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जुआ, सूदखोरी ने की बुनकरों की हालत खस्ता
Varanasi
Updated Sun, 26 May 2013 05:30 AM IST
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लोहता। दिन भर खटकर दो-तीन सौ रुपये कमाने के बजाय बुनकरों की नई पीढ़ी तुरंत अमीर होना चाहती है। इस चक्कर में बदहाली बढ़ती जा रही है। मोबाइल लाटरी और जुआ के फड़ों पर रोजाना हजारों का वारा-न्यारा हो रहा है। जुआ में हारने के बाद बुनकर कर्ज लेते हैं और उसका ब्याज चुकाने में तबाह हो रहे हैं। क्षेत्रीय ग्राम प्रधानों का कहना है कि युवाओं में नशे की लत भी तेजी से पनप रही है।
हैंडलूम पर काम करने वाला बुनकर दिन भर खटने के बाद मुश्किल से ढाई से तीन सौ रुपये तक का काम कर पाता है। इसमें उसके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी काम करते हैं। कोई नरी भरता है, कोई गुल्ला बनाता है। कोई कढ़ाई करता है। पावरलूम पर मजदूरी बिजली की उपलब्धता पर निर्भर है। लगातार आठ घंटे की एक शिफ्ट होती है। शिफ्ट भर काम करने पर बुनकर दो सौ रुपये तक कमा पाते हैं। यह रकम रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी है।
ऐसे में युवा बुनकर आसानी से अधिक रकम कमाने के चक्कर में जुआ के फड़ों पर पहुंचने लगे हैं। धन्नीपुर, रहीमपुर, कन्हई सराय, हरपालपुर, महमूदपुर, रेलवे लाइन के किनारे जुआरियों का जमावड़ा हो रहा है। एक-एक फड़ पर सौ से डेढ़ सौ लोग जुआ खेलते देखे जा सकते हैं। खेतों में खेल होने के कारण पुलिस के लिए इनको घेर पाना आसान नहीं है।
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लोहता थानाध्यक्ष तहसीलदार सिंह का कहना है कि जुआरी खुले स्थान पर खेलते हैं और घेराबंदी करने पर भाग जाते हैं। इसके बावजूद दर्जनों जुआरियों को पकड़ा गया है। उनका कहना है कि देखा गया है कि खेलने वाले सौ-दो सौ रुपये से ज्यादा का दांव नहीं लगाते हैं। मोबाइल लाटरी पर भी दांव लगाए जा रहे हैं। जुआ खेलने वालों को उधार देने वालों की भी संख्या बढ़ी है। ये सूदखोर पांच सौ से हजार रुपये तक उधार देते हैं। किसी ने पांच सौ रुपये उधार लिया तो उसे रोजाना सूदखोर को 20 रुपए ब्याज के रूप में देने पड़ते हैं। यदि ब्याज देने में एक दिन का नागा हो जाए तो 10 रुपये फाइन भी चुकाना पड़ता है।
लोहता के प्रधानपति इम्तियाज का कहना है कि जुआ और कर्ज के मकड़जाल में फंसा बुनकर अपने परिवार को दो वक्त की रोटी मुहैया नहीं करा पा रहा है। उनका कहना है कि नवयुवकों में नशे की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। हरपालपुर के ग्राम प्रधान इकबाल अहमद भी युवाओं में जुआ की बढ़ती प्रवृत्ति से चिंतित हैं।
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हैंडलूम पर काम करने वाला बुनकर दिन भर खटने के बाद मुश्किल से ढाई से तीन सौ रुपये तक का काम कर पाता है। इसमें उसके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी काम करते हैं। कोई नरी भरता है, कोई गुल्ला बनाता है। कोई कढ़ाई करता है। पावरलूम पर मजदूरी बिजली की उपलब्धता पर निर्भर है। लगातार आठ घंटे की एक शिफ्ट होती है। शिफ्ट भर काम करने पर बुनकर दो सौ रुपये तक कमा पाते हैं। यह रकम रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी है।
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ऐसे में युवा बुनकर आसानी से अधिक रकम कमाने के चक्कर में जुआ के फड़ों पर पहुंचने लगे हैं। धन्नीपुर, रहीमपुर, कन्हई सराय, हरपालपुर, महमूदपुर, रेलवे लाइन के किनारे जुआरियों का जमावड़ा हो रहा है। एक-एक फड़ पर सौ से डेढ़ सौ लोग जुआ खेलते देखे जा सकते हैं। खेतों में खेल होने के कारण पुलिस के लिए इनको घेर पाना आसान नहीं है।
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लोहता थानाध्यक्ष तहसीलदार सिंह का कहना है कि जुआरी खुले स्थान पर खेलते हैं और घेराबंदी करने पर भाग जाते हैं। इसके बावजूद दर्जनों जुआरियों को पकड़ा गया है। उनका कहना है कि देखा गया है कि खेलने वाले सौ-दो सौ रुपये से ज्यादा का दांव नहीं लगाते हैं। मोबाइल लाटरी पर भी दांव लगाए जा रहे हैं। जुआ खेलने वालों को उधार देने वालों की भी संख्या बढ़ी है। ये सूदखोर पांच सौ से हजार रुपये तक उधार देते हैं। किसी ने पांच सौ रुपये उधार लिया तो उसे रोजाना सूदखोर को 20 रुपए ब्याज के रूप में देने पड़ते हैं। यदि ब्याज देने में एक दिन का नागा हो जाए तो 10 रुपये फाइन भी चुकाना पड़ता है।
लोहता के प्रधानपति इम्तियाज का कहना है कि जुआ और कर्ज के मकड़जाल में फंसा बुनकर अपने परिवार को दो वक्त की रोटी मुहैया नहीं करा पा रहा है। उनका कहना है कि नवयुवकों में नशे की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। हरपालपुर के ग्राम प्रधान इकबाल अहमद भी युवाओं में जुआ की बढ़ती प्रवृत्ति से चिंतित हैं।