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सतर्कता बरतें, लाइलाज बीमारियों से पशुओं को बचाएं
Updated Tue, 27 Mar 2018 01:23 AM IST
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ज्ञानपुर। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय की ओर से सोमवार को जिला पंचायत सभागार में ग्लैंडर्स एवं फार्सी बीमारी से बचाव को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें लाइलाज बीमारियों से पशुओं को बचाने की जानकारी दी गई।
मुख्य विकास अधिकारी हरिशंकर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में मुख्य पशु चिकित्सधिकारी डॉ. आरबी मौर्य ने कई अहम जानकारियां दी। उन्होंने कहा कि यह बीमारी घोड़ा, खच्चर और गधों में होती है। इस बीमारी से ग्रसित घोड़ों को न्यूमोनिया, खांसी, नाक से पीला, हरा गाढ़ा स्राव आना, सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, नाक के अंदर फटे हुए छाले दिखते हैं। यह बीमारी लाइलाज और घातक है। बचाव न करने पर मनुष्यों में भी फैल सकती है। इस बीमारी का लक्षण अगर किसी घोड़े, गधे और खच्चर में दिखे तो उसे अन्य से अलग कर एकांत में रखना चाहिए। बीमारी पशु के छूने के बाद हाथ को साफ करना चाहिए। अगर पशु बीमारी से मर जाता है तो उसे सात से आठ फीट के गड्ढे में चूना और नामक डालकर दबा देना चाहिए। इसी तरह प्रशिक्षक डॉ. जेडी सिंह, राजेश कुमार उपाध्याय, सुशील सिंह, अजीत कुमार पाठक ने भी उक्त बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक किया।
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मुख्य विकास अधिकारी हरिशंकर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में मुख्य पशु चिकित्सधिकारी डॉ. आरबी मौर्य ने कई अहम जानकारियां दी। उन्होंने कहा कि यह बीमारी घोड़ा, खच्चर और गधों में होती है। इस बीमारी से ग्रसित घोड़ों को न्यूमोनिया, खांसी, नाक से पीला, हरा गाढ़ा स्राव आना, सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, नाक के अंदर फटे हुए छाले दिखते हैं। यह बीमारी लाइलाज और घातक है। बचाव न करने पर मनुष्यों में भी फैल सकती है। इस बीमारी का लक्षण अगर किसी घोड़े, गधे और खच्चर में दिखे तो उसे अन्य से अलग कर एकांत में रखना चाहिए। बीमारी पशु के छूने के बाद हाथ को साफ करना चाहिए। अगर पशु बीमारी से मर जाता है तो उसे सात से आठ फीट के गड्ढे में चूना और नामक डालकर दबा देना चाहिए। इसी तरह प्रशिक्षक डॉ. जेडी सिंह, राजेश कुमार उपाध्याय, सुशील सिंह, अजीत कुमार पाठक ने भी उक्त बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक किया।
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