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मौला अली की शहादत पर निकला अलम तुर्बत का जुलूस
Updated Sat, 17 Jun 2017 01:27 AM IST
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जौनपुर। पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के दामाद मौला हजरत अली की शहादत पर शुक्रवार को जनपद के विभिन्न इलाकों में ताबूत और अलम का जुलूस निकाला गया। अंजुमनों ने नौहा मातम किया।
शाही किला स्थित मद्दू के इमामबाड़े में मजलिस हुई जिसको मौलाना कैसर अब्बास साहब आजमगढ़ ने खेताब किया। मजलिस के बाद तुर्बत का जुलूस निकाला गया जो शाही किला होता हुआ नगर के चहारसू चौराहा पहुंचा जहां मास्टर मोहम्मद हसन नसीम ने तकरीर किया। यहां अलम व तुर्बत का जुलूस का मिलन हुआ। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ शाह के पंजे इमामबाड़े जाकर समाप्त हुआ। यहीं पर अजादारों ने रोजा इफ्तार किया।
उधर, नगर के मोहल्ला अजमेरी की मस्जिद शाह अता हुसैन में मजलिसे आयोजित हुई जिसके बाद ताबूत व अलम का जुलूस निकाला गया। शाम करीब चार बजे दोनों जुलूस नगर के चहारसू चौराहे पर पहुंचे जहां अलम को तुर्बत से मिलाया गया और दोनों जुलूस एक साथ शाह पंजा स्थित कदम रसूल के लिए रवाना हुआ। जहां शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना महफुजुल हसन खां ने मगरिबैन की नमाज अदा कराई। मजलिस से पूर्व अजमेरी मोहल्ला में मोहम्मद अब्बास काजमी एवं उनके साथियों ने सोजख्वानी की। मजलिस को मौलाना सैय्यद सफदर हुसैन जैदी ने खिताब करते हुए कहा कि हजरत अली का पूरा जीवन गरीबों, यतीमों, विधवाओं के प्रति समर्पित था। अली ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। नवाब युसूफ रोड पर भी तकरीर हुई।
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दूसरी तकरीर चहारसू चौराहे पर हुई जहां पर वही बलुआघाट के इमामबाड़ा मद्दू में मजलिस को मौलाना कैसर अब्बास ने खिताब किया। यहां से अंजुमन हुसैनिया के हमराह एक जुलूस किला होता हुआ इस जुलूस में आकर मिलाया गया। जुलूस में डा. जौहर अली खां, सय्यद अकबर हुसैन, फैसल हसन तबरेज, इसरार हुसैन, मेंहदी रजा, जहीर हसन, तहसीन शाहिद, मुन्ना अकेला शहजादे अली मंजर डेजी, वसीम हैदर, हाजी असगर हुसैन जैदी, असलम नकवी, शाहिद मेंहदी, अनवार आब्दी, अंजुम सईद, नासिर रजा, जमीर हसन जेडी आदि मौजूद रहे। संचालन मेंहदी रजा ने किया।
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शाही किला स्थित मद्दू के इमामबाड़े में मजलिस हुई जिसको मौलाना कैसर अब्बास साहब आजमगढ़ ने खेताब किया। मजलिस के बाद तुर्बत का जुलूस निकाला गया जो शाही किला होता हुआ नगर के चहारसू चौराहा पहुंचा जहां मास्टर मोहम्मद हसन नसीम ने तकरीर किया। यहां अलम व तुर्बत का जुलूस का मिलन हुआ। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ शाह के पंजे इमामबाड़े जाकर समाप्त हुआ। यहीं पर अजादारों ने रोजा इफ्तार किया।
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उधर, नगर के मोहल्ला अजमेरी की मस्जिद शाह अता हुसैन में मजलिसे आयोजित हुई जिसके बाद ताबूत व अलम का जुलूस निकाला गया। शाम करीब चार बजे दोनों जुलूस नगर के चहारसू चौराहे पर पहुंचे जहां अलम को तुर्बत से मिलाया गया और दोनों जुलूस एक साथ शाह पंजा स्थित कदम रसूल के लिए रवाना हुआ। जहां शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना महफुजुल हसन खां ने मगरिबैन की नमाज अदा कराई। मजलिस से पूर्व अजमेरी मोहल्ला में मोहम्मद अब्बास काजमी एवं उनके साथियों ने सोजख्वानी की। मजलिस को मौलाना सैय्यद सफदर हुसैन जैदी ने खिताब करते हुए कहा कि हजरत अली का पूरा जीवन गरीबों, यतीमों, विधवाओं के प्रति समर्पित था। अली ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। नवाब युसूफ रोड पर भी तकरीर हुई।
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दूसरी तकरीर चहारसू चौराहे पर हुई जहां पर वही बलुआघाट के इमामबाड़ा मद्दू में मजलिस को मौलाना कैसर अब्बास ने खिताब किया। यहां से अंजुमन हुसैनिया के हमराह एक जुलूस किला होता हुआ इस जुलूस में आकर मिलाया गया। जुलूस में डा. जौहर अली खां, सय्यद अकबर हुसैन, फैसल हसन तबरेज, इसरार हुसैन, मेंहदी रजा, जहीर हसन, तहसीन शाहिद, मुन्ना अकेला शहजादे अली मंजर डेजी, वसीम हैदर, हाजी असगर हुसैन जैदी, असलम नकवी, शाहिद मेंहदी, अनवार आब्दी, अंजुम सईद, नासिर रजा, जमीर हसन जेडी आदि मौजूद रहे। संचालन मेंहदी रजा ने किया।