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गुड न्यूज, पूर्वांचल में समय से आएगा मानसून
Varanasi
Updated Fri, 24 May 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। इस वर्ष मानसून समय से सक्रिय हुआ है और मौसम विज्ञानी अच्छी बारिश की संभावना जता रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में तो मानसून ने दस्तक भी दे दी है। जबकि, अरब सागर से आने वाले मानसून (दक्षिण पश्चिमी मानसून) के एक से तीन जून के बीच केरल पहुंचने की संभावना है। बीच में कोई बाधा नहीं आई तो पूर्वांचल में मानसून समय से 17 से 22 जून के बीच पहुंच जाएगा। इधर, गुरुवार को पुरवा हवा की रफ्तार कमी रही। मौसम विज्ञानियों के अनुसार शुक्रवार से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल सकती है।
बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो. एसएन पांडेय के मुताबिक दक्षिण पूर्वी मानसून अंडमान निकोबार तक पहुंच गया है। दस जून तक इसके कोलकाता पहुंचने की संभावना है। जबकि, अरब सागर से आने वाले मानसून के दस जून तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है। उन्हाेंने बताया कि बंगाल की खाड़ी में मौसमी परिवर्तन नहीं हुआ तो खाड़ी की ओर से आने वाला मानसून पूर्वांचल में पहले पहुंचेगा। ऐसे में 17 से 22 जून के बीच यहां बारिश शुरू हो सकती है। उधर, पिछले एक सप्ताह से उमस भरी गर्मी से परेशान लोगाें को जल्द ही राहत मिलने की संभावना है। गुरुवार को पुरवा हवा की गति में कमी आने से मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि शुक्रवार से आर्द्रता की मात्रा काफी कम हो जाएगी। इससे लोगाें को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी। बीएचयू के कृषि वैज्ञानिक प्रो. साकेत कुशवाहा का कहना है कि मानसून समय से पूर्वांचल में दस्तक देता है तो धान की रोपाई भी समय से शुरू हो जाएगी। इससे 115 से 150 दिनाें में तैयार होने वाली प्रजातियाें का उत्पादन अच्छा होगा।
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बीएचयू के मौसम विज्ञानी प्रो. एसएन पांडेय के मुताबिक दक्षिण पूर्वी मानसून अंडमान निकोबार तक पहुंच गया है। दस जून तक इसके कोलकाता पहुंचने की संभावना है। जबकि, अरब सागर से आने वाले मानसून के दस जून तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है। उन्हाेंने बताया कि बंगाल की खाड़ी में मौसमी परिवर्तन नहीं हुआ तो खाड़ी की ओर से आने वाला मानसून पूर्वांचल में पहले पहुंचेगा। ऐसे में 17 से 22 जून के बीच यहां बारिश शुरू हो सकती है। उधर, पिछले एक सप्ताह से उमस भरी गर्मी से परेशान लोगाें को जल्द ही राहत मिलने की संभावना है। गुरुवार को पुरवा हवा की गति में कमी आने से मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि शुक्रवार से आर्द्रता की मात्रा काफी कम हो जाएगी। इससे लोगाें को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी। बीएचयू के कृषि वैज्ञानिक प्रो. साकेत कुशवाहा का कहना है कि मानसून समय से पूर्वांचल में दस्तक देता है तो धान की रोपाई भी समय से शुरू हो जाएगी। इससे 115 से 150 दिनाें में तैयार होने वाली प्रजातियाें का उत्पादन अच्छा होगा।
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