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ठेके पर एकाधिकार से बढ़ गई थी दुश्मनी

Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
Varanasi
Varanasi Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। लिकर किंग पोंटी चड्ढा का शराब ठेकों पर एकाधिकार के चलते पूर्वांचल के रसूख वाले ठेकेदार उसके दुश्मन बन गए थे। रणनीति के तहत उसने जिले के एक बाहुबली को जोड़कर सबकी जुबान बंद कर दी थी।
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प्रदेश में पहले शराब ठेके पर जवाहर जायसवाल, बद्री जायसवाल समेत कई लोग हावी रहते थे लेकिन बसपा शासन आने पर पूर्वांचल के शराब ठेकेदार दरकिनार कर दिए गए। पोंटी चड्ढा ने रसूख के दम पर शराब ठेके पर एकाधिकार जमा लिया था। कहा जाता था कि बसपा शासन में पोंटी के हिसाब से ही आबकारी नीति तैयार की गई थी। बसपा की सत्ता खत्म होने से पहले ही पोंटी नेठेकोंका नवीनीकरण करा लिया। शराब का अघोषित रेट कई बार बढ़ने पर दुकानदार भी चुप्पी साध लिए थे। इस काम में एक बाहुबली उनका हिस्सेदार माना जाता है। बार और दुकान के लाइसेंसी दाम बढ़ने से दुकानदार परेशान थे। अपने आर्थिक साम्राज्य को कायम रखने के लिए पूर्वांचल के शराब ठेकेदारों ने अन्य प्रांतों में धंधा शुरू कर दिया है। जवाहर समेत कई अन्य लोग बिल्डिंग कारोबार से भी जुड़ गए हैं। लीकर किंग ने ठेके के अलावा शहर में कई बेनामी दुकानों को भी लिया था। अब बेनामी संपत्तियों पर कौन काबिज होगा ? यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है।
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