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पूरब में विरोध की पछुआ पर भाजपा पसीने-पसीने
Varanasi
Updated Sun, 30 Mar 2014 05:31 AM IST
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वाराणसी। भारतीय जनता पार्टी पूर्वांचल में टिकट वितरण से उपजे अंतर्कलह से उबर नहीं पा रही। ऐसे में पार्टी आला कमान कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इनमें जौनपुर, चंदौली, भदोही, गाजीपुर, बलिया, देवरिया समेत कुछ और सीटों पर बदलाव तय माना जा रहा है। काशी में मोदी के चुनाव अभियान के तौर-तरीके स्थानीय पदाधिकारियों को सिखाने गुजरात से आई नमो के करीबियों की टीम के एक सदस्य ने भी इस बदलाव के संकेत दिए हैं।
वाराणसी संसदीय सीट से नरेंद्र मोदी को चुनाव लड़ाने के पीछे पार्टी का मुख्य मकसद यही था कि पूर्वांचल की बीस से अधिक सीटों पर पार्टी का आधार मजबूत हो और ये सीटें भाजपा की झोली में ही जाएं। वहीं, जब पूर्वांचल की सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए तो पार्टी का अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गया। कहीं जनाधार को लेकर असंतोष उपजा तो कहीं स्थानीय-बाहरी के मसले ने इस विरोध की चिंगारी को और हवा दी। उधर, मोदी के करीबी और भाजपा के प्रदेश प्रभारी अमित शाह ने इस असंतोष को देखते हुए प्रदेश की सभी सीटों की वस्तुस्थिति की जानकारी के लिए गोपनीय ढंग से रिपोर्ट तैयार कराई। इसमें भी यही बात सामने आई कि अगर उम्मीदवार न बदले गए तो प्रदेश की 80 में से 50 से अधिक सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा महज 25 से 30 सीटों तक ही सिमट कर रह जाएगी। ऐसे में मोदी लहर भी काम न आएगी। इसके चलते भाजपा के मिशन 272 पर ग्रहण लगने की आशंका प्रबल होती देख पार्टी के आला नेता इस मसले पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। जल्द ही पूर्वांचल की कुछ सीटों पर नए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की जा सकती है।
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वाराणसी संसदीय सीट से नरेंद्र मोदी को चुनाव लड़ाने के पीछे पार्टी का मुख्य मकसद यही था कि पूर्वांचल की बीस से अधिक सीटों पर पार्टी का आधार मजबूत हो और ये सीटें भाजपा की झोली में ही जाएं। वहीं, जब पूर्वांचल की सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए तो पार्टी का अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गया। कहीं जनाधार को लेकर असंतोष उपजा तो कहीं स्थानीय-बाहरी के मसले ने इस विरोध की चिंगारी को और हवा दी। उधर, मोदी के करीबी और भाजपा के प्रदेश प्रभारी अमित शाह ने इस असंतोष को देखते हुए प्रदेश की सभी सीटों की वस्तुस्थिति की जानकारी के लिए गोपनीय ढंग से रिपोर्ट तैयार कराई। इसमें भी यही बात सामने आई कि अगर उम्मीदवार न बदले गए तो प्रदेश की 80 में से 50 से अधिक सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा महज 25 से 30 सीटों तक ही सिमट कर रह जाएगी। ऐसे में मोदी लहर भी काम न आएगी। इसके चलते भाजपा के मिशन 272 पर ग्रहण लगने की आशंका प्रबल होती देख पार्टी के आला नेता इस मसले पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। जल्द ही पूर्वांचल की कुछ सीटों पर नए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की जा सकती है।
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