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देशभक्ति पर भारी रही दो वक्त की रोटी
Varanasi
Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। पंद्रह अगस्त को जहां लोग देश की आजादी का जश्न मना रहे थे वहीं गरीबी की मार झेल रहे ऐसे लोग भी थे जो दो वक्त की रोटी के लिए जूझते नजर आए। ऐसे लोगों के लिए जश्न-ए-आजादी का कोई मायने नहीं रखता। इन्ही लोगों में शामिल है फल विक्रेता अर्जुन और इसकी तरह रोज कमाने खाने वाले तमाम लोग। इन सब में आजादी का जश्न मनाने का जुनून तो था पर परिवार का पेट भरने के लिए काम करने की बेबसी भी थी।
अर्जुन कैंट स्टेशन के सामने ठेले पर फल और जूस बेचता है। उसने बताया कि पिता नहीं हैं। ठेला लगाकर किसी तरह परिवार का जीवनयापन करता है। तीन भाई-बहन हैं। वह स्वतंत्रता दिवस पर ठेले पर तिरंगा लगाकर काम में लगा रहा। जयप्रकाश नगर कालोनी निवासी रिक्शा चालक प्रकाश का कहना था कि वह दो वक्त की रोटी के लिए पंद्रह अगस्त को पूरे दिन रिक्शा चलाता रहा। आटोरिक्शा चालक अमित सिंह का कहना था कि पैसे के अभाव में सुबह छह बजे से दिन में 11 बजे तक आटो चलाया। काम भर की कमाई हो गई तो परिवार और बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया। देश को आजादी तो मिल गई लेकिन अपेक्षित खुशहाली नहीं आई। कैंट स्टेशन पर सलेमपुर (देवरिया) निवासी कुली दरोगा प्रसाद का कहना था कि परिवार है तो दाल-रोटी का जुगाड़ तो पहले करना ही होगा। हर रोज की तरह सुबह खाना बनाकर कैंट स्टेशन पहुंचा। स्टेशन पर ध्वजारोहण में शामिल होने के बाद वह काम में जुट गया। स्वतंत्रता दिवस के दिन कोई भी नशा नहीं किया।
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अर्जुन कैंट स्टेशन के सामने ठेले पर फल और जूस बेचता है। उसने बताया कि पिता नहीं हैं। ठेला लगाकर किसी तरह परिवार का जीवनयापन करता है। तीन भाई-बहन हैं। वह स्वतंत्रता दिवस पर ठेले पर तिरंगा लगाकर काम में लगा रहा। जयप्रकाश नगर कालोनी निवासी रिक्शा चालक प्रकाश का कहना था कि वह दो वक्त की रोटी के लिए पंद्रह अगस्त को पूरे दिन रिक्शा चलाता रहा। आटोरिक्शा चालक अमित सिंह का कहना था कि पैसे के अभाव में सुबह छह बजे से दिन में 11 बजे तक आटो चलाया। काम भर की कमाई हो गई तो परिवार और बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया। देश को आजादी तो मिल गई लेकिन अपेक्षित खुशहाली नहीं आई। कैंट स्टेशन पर सलेमपुर (देवरिया) निवासी कुली दरोगा प्रसाद का कहना था कि परिवार है तो दाल-रोटी का जुगाड़ तो पहले करना ही होगा। हर रोज की तरह सुबह खाना बनाकर कैंट स्टेशन पहुंचा। स्टेशन पर ध्वजारोहण में शामिल होने के बाद वह काम में जुट गया। स्वतंत्रता दिवस के दिन कोई भी नशा नहीं किया।
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