्र 12 लाख रुपये की आमदनी कर चुके हैं।