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अब भी दस हजार बीमारियां लाइलाज
Varanasi
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। दुनिया के वैज्ञानिकाें ने अब तक मात्र छह सौ बीमारियाें के उपचार में सफलता पाई है। अब भी दस हजार ऐसी बीमारियां हैं जिनके निदान के उपाय नहीं तलाशे जा सके हैं। आधुनिकता के साथ जीवनशैली में आए बदलाव के कारण बीमारियां भी बढ़ती जा रही हैं। ये बातें पं. बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी आफ हेल्थ साइंस रोहतक के प्रो. एके मदन ने कहीं। वह बीएचयू के दर्शन एवं धर्म विभाग के सभागार में महिमा रिसर्च फाउंडेशन एंड सोशल वेलफेयर द्वारा शनिवार को ‘इंटीग्रेटिव अप्रोच टू मेटाबोलिक डिसआर्डर’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्हाेंने कहा कि अधिक फास्ट फूड का सेवन, लाइफ स्टाइल में परिवर्तन, तनाव और शारीरिक श्रम कम करने के कारण नई-नई बीमारियां पनप रही हैं। यूएसए के प्रो. आरजी सिंह ने कहा कि मेटाबोलिक डिसआर्डर से बचने के लिए हमें अपने खानपान में बदलाव एवं लाइफ स्टाइल में परिवर्तन करने की आवश्यकता है। इसमें बीएचयू के प्रो. बीके दीक्षित, प्रो. सीपी मिश्रा, डा. आरसी रेड्डी आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन डा. जयंत उपाध्याय, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मुकुल राज मेहता ने दिया।
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उन्हाेंने कहा कि अधिक फास्ट फूड का सेवन, लाइफ स्टाइल में परिवर्तन, तनाव और शारीरिक श्रम कम करने के कारण नई-नई बीमारियां पनप रही हैं। यूएसए के प्रो. आरजी सिंह ने कहा कि मेटाबोलिक डिसआर्डर से बचने के लिए हमें अपने खानपान में बदलाव एवं लाइफ स्टाइल में परिवर्तन करने की आवश्यकता है। इसमें बीएचयू के प्रो. बीके दीक्षित, प्रो. सीपी मिश्रा, डा. आरसी रेड्डी आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन डा. जयंत उपाध्याय, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मुकुल राज मेहता ने दिया।
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