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ठुमरी-झूला पर बिरजू महाराज ने कथक के सजाए भाव

Sat, 14 Oct 2017 02:02 AM IST
Updated Sat, 14 Oct 2017 02:02 AM IST
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ठुमरी-झूला पर बिरजू महाराज ने कथक के सजाए भाव
वाराणसी। कथक नृत्य गुरु पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज के अनूठे अंदाज शुक्रवार की रात अस्सी घाट पर यादगार बन गए। उन्होंने बैठकी भाव में नृत्य से ऐसा सम्मोहन पैदा किया लोग लय-छंद के रस में मगन हो उठे। ठुमरी के बाद झूला और फिर भजन की बंदिशों पर उन्होंने कथक नृत्य के भावों को सजाया। कथक नृत्य सम्राट ने बैठकी भाव में बंदिशों पर सुर भी लगाए और नृत्य के भावों की जुगलबंदी भी की। उनकी यह प्रस्तुति देखने के लिए गंगा तट पर संगीत प्रेमियों का रेला उमड़ पड़ा था।
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अस्सी घाट पर पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज ने ठुमरी की बंदिश पर कथक नृत्य को लय-रस में बांधा। बोल थे- मोरी गागरिया काहे को फोरी रे श्याम...। उनके इस भाव पर उनकी शिष्या शाश्वती सेन ने भौंहों, इशारों के साथ ही पांवों की लोच से यादगार नृत्य पेश किया। मंच पर एक बारगी ऐसा लगा जैसे गोपियां खुद कान्हा से बरजोरी कर रही हों। इसके बाद पंडित जी ने झूला की बंदिश पर सुर लगाया। बोल थे- झूलत राधे नंद किशोर...। इस बंदिश पर बैठकी भाव में उनके नृत्य की एक-एक तिहाइयां प्रतिबिंब की तरह व्यक्त हो रही थीं। अंत में भजन के बोल-भजो से मन लागी सीताराम.. पर उन्होंने नृत्य प्रस्तुति की। इनसे पहले नटराज संगीत एकादमी की छात्रा उर्वशी के कथक नृत्य और उत्कर्ष के गिटार पर जुगलबंदी हुई। निर्देशन संगीता सिन्हा का था। सिंथेसाइजर पर दिव्यांस हर्षित ने संगत की। इनके बाद मुंबई से आईं जोनाकी राघवन ने पारंपरिक बंदिशों पर कथक नृत्य की प्रस्तुति की। आमद, तोड़ी, टुकड़े, चक्करदार, रेला से उन्होंने तालियां बटोरीं। तबले पर विवेक मिश्र, गायन पर पुष्कराज भागवत, सितार पर पं. ध्रुवनाथ मिश्र ने संगत की। दिल्ली से आईं शाश्वती सेन ने भी एक से एक तिहाइयां पेश कीं।
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जिंदगी नृत्य की लय की तरह: पं. बिरजू महाराज
वाराणसी। कथक नृत्य सम्राट पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज ने शुक्रवार की रात जिंदगी की तुलना नृत्य की लय से की। उन्होंने कहा कि पैरों में बंधे घुंघरुओं में से ही झंकृत स्वर नहीं निकलते। ताल पर कथक में ही लय नहीं होती, हर एक ही धड़कन में लय है। जिंदगी की उस लय को जानने, समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत ईश्वर से मिलन का मार्ग है। लय, सुर, ताल के जरिए आसानी से परमात्मा का साक्षात्कार किया जा सकता है। इसलिए जीवन में संगीत का होना जरूरी है। इससे पहले वह संकट मोचन मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने दर्शन-पूजन के बाद महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र से मुलाकात की।
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