{"_id":"62185","slug":"Varanasi-62185-140","type":"story","status":"publish","title_hn":"समाज सुधार के पूर्व खुद को सुधारें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समाज सुधार के पूर्व खुद को सुधारें
Varanasi
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। जलसे सीरतुन्नबी और इस्लाहे मुआशरे में उलेमाओं ने पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद की सीरत पर रोशनी डालते हुए उनके बताए रास्ते पर चलकर मुसलमानों को अपनी जिंदगी गुजारने की नसीहत दी। साथ ही समाज सुधार के पहले खुद को सुधारने पर बल दिया। इस दौरान रसूल की शान में नाते पाक का नजराना भी पेश किया गया।
जमीयतुल अंसार की ओर से मंगलवार को जलसे सीरतुन्नबी और इस्लाहे मुआशरे पर कच्ची बाग आजाद पार्क में तकरीर का आयोजन किया गया। नमाजे इशा देर रात मुफ्ती ए शहर और ज्ञानवापी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी की सदारत में शुरू हुए जलसे की शुरुआत तिलावते कलामे पाक से हुई। तकरीर करते हुए आजमगढ़ से तशरीफ लाए मौलाना अबूजर ने कहा कि अंबिया ने दो चीजों पर बल दिया है एक अल्लाह का हक और दूसरा बंदे का हक। खुलासा करते हुए कहा कि अल्लाह का हक यह है कि उसकी बंदगी की जाए और उसी से मांगा जाए। वह सब का पालनहार है। बंदों के हक में माता-पिता का हक, रिश्तेदारों का हक, दोस्तों का हक और खासतौर से पड़ोसियों का हक शामिल है। कहा, समाज सुधार के लिए जरूरी है कि पहले हम सुधरें। समाज सुधार और रसूल की सुन्नत एक-दूसरे की पूरक हैं।
इसके अलावा मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी, मौलाना असजद कासमी और मौलाना खुर्शीद अनवर आजमी ने भी तकरीर की। इस दौरान स्व. मौलाना इब्राहिम साहब की किताब हज का मुअल्लिम और शायर ताजुद्दीन अशअर रामनगरी की किताब मौजे नसीमे हिजाज का विमोचन भी किया गया। संचालन मौलाना रियाजुद्दीन नोमानी ने की। लोगों का स्वागत संस्था के इशरत नोमानी ने किया।
विज्ञापन
इन्सेट
अंजुमनों के गूंजे नातिया कलाम
वाराणसी। अंजुमने गुलाबागे मदीना की ओर से कच्ची बाग स्थित मदरसा जियाउल ओलूम के सामने जलसा और नातिया कलाम का आयोजन किया गया। इसमें दर्जनभर अंजुमनों ने हिस्सा लिया। मौलाना जकीउल्लाह कादरी की सदारत में आयोजित इस कार्यक्रम में अंजुमन गुलाबागे मदीना, फारुकिया, मुजाहिदीने इस्लाम, अनवारे सूफिया, नूरे इस्लाम समेत दर्जनभर अंजुमनों ने नातिया कलाम से लोगों का मन जीत लिया। विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इससे पूूर्व मौलाना जकीउल्लाह कादरी ने अपने तकरीर में मुसलमानों को अल्लाह और रसूल के बताए रास्ते पर चलने और कुरान तथा हदीस की रोशनी में जिंदगी गुजारे जाने पर नसीहत की। संचालन गुलजार अहमद ने किया।
विज्ञापन
जमीयतुल अंसार की ओर से मंगलवार को जलसे सीरतुन्नबी और इस्लाहे मुआशरे पर कच्ची बाग आजाद पार्क में तकरीर का आयोजन किया गया। नमाजे इशा देर रात मुफ्ती ए शहर और ज्ञानवापी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी की सदारत में शुरू हुए जलसे की शुरुआत तिलावते कलामे पाक से हुई। तकरीर करते हुए आजमगढ़ से तशरीफ लाए मौलाना अबूजर ने कहा कि अंबिया ने दो चीजों पर बल दिया है एक अल्लाह का हक और दूसरा बंदे का हक। खुलासा करते हुए कहा कि अल्लाह का हक यह है कि उसकी बंदगी की जाए और उसी से मांगा जाए। वह सब का पालनहार है। बंदों के हक में माता-पिता का हक, रिश्तेदारों का हक, दोस्तों का हक और खासतौर से पड़ोसियों का हक शामिल है। कहा, समाज सुधार के लिए जरूरी है कि पहले हम सुधरें। समाज सुधार और रसूल की सुन्नत एक-दूसरे की पूरक हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी, मौलाना असजद कासमी और मौलाना खुर्शीद अनवर आजमी ने भी तकरीर की। इस दौरान स्व. मौलाना इब्राहिम साहब की किताब हज का मुअल्लिम और शायर ताजुद्दीन अशअर रामनगरी की किताब मौजे नसीमे हिजाज का विमोचन भी किया गया। संचालन मौलाना रियाजुद्दीन नोमानी ने की। लोगों का स्वागत संस्था के इशरत नोमानी ने किया।
विज्ञापन
इन्सेट
अंजुमनों के गूंजे नातिया कलाम
वाराणसी। अंजुमने गुलाबागे मदीना की ओर से कच्ची बाग स्थित मदरसा जियाउल ओलूम के सामने जलसा और नातिया कलाम का आयोजन किया गया। इसमें दर्जनभर अंजुमनों ने हिस्सा लिया। मौलाना जकीउल्लाह कादरी की सदारत में आयोजित इस कार्यक्रम में अंजुमन गुलाबागे मदीना, फारुकिया, मुजाहिदीने इस्लाम, अनवारे सूफिया, नूरे इस्लाम समेत दर्जनभर अंजुमनों ने नातिया कलाम से लोगों का मन जीत लिया। विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इससे पूूर्व मौलाना जकीउल्लाह कादरी ने अपने तकरीर में मुसलमानों को अल्लाह और रसूल के बताए रास्ते पर चलने और कुरान तथा हदीस की रोशनी में जिंदगी गुजारे जाने पर नसीहत की। संचालन गुलजार अहमद ने किया।