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यूपी में बालकों का यौन शोषण अधिक

Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
Varanasi
Varanasi Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
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यूपी में बालकों का यौन शोषण अधिक
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- 20 फीसदी बाल मजदूर रहते हैं यूपी में
- 40 फीसदी बच्चे बाल अधिकार से वंचित
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। बाल मजदूरी और बाल यौन शोषण के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। देश के कुल बाल मजदूरों के 20 फीसदी उत्तर प्रदेश में बसते हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में लगभग साढ़े आठ फीसदी बालक और 3.57 फीसदी बालिकाएं यौन शोषण की शिकार हैं।
ये जानकारी आल इंडिया बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अरुण त्रिपाठी ने दी। वे कैंट स्थित एक होटल में संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते के 20 वर्ष बाद बच्चों ने क्या खोया और क्या पाया विषयक पुस्तक और सीडी के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि देश में कुल 12 करोड़ 66 लाख 6 हजार 377 बाल मजदूर हैं। इनमें 20 फीसदी तो केवल उत्तर प्रदेश में बसते हैं। उत्तर प्रदेश में बाल मजदूरों की संख्या 19 लाख 27 हजार 997 है। उन्होंने कहा कि बाल यौन शोषण की बढ़ती घटनाएं समाज के अंदर विकृति फैलाती है। ऐसे मामलों में दोषियों को कड़ा दंड दिलाने के लिए कार्यपालिका के साथ-साथ न्यायपालिका को भी आगे आने होगा। शिक्षा के मुद्दे पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि शिक्षा अधिकार कानून अमल में लाने के लिए 12 हजार नए प्राथमिक विद्यालय, तीन हजार नए उच्च प्राथमिक विद्यालय, 1.10 लाख अतिरिक्त क्लासरूम और 2.50 लाख शिक्षक चाहिए।
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समारोह के मुख्य अतिथि जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष एमपी यादव ने कहा कि देश की 40 फीसदी आबादी 18 वर्ष से नीचे है और बाल अधिकारों की मोहताज भी है। अगर हम समय से बाल विकास योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं कर पाते हैं तो यह भी अन्याय की श्रेणी में आता है। टेरे डेस होम्स जर्मनी-इंडिया प्रोग्राम के (उत्तर भारत) कार्यक्रम समन्वयक किशोर झा का कहना था कि एक तरफ सरकार 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को बालिग मानती है दूसरी तरफ सरकारी योजनाओं में 6 से 14 साल के बच्चों को ही बाल अधिकारों की श्रेणी में रखा जाता है। इस मौके उपश्रमायुक्त एके राय, डीआईओएस विजय शंकर मिश्र, अधिवक्ता गुरमिंदर सिंह, प्रो. सुरेंद्र त्रिपाठी, प्रो. चतुर्भुज तिवारी, डा. संजय आदि ने विचार व्यक्त किए। समारोह में 60 स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे। संचालन डा. रजनीकांत और धन्यवाद ज्ञापन राजेंद्र सिंह ने किया।
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