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झुलसने से दो बेटियों संग मां की मौत

Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
Varanasi
Varanasi Updated Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
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सेवापुरी। खाना बनाते सोमवार की सुबह कमरे में आग लगने से मां और दो बेटियां सुलझ गईं। ग्रामीणों ने दरवाजा तोड़कर तीनों को झुलसी हालत में बाहर तो निकाल लिया, लेकिन कबीर चौरा अस्पताल में उपचार के दौरान तीनों की मौत हो गई। हालांकि गांव में यह भी चर्चा है कि महिला ने सामूहिक आत्महत्या की है। घटना जंसा थाना क्षेत्र के सत्तनपुर गांव की है।
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सत्तनपुर निवासी मजदूर रवींद्र राजभर रोज की तरह सोमवार को भी मजदूरी करने गया था। घर में पत्नी सावित्री और दो बेटियां सविता (06) और अंतिमा (4) मौजूद थीं। परिवार के अन्य सदस्य भी काम पर निकले थे। सुबह साढ़े दस बजे सावित्री स्टोव पर खाना बना रही थी कि इसी समय कमरे में आग लग गई। बुझाने के प्रयास में मां झुलस गई और मां को पकड़ने के कारण दोनों बेटियां भी जल गईं। कमरे से चीख-पुकार आने और धुआं निकलने पर ग्रामीणों ने दरवाजा तोड़कर तीनों को झुलसी हालत में बाहर निकाला। परिवार के लोगों ने तीनों को तत्काल कबीर चौरा अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तीन घंटे के अंदर तीनों ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर केरोसिन के गैलन समेत कुछ अन्य सामान बरामद कर लिए। आग के चलते कमरे में रखी दैनिक उपयोग की चीजें जलकर नष्ट हो गई थीं। पूछताछ से पता चला कि सोमवार की सुबह सावित्री अपनी दो बड़ी बेटियों रुचि (08) और कविता (09) को स्कूल जाने से रोक रही थी, लेकिन दोनों जिदकर स्कूल चली गईं, अन्यथा उनके साथ भी हादसा हो सकता था।
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उधर, गांव में चर्चा है कि एक दिन पहले सावित्री ने अपने पति रवींद्र से चारपाई खरीदने की फरमाइश की थी। इसे लेकर पति और पत्नी के बीच विवाद हुआ था। सावित्री की मां निर्मला का आरोप है कि उससे देवरानी सीमा अक्सर झगड़ा करती थी। कई बार उसकी बेटी ने ससुरालियों के विवाद का जिक्र किया था। वैसे ससुर खरपत्तू की मानें तो सावित्री की मौत खाना बनाते समय जलने से हुई है। थानाध्यक्ष सुरेंद्र पांडेय का भी कहना था कि महिला ने मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में कहा है कि वह खाने बनाते समय झुलस गई थी। मायके वालों की तरफ से तहरीर मिलने पर ही आगे कोई कार्रवाई हो सकती है।
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इन्सेट
सोमवार का व्रत रखा था सावित्री ने
सेवापुरी। हादसे की शिकार सावित्री ने सावन के पहले सोमवार पर व्रत रखा था लेकिन इसी दिन दो बेटियों के साथ उसकी जान चली गई। वैसे कुछ दिनों पूर्व उसने पड़ोसियों से चर्चा के दौरान कहा था कि वह ससुरालियों के झगड़े से तंग आ चुकी है। एक दिन अपनी जान दे देगी। ग्रामीणों की मानें तो गरीब होने के बाद भी सावित्री स्वाभिमानी थी। उसने कभी किसी के सामने हाथ नहीं पसारे। सावित्री की मां निर्मला का कहना था कि उसके पिता छोटेलाल मंगलवार को बेटी से मिलने जाने वाले थे। उन्होंने बेटी और चारों नतिनियों के लिए आम तोड़वाकर रखा था लेकिन बेटी के घर जाने से पहले उनके पास मनहूस खबर आ गई। उन्होंने बताया कि सावित्री एक माह पहले जब मायके आई थी तो अपने और परिवार के फोटो साथ ले गई थी।

अब तक हुईं सामूहिक मौतें
-20 जून 2012 लोहता के सरहरी में महिला ने दो बेटियों संग आग लगाकर जान दी
-20 मई 2012 रोहनिया के मिल्कीचक में तीन बच्चों संग ट्रेन के आगे कूद कट मरी मां
-16 मई 2012 चौबेपुर के नरायनपुर में दो बच्चों संग मां ने जहर पीया, बेटे की मौत, दो बचा लिए गए
-अप्रैल 2010 रोहनिया के बैरवन में मां ने दो बच्चों संग ट्रेन से कटकर जान दे दी
-14 जनवरी 2010 बडागांव के खरावन में संतोष ने बेटे जितेंद्र की गला दबाकर हत्या करने के बाद खुदकुशी कर ली
-20 सितंबर 2009 मिर्जामुराद के सुरेश राजभर ने छह साल के बेटे की हत्या के बाद पत्नी के साथ फांसी लगा ली
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