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लावारिस शिशु को महिला ने चाइल्ड लाइन को सौंपा
Varanasi
Updated Thu, 28 Nov 2013 05:42 AM IST
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दानगंज। चोलापुर क्षेत्र में नाद नदी के किनारे लावारिस हाल में मिले नवजात को पाल रही महिला ने बुधवार को अस्मिता चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। थानाध्यक्ष चोलापुर श्यामबहादुर यादव के हस्तक्षेप के बाद नवजात का चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद उसे चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया गया।
नाद नदी के किनारे 20 नवंबर को एक नवजात मिला था। उसे गोला गांव निवासी राजकुमारी अपने घर उठा ले गई और उसका लालन-पालन करने लगी। मंगलवार को नवजात मिलने की सूचना पर कई एनजीओ के लोग उसके घर पहुंच गए। वहां महिला से बच्चे को मांगने लगे लेकिन वह उसे देने को तैयार ही नहीं हुई। एनजीओ के लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा था। मामला थाने तक पहुंच गया। बुधवार को थानाध्यक्ष स्वयं गांव गए और महिला को समझाकर नवजात को थाने ले आए। वहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर में नवजात का स्वास्थ्य परीक्षण और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद चाइल्ड लाइन के राम प्रताप चौहान को सौंप दिया। नवजात को पाल रही महिला और उसके पति बाबूराम सरोज का कहना है कि बच्चे को हासिल करने केलिए को दंपति कोर्ट का सहारा लेंगे। दंपति को तीन बेटियां हैं। एक बेटा आशीष (26) की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। कोई बेटा नहीं होने से महिला ने नवजात को अपना लिया। राजकुमारी और उसके पति बाबूराम सरोज का कहना है कि बच्चे को अपनाने के लिए कोर्ट का सहारा लेंगे। गौरतलब है कि अब इस नवजात को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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नाद नदी के किनारे 20 नवंबर को एक नवजात मिला था। उसे गोला गांव निवासी राजकुमारी अपने घर उठा ले गई और उसका लालन-पालन करने लगी। मंगलवार को नवजात मिलने की सूचना पर कई एनजीओ के लोग उसके घर पहुंच गए। वहां महिला से बच्चे को मांगने लगे लेकिन वह उसे देने को तैयार ही नहीं हुई। एनजीओ के लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा था। मामला थाने तक पहुंच गया। बुधवार को थानाध्यक्ष स्वयं गांव गए और महिला को समझाकर नवजात को थाने ले आए। वहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर में नवजात का स्वास्थ्य परीक्षण और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद चाइल्ड लाइन के राम प्रताप चौहान को सौंप दिया। नवजात को पाल रही महिला और उसके पति बाबूराम सरोज का कहना है कि बच्चे को हासिल करने केलिए को दंपति कोर्ट का सहारा लेंगे। दंपति को तीन बेटियां हैं। एक बेटा आशीष (26) की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। कोई बेटा नहीं होने से महिला ने नवजात को अपना लिया। राजकुमारी और उसके पति बाबूराम सरोज का कहना है कि बच्चे को अपनाने के लिए कोर्ट का सहारा लेंगे। गौरतलब है कि अब इस नवजात को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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