डा. जोशी करें गंगा आंदोलन का नेतृत्व : गोविंदाचार्य

Varanasi Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। चंद दिनों पहले वरिष्ठ भाजपा नेता डा. मुरली मनोहर जोशी ने गंगा आंदोलन के लिए काशी को अनुपयुक्त स्थान बताया था। उन्होंने इसके लिए दिल्ली-मुंबई और उन प्रदेशों की राजधानियों में मुहिम चलाने की सलाह दी थी जहां से गंगा गुजरती हैं। लेकिन, कभी भाजपा के थिंक टैंक रहे केएन गोविंदाचार्य ने वाराणसी को ही गंगा आंदोलन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान बताया है। उन्होंने कहा कि जिस बाबा विश्वनाथ की जटा से गंगा प्रवाहित होती हैं, उस बाबा की नगरी काशी से बढ़कर सही स्थान इस आंदोलन के लिए कोई दूसरा कैसे हो सकता है। कहा कि डा. जोशी विद्वान व्यक्ति हैं और संसद में बनारस का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। ऐसे में वही इस आंदोलन की अगुवाई के लिए सबसे उपयुक्त हैं। अविरल-निर्मल गंगा के लिए यहां के घाटों से लेकर सदन तक वे आंदोलन का नेतृत्व करें।
दुर्गाकुंड स्थित अंध विद्यालय में बुधवार शाम आयोजित प्रेसवार्ता में गोविंदाचार्य ने कहा कि यहां के आंदोलन से गंगा का मुद्दा जन-जन तक पहुंच चुका है। दुनिया में जहां भी भारतीय बसे हैं, वहां तक इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार अपने वादे से पीछे हट रही है। गंगा को राष्ट्रीय नदी बनाने की घोषणा राजनीतिक दांवपेच की शिकार हो गई। गंगा बेसिन प्राधिकरण की बैठक तो हुई पर स्वामी सानंद को सरकार ने जानबूझकर उसमें उपस्थित रहने से वंचित कर दिया। साथ ही क्लीन गंगा मिशन 2020 को प्राधिकरण से भी परे जाकर वित्तीय अधिकार दे दिए गए। इससे सरकार ने गंगा प्राधिकरण को निरर्थक बना डाला। उन्होंने कहा कि गंगा आंदोलन में वह शुरू से अब तक लगातार मददगार एवं संदेशवाहक की भूमिका में हैं। अतीत में निगमानंद की हुई मौत की टीस अब भी कायम है। इसकी पुनरावृत्ति न हो, इसीलिए वे लगातार पीएमओ कार्यालय से आंदोलनकारियों के पक्ष में संपर्क-संवाद बनाए हुए हैं। आंदोलनकारियों से भी अपील की कि वे भी मसले की जटिलता को समझें। प्रेसवार्ता में सुरभि शोध संस्थान के सूर्यकांत जालान और गंगा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव आचार्य जितेंद्र भी मौजूद थे।

छह मांगें रखीं
-गंगा नदी के मुख्य प्रवाह में इसका अपना 70 फीसदी जल रहे
-गंगा की जमीन राजस्व रिकार्ड में निबंधित हो
-गंगा समेत सभी नदियों को प्रकृति का चैतन्य अंश मानकर इनके प्रबंधन को भारतीय नजरिये से विचार हो
-गंगा के संदर्भ मेें आस्था पक्ष की प्रथम वरीयता हो और इससे मिलने वाले लाभ दूसरी वरीयता में हों
-प्रयाग में होने वाले कुंभ मेले में पूरे तीन माह रोजाना 250 क्यूमेक्स जल प्रवाह सुनिश्चित हो
-केंद्र और प्रदेश सरकारें सुनिश्चित करें कि गंगा किनारे के शहरों का औद्योगिक कचरा-अवजल नदी में ना गिरे

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