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काशी में हारे, दिल्ली में हराया
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
Updated Wed, 11 Feb 2015 12:41 AM IST
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काशी के महासमर में अपनी पराजय का हिसाब आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में सूद समेत चुकता कर लिया। जैसे-जैसे बढ़त का ग्राफ चढ़ता गया, आप समर्थक और कार्यकर्ताओं की संख्या सड़कों पर बढ़ने लगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों के बड़े-बड़े दावों के सामने जो लोग आमतौर पर चुप रहना ही बेहतर समझते थे, उन लोगों में जोश आ गया। अस्सी की अड़ी पर कहासुनी इतनी बढ़ गई कि जो लोग केजरीवाल की टीम को चिढ़ाने से चूकते नहीं थे, वे इस बात की गुहार लगाते दिखे कि ‘हार गए तो क्या हुआ, चिढ़ाइए मत’।
मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अरविंद केजरीवाल ने काशी का रुख किया तो खिल्ली ही उड़ाई गई। चौक में उन पर अंडे फेंके गए और पिपलानी कटरा के पास स्याही। आज इसी सड़क पर आप कार्यकर्ताओं ने जोश के साथ जुलूस निकाला। शहर के विभिन्न हिस्सों से जुलूस लहुराबीर पहुंचा और वहां से ढोल-नगाड़े की धुन पर नाचते हुए कार्यकर्ता बेनियाबाग, मदनपुरा, लंका होते हुए नेवादा पहुंचे। जब केजरीवाल काशी आए थे तब उनके पास संगठन नहीं था और जब गए तो संगठन छिन्न-भिन्न हो गया।
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मगर दिल्ली की जीत ने एक बार फिर सबको एक कर दिया। भैंसासुर घाट पर उनकी जीप का पहिया चढ़ने से घायल हुए मुकेश सिंह ने जीत की खबर सुनते ही फूलों की होली खेली। वह कहते हैं कि शहर के विकास के बड़े-बड़े वादे सुनकर कान पक गए थे। केजरीवाल यहां के सांसद होते तो भले ही प्रधानमंत्री नहीं होते लेकिन अपनों को लिए लड़ते तो।
रिश्तेदारों के विरोध के बावजूद आप को चुनाव कार्यालय के लिए जगह देने वाले महमूरगंज के मुकुंद सिंह कहते हैं कि बड़ी जलालत झेलनी पड़ी थी। विश्वास था कि जुझारू तेवर वाले केजरीवाल हिसाब जरूर बराबर करेंगे। आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. आनंद कुमार भी मानते हैं कि दिल्ली की जीत का बीजारोपण काशी में ही हुआ था। यहां से सबक लेकर ही अरविंद ने दिल्ली पर फोकस किया और भाजपा का दर्प ही छीन लिया।
महमूरगंज के देवेन रोकडि़या पुराने अपमान का बदला लेने पर उतारू थे और दिन भर सबसे यही कहते रहे कि ‘भगोड़ा बोलो, अब कायर कहो’। अस्सी की अड़ी पर डा. सरोज यादव ने सुबह जब जीत पर ललकारना शुरू किया तो पहले तो गालीगलौज हुई लेकिन शाम तक भाजपा समर्थक ‘हार गए तो क्या हुआ चिढ़ाइए मत’ की अपील करने लगे। पूर्व मंत्री शतरूद्र प्रकाश तो सिर्फ यही कहते हैं कि बनारस को सोचना होगा कि वह बदनसीब है या खुशनसीब।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों के बड़े-बड़े दावों के सामने जो लोग आमतौर पर चुप रहना ही बेहतर समझते थे, उन लोगों में जोश आ गया। अस्सी की अड़ी पर कहासुनी इतनी बढ़ गई कि जो लोग केजरीवाल की टीम को चिढ़ाने से चूकते नहीं थे, वे इस बात की गुहार लगाते दिखे कि ‘हार गए तो क्या हुआ, चिढ़ाइए मत’।
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मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अरविंद केजरीवाल ने काशी का रुख किया तो खिल्ली ही उड़ाई गई। चौक में उन पर अंडे फेंके गए और पिपलानी कटरा के पास स्याही। आज इसी सड़क पर आप कार्यकर्ताओं ने जोश के साथ जुलूस निकाला। शहर के विभिन्न हिस्सों से जुलूस लहुराबीर पहुंचा और वहां से ढोल-नगाड़े की धुन पर नाचते हुए कार्यकर्ता बेनियाबाग, मदनपुरा, लंका होते हुए नेवादा पहुंचे। जब केजरीवाल काशी आए थे तब उनके पास संगठन नहीं था और जब गए तो संगठन छिन्न-भिन्न हो गया।
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मगर दिल्ली की जीत ने एक बार फिर सबको एक कर दिया। भैंसासुर घाट पर उनकी जीप का पहिया चढ़ने से घायल हुए मुकेश सिंह ने जीत की खबर सुनते ही फूलों की होली खेली। वह कहते हैं कि शहर के विकास के बड़े-बड़े वादे सुनकर कान पक गए थे। केजरीवाल यहां के सांसद होते तो भले ही प्रधानमंत्री नहीं होते लेकिन अपनों को लिए लड़ते तो।
रिश्तेदारों के विरोध के बावजूद आप को चुनाव कार्यालय के लिए जगह देने वाले महमूरगंज के मुकुंद सिंह कहते हैं कि बड़ी जलालत झेलनी पड़ी थी। विश्वास था कि जुझारू तेवर वाले केजरीवाल हिसाब जरूर बराबर करेंगे। आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. आनंद कुमार भी मानते हैं कि दिल्ली की जीत का बीजारोपण काशी में ही हुआ था। यहां से सबक लेकर ही अरविंद ने दिल्ली पर फोकस किया और भाजपा का दर्प ही छीन लिया।
महमूरगंज के देवेन रोकडि़या पुराने अपमान का बदला लेने पर उतारू थे और दिन भर सबसे यही कहते रहे कि ‘भगोड़ा बोलो, अब कायर कहो’। अस्सी की अड़ी पर डा. सरोज यादव ने सुबह जब जीत पर ललकारना शुरू किया तो पहले तो गालीगलौज हुई लेकिन शाम तक भाजपा समर्थक ‘हार गए तो क्या हुआ चिढ़ाइए मत’ की अपील करने लगे। पूर्व मंत्री शतरूद्र प्रकाश तो सिर्फ यही कहते हैं कि बनारस को सोचना होगा कि वह बदनसीब है या खुशनसीब।