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घाट गंदे, गंगा मैली तो फिर कैसा महोत्सव!
Varanasi
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। शहर की साफ-सफाई को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाली सामाजिक संस्थाओं में से एक ‘जागो बनारस’ की टीम ने शुक्रवार को मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपकर गंगा घाटों और गलियों की साफ-सफाई की हकीकत बयां की। ‘जागो बनारस’ के संयोजक और याचिकाकर्ता दीपक मधोक ने कहा कि यचिकाकर्ताओं की ओर से कई बार ध्यान आकृष्ट कराने के बावजूद साफ-सफाई की स्थिति में कोई अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। प्रशासनिक अमला गंगा महोत्सव की तैयारियों में व्यस्त है मगर दूसरी ओर काशी के अधिकांश घाट मिट्टी और गंदगी से पटे पड़े हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग 29 घोषित-अघोषित नालों और सीवरों से गिरता गंदा पानी गंगा को प्रदूषित कर रहा है। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि जिस डा. राजेंद्र प्रसाद घाट पर भव्य मंच बनाकर गंगा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है, ठीक उसी के नीचे सीवर का गंदा पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि घाट गंदे हैं, गंगा मैली है तो फिर कैसा महोत्सव हो रहा है। ‘जागो बनारस’ की टीम ने ज्ञापन के जरिये गंगा में गिरने वाले 29 नालों और सीवरों को तत्काल बंद करने की मांग भी की। उनका कहना था कि घाटों पर जमा मिट्टी और कूड़ा-कचरा घाटों का मूल स्वरूप नष्ट कर रहा है।
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उन्होंने कहा कि लगभग 29 घोषित-अघोषित नालों और सीवरों से गिरता गंदा पानी गंगा को प्रदूषित कर रहा है। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि जिस डा. राजेंद्र प्रसाद घाट पर भव्य मंच बनाकर गंगा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है, ठीक उसी के नीचे सीवर का गंदा पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि घाट गंदे हैं, गंगा मैली है तो फिर कैसा महोत्सव हो रहा है। ‘जागो बनारस’ की टीम ने ज्ञापन के जरिये गंगा में गिरने वाले 29 नालों और सीवरों को तत्काल बंद करने की मांग भी की। उनका कहना था कि घाटों पर जमा मिट्टी और कूड़ा-कचरा घाटों का मूल स्वरूप नष्ट कर रहा है।
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