फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Admission process at BHU lasted five months yet 40% of PG seats remain vacant in varanasi

BHU: बीएचयू में पांच महीने चली प्रवेश प्रक्रिया, फिर भी पीजी की 40% सीटें खाली; पढ़ें- पूरा मामला

Tue, 11 Nov 2025 03:22 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 11 Nov 2025 03:22 PM IST
सार

बीएचयू में पांच महीने प्रवेश प्रक्रिया चली, फिर भी पीजी की 40% सीटें खाली रह गईं। इसे लेकर बीएचयू से आरटीआई में दाखिले की सीटों से जुड़े 10 सवाल पूछे गए थे, जिसमें से सिर्फ एक का ही जवाब आया।

विज्ञापन
Admission process at BHU lasted five months yet 40% of PG seats remain vacant in varanasi
बीएचयू कैंपस में कुछ इस तरह जाते दिखे छात्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू में लगभग पांच महीने मई से सितंबर तक प्रवेश की लंबी प्रक्रिया चली उसके बाद भी पीजी की करीब 40 फीसदी सीटें खाली रह गई हैं। बीएचयू से आरटीआई में दाखिले की सीटों से जुड़े 10 सवाल पूछे गए थे जिसमें से सिर्फ एक का ही जवाब आया। बीएचयू के सेंट्रल एडमिशन कमेटी सीएसी के दिए जवाब के मुताबिक यूजी में 9114 और पीजी में 6365 सीटों पर दाखिले हो चुके हैं। जबकि पीजी में 10500 और यूजी में करीब 11 हजार सीटों पर प्रवेश होना था। 

विज्ञापन


आरटीआई में केंद्रीय प्रवेश समिति ने शर्तों के साथ पांच सवालों के जवाब नहीं दिए। एक सवाल परीक्षा नियंता कार्यालय को फॉरवर्ड किया गया और बाकियों के लिए बीएचयू के एडमिशन कमेटी के वेबपेज से जानकारी लेने की बात कही गई। बीएचयू के सेंट्रल एडमिशन कमेटी ने न तो खाली सीटों का विवरण दिया और न ही पूरे दाखिले की प्रक्रिया में हुए खर्च के बारे में बताया।

विज्ञापन

एनपीएस की तरह हुईं सीटें, हर साल ही रहती हैं खाली

बीएचयू में हालिया हुए एकेडमिक काउंसिल की बैठक में भी इन खाली सीटों का मुद्दा उठाया गया था जिस पर अधिकारियों का जवाब आया कि कई सीटें ऐसी हैं जो कि हर बार खाली ही रह जाती हैं। ये सीटें एनपीएस यानी कि नॉन परफॉर्मिंग सीट की तरह से हैं। ये समस्या सबसे ज्यादा पीजी दाखिले में आती है। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय, वोकेशनल कोर्स, बंगाली और तेलुगु सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं की सीटें खाली रह गईं हैं। 

इसे भी पढ़ें; PHOTOS: दालमंडी में भारी सुरक्षा के बीच चस्पा किए नोटिस, ड्रोन से निगरानी; काली पट्टी बांध विरोध जता रहे लोग
 
एसवीडीवी में आरक्षित सीटें यानी कि एससी और एसटी वर्ग की खाली ही रह जाती हैं। दरअसल आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी इन धर्म अनुष्ठान के कोर्स में प्रवेश ही नहीं लेते। लिहाजा हर सत्र में करीब 40 से 50 फीसदी सीटें नहीं भर पातीं। वहीं कोविड के बाद से वोकेशनल कोर्स की सीटों पर प्रवेश कम हो पा रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed