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आईपीएल पर दांव, घरों में दे रहा तनाव

Mon, 13 May 2013 05:30 AM IST
Varanasi
Varanasi Updated Mon, 13 May 2013 05:30 AM IST
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वाराणसी। इंडियन प्रीमियर लीग घरों में तनाव का सबब बन गई है। उस पर लोग रोजाना करोड़ों का दांव लगा रहे हैं। सट्टेबाजी और शर्तबाजी में रकम हारने के बाद लोग कर्जदारों के चंगुल में फंस रहे हैं। किशोर और युवा घरों में चोरियां कर रहे हैं। यह सब कलह का सबब बन रहा है।
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गांधी चबूतरा शिवपुरवा का एक युवक आईपीएल के मैचों पर सट्टेबाजी में पांच हजार रुपये हार गया। लौटाने के चक्कर में उसने 25 रुपये सैकड़ा के ब्याज पर रुपये कर्ज लिए। तुलसीपुर में हाई स्कूल में पढ़ने वाला छात्र दो हजार रुपये हार गया। उसने दोस्तों से उधार लिया था। भरने के लिए पिता की जेब से रुपये निकाले तो घर में हंगामा हो गया। गुस्से में पिता ने टेलीविजन तोड़ दिया। जंगमबाड़ी के चाय विक्रेता पन्ना ने आईपीएल पर दांव लगाया और जीत मिली तो उसका मन बढ़ गया। बाद में सात हजार से अधिक हार गया। पता चलने पर पत्नी ने खूब हंगामा किया। ऐसी मिसाल शहर के हर मुहल्ले में मिल सकती है। मैचों पर दो तरीके से दांव लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग आपस में शर्तबाजी करके सौ से हजार रुपये तक हारते-जीतते हैं, जबकि मैचों पर संगठित सट्टेबाजी भी हो रही है। नई सड़क, चौक और भैरोनाथ के सटोरियों ने शहर भर में एजेंटों का जाल फैला रखा है। मोबाइल पर हमेशा भाव का अपडेट आता रहता है और उसी आधार पर दांव लगते रहते हैं। शहर में कैसिनो चलाने के आरोप में पकड़े गए लोग भी सट्टेबाजी से जुड़ गए हैं। सुधाकर नामक युवक ने बताया कि नाविक दिनभर की कमाई सट्टेबाजी में गंवा रहे हैं। उन्हें खुलेआम दांव लगाते देखा जा सकता है। कारोबार से जुड़े एक एजेंट ने बताया कि हर मैच पर 50 करोड़ से अधिक का दांव लगता है। रोजाना शहर के लोग करीब 100 करोड़ रुपये सटोरियों के हाथों में सौंप देते हैं।
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महमूरगंज लोकल्स एसोसिएशन के कौशल राय ने बताया कि सटोरियों के चंगुल में फंसने वालों में ज्यादातर रोजमर्रा कमाने-खाने वाले और ऐसे युवा हैं जो रातोंरात अमीर बन जाना चाहते हैं। हार की रकम की भरपाई करने के चक्कर में वे कर्जदारों के चंगुल में फंस रहे हैं या चोरियां कर रहे हैं। माहौल को बिगड़ने से रोकने के लिए युवकों को समझाने की कोशिश भी की जा रही है। नवोदित नगर के अमित कुमार का कहना है पहले बनारस में 1980 के करीब लाटरी का चलन इसी तरह था। अमीर लोग ज्यादा रुपये टिकट में लगाते थे, जबकि गरीब लोग दिन में 10-20 टिकटें खरीदते थे। इससे शहर की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई थी। जुए की इसी लत को मुनाफा कमाने वाले समय-समय पर उभारते रहते हैं। आईपीएल में पैसे लगाने की दीवानगी तो कुछ ज्यादा ही है क्योंकि हर युवा अपने को क्रिकेट का जानकार ही समझता है।
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