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ऋण मोचन : आधी हकीकत, आधा फसाना
Updated Tue, 20 Mar 2018 01:32 AM IST
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ज्ञानपुर। प्रदेश सरकार का एक साल कार्यकाल पूरा होने के बाद भी महत्वाकांक्षी किसान ऋण मोचन योजना आधी हकीकत आधा फसाना बनकर रह गई है। जिले में लघु एवं सीमांत वर्ग के 22 हजार किसानों में महज 9700 किसानों का ही तीन चरणों में 60 करोड़ कर्ज माफ हुआ था। इनमें करीब 90 किसान ऐसे थे, जिनका 15 से 25 रुपये ही कर्ज माफ हुआ। लेखपालों की मनमानी के चलते बड़ी संख्या में पात्र किसान वंचित रह गए। हालांकि ऐसे किसानों को राहत देने के लिए प्रशासन प्रयास कर रहा है। 2723 किसानों की ऋणमाफी के लिए 30 मार्च को शासन से धन की मांग की जाएगी।
किसानों के कल्याण के वादों के साथ सूबे की सत्ता में आई योगी सरकार शुरू से ही ऋणमाफी के लिए सक्रिय दिखी। मार्च में सरकार बनने के दो से तीन माह के अंदर ऋणमाफी के लिए लक्ष्य तय होने लगा। जिले की तीनों तहसीलों में 21 हजार 966 किसान चिह्नित किए गए थे लेकिन सत्यापन में 9700 ही पात्र मिले और इन्हें तीन चरणों में योजना का लाभ मिला। कर्जमाफी के लिए जिले को मिले 90 करोड़ रुपये में सिर्फ 60 करोड़ ही बंट सके हैं।
लेखपालों की मनमानी से बड़ी संख्या में पात्र किसान इससे वंचित रह गए। विरोध शुरू हुआ तो शासन ने ऋणमाफी राहत पोर्टल प्रभावी किया। इसमें 2723 किसानों ने आवेदन किया। सत्यापन कार्य पूरा होने के बाद 30 मार्च को कृषि विभाग धनराशि की मांग करेगा। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि तहसीलों की रिपोर्ट के आधार पर ही ऋणमाफ किया गया। पोर्टल पर जिन किसानों ने शिकायत की है, उनका सत्यापन कराया जा रहा है। 30 मार्च को बजट की डिमांड की जाएगी। वहीं, प्रगतिशील किसान एके चौबे, आरएल सिंह और भोलानाथ उपाध्याय आदि ने कहा कि योजना के मानक ठीक नहीं हैं, जिससे काफी किसान वंचित रह गए।
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किसानों के कल्याण के वादों के साथ सूबे की सत्ता में आई योगी सरकार शुरू से ही ऋणमाफी के लिए सक्रिय दिखी। मार्च में सरकार बनने के दो से तीन माह के अंदर ऋणमाफी के लिए लक्ष्य तय होने लगा। जिले की तीनों तहसीलों में 21 हजार 966 किसान चिह्नित किए गए थे लेकिन सत्यापन में 9700 ही पात्र मिले और इन्हें तीन चरणों में योजना का लाभ मिला। कर्जमाफी के लिए जिले को मिले 90 करोड़ रुपये में सिर्फ 60 करोड़ ही बंट सके हैं।
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लेखपालों की मनमानी से बड़ी संख्या में पात्र किसान इससे वंचित रह गए। विरोध शुरू हुआ तो शासन ने ऋणमाफी राहत पोर्टल प्रभावी किया। इसमें 2723 किसानों ने आवेदन किया। सत्यापन कार्य पूरा होने के बाद 30 मार्च को कृषि विभाग धनराशि की मांग करेगा। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि तहसीलों की रिपोर्ट के आधार पर ही ऋणमाफ किया गया। पोर्टल पर जिन किसानों ने शिकायत की है, उनका सत्यापन कराया जा रहा है। 30 मार्च को बजट की डिमांड की जाएगी। वहीं, प्रगतिशील किसान एके चौबे, आरएल सिंह और भोलानाथ उपाध्याय आदि ने कहा कि योजना के मानक ठीक नहीं हैं, जिससे काफी किसान वंचित रह गए।
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