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किसानों की उपजाऊ जमीन लील रही गंगा
Updated Thu, 06 Sep 2018 01:26 AM IST
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सीतामढ़ी। गंगा की कुपित धारा कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा गांवों के किसानों को तेजी से बर्बाद करने लगी है। पिछले एक माह में 50 बीघे से अधिक कृषि योग्य उपजाऊ भूमि उफनाई गंगा लील चुकी है। इसके बाद भी कटान जारी है। आंखों के सामने रेत की मानिंद हाथ से निकलकर गंगा में समाती उपजाऊ जमीन देखकर किसानों का कलेजा बैठ जाता है। बेवश किसानों के सामने लाचारी के सिवा कोई चारा नहीं है। मौजूदा समय में जब एक-एक इंच जमीन के लिए लोग परेशान हैं, ऐसे में गंगा में बाढ़ आते ही किसानों की बहुमूल्य जमीनों का बड़ा भाग देखते ही देखते गंगा के जलप्रवाह में विलीन हो जाता है। दोनों गांवों के किसान खून के आंसू रोने पर मजबूर हैं। क्योंकि पिछले पांच दशक से कटान की विभीषिका झेल रहे किसानों की बर्बादी रोकने के लिए सरकार और जिला प्रशासन की ओर से कोई पहल अब तक नहीं की गई। छेछुआ के किसानों का कहना है कि उनकी आठ सौ बीघे से अधिक कृषि योग्य उपजाऊ जमीन गंगा में समा चुकी है। जबकि भुर्रा के किसानों का दावा है कि उनकी तीन सौ बीघे से अधिक जमीन गंगा की धारा में समा चुकी है। दोनों गांवों को मिलाकर 11 बीघे जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। किसानों का यह भी दावा है कि उनकी जमीनें गंगा पार मिर्जापुर जनपद के चेहरा और इलाहाबाद के बामपुर गांव में चली गई हैं। और वर्तमान में गंगा पार के दोनों गांवों के किसान उनकी जमीनों पर जबरन खेती कर रहे हैं। बुधवार को छेछुआ के ग्रामीणों ने अपनी बेवशी बयां करते हुए कहा कि उनकी खेती की जमीन हर क्षण कट-कट कर गंगा में समाती जा रही है, लेकिन वे कुछ नहीं कर पा रहे। छेछुआ के किसान जगदीश सिंह, शिवप्रताप सिंह, सदानंद यादव, प्रदुम्न सिंह आदि ने शासन और प्रशासन कोसते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियो ने भी किसानों के साथ सदैव छलावा ही किया। नेताओं को चुनाव के समय किसानों की हर समस्या की याद आती है, लेकिन बाद में उनका अता-पता नहीं चलता। बुधवार को किसानों का दु:ख दर्द जानने के लिए क्षेत्र के बनकट निवासी युवा नेता हिमांशु तिवारी सहित युवा मंच के अध्यक्ष पवन पंडित, विकास तिवारी, वीरेंद्र तिवारी, जितेंद्र तिवारी, बाबा जी, विवेक आदि ने छेछुआ पहुंचकर किसानों के जख्म पर मरहम रखा। कहा कि कटान रोकने के लिए कारगर पहल नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वहीं, किसानों की बर्बादी रोकने के लिए अब युवाओं ने कमर कसनी शुरू कर दी है। गंगा कटान रोकने के लिए आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है। क्षेत्र के बनकट गांव निवासी युवा नेता हिमांशु तिवारी का कहना है कि कोनिया के किसानों की हर समस्याओं को दूर करने के लिए वे प्रदेश और केंद्र सरकार के दरवाजे तक आवाज बुलंद करेंगे। गंगा कटान रोकने और गंगा में समा चुकी भूमि के उचित मुआवजे के लिए वे बड़ा आंदोलन करेंगे। युवा मंच के अध्यक्ष पवन पंडित का कहना है कि कटान कोनिया की सबसे बड़ी समस्या है। किसानों के हित के लिए वे हर संभव प्रयास किया जाएगा। कहा कि प्रशासन कारगर पहल नहीं करेगा तो ग्रामीण आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। छेछुआ के किसान शिवप्रताप सिंह का कहना है कि कटान से किसान बर्बाद हो रहे हैं। सरकार का दायित्व बनता है कि कटान रोकने का ठोस इंतजाम करे, लेकिन किसानों की सिर्फ छला जा रहा है। उन्होंने जिले के पूर्व जिलाधिकारी चंद्रकांत पांडेय की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कटान रोकने के लिए सार्थक प्रयास किया था, लेकिन उनके तबादले के बाद नतीजा शून्य हो गया। गांव के किसान और ग्राम प्रधान जगदीश सिंह का कहना है कि गांव की आठ सौ बीघे कृषि भूमि गंगा में समा चुकी है। उन्होंने जनपद के कई जिलाधिकारियों से कटान रोकने के लिए लिखित अनुरोध किया, लेकिन कोई उपाय नहीं किया गया। कटान प्रभावित अन्य जिलों में प्रशासन ने बाढ़ से पूर्व ही किनारे पर बालू की बोरियों और अन्य युक्ति से धारा की दिशा बदल दिया, जिससे किसानों की खेती बच गई, लेकिन यहां किसान लगातार बर्बाद हो रहे हैं, कोई ध्यान देने वाला नहीं है।
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