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तीन साल से कमिश्नर के आदेश का वीडीए को इंतजार
Updated Sat, 20 Jan 2018 02:12 AM IST
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वाराणसी। दालमंडी में अवैध बेसमेंट का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक अधिकारी अपनी गलती मानने के बजाय एक-दूसरे पर डालकर खुद और अपने विभागों का दामन पाक-साफ दिखाने में जुट गए हैं। इसकी अहम वजह यह है कि शनिवार को शहर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आ रहे हैं। इससे अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।
शुक्रवार को वीडीए सचिव विशाल सिंह ने बड़ा खुलासा करते हुए साफ कहा कि फरवरी, 2013 में भवन स्वामी ने निर्माण शुरू कराया था। तब निर्माण रोकने के लिए नोटिस जारी किया गया था। इसकी सूचना 14 फरवरी को चौक थाने पर भी दी गई थी। रात में निर्माण होने की आशंका पर 10 जुलाई, 2013 और जून, 2014 में तत्कालीन एसएसपी को चोरी-छिपे निर्माण पर रोेक लगाने के लिए दो बार पत्र लिखा गया था। बाद में जून, 2014 में भवन सील कर दिया गया और अगस्त में ध्वस्तीकरण का आदेश दे दिया गया। इस बीच भवन स्वामी ने आयुक्त न्यायालय में अपील कर दी। मार्च, 2015 में आयुक्त न्यायालय को वीडीए ने भवन से जुड़ी पत्रावली उपलब्ध करा दी गई।
तब से अब तक आयुक्त न्यायालय की ओर से भवन निर्माण पर स्थगनादेश पारित किए जाने या बेसमेंट ढहाने के निर्देश से संबंधित फाइल वीडीए को नहीं मिल पाई है। जिसके चलते ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पाई। करीब तीन साल हो गए हैं और वीडीए को मंडलायुक्त के आदेश और फाइल आने का इंतजार है।
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इसके साथ ही सचिव ने एसएसपी आरके भारद्वाज द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद से दालमंडी में निर्माणाधीन बेसमेंट की दूरी 100 मीटर बताए जाने को भी खारिज कर दिया। कहा, स्थलीय निरीक्षण के बाद पाया गया कि जिस मिल्लत मार्केट (पहले बंशीधर कटरा) में बेसमेंट बना है, उसकी दूरी मंदिर से 750 मीटर है। एसएसपी ने बेसमेंट के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कहा था कि जहां निर्माण हुआ है, वहां से मंदिर की दूरी 100 मीटर है।
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शुक्रवार को वीडीए सचिव विशाल सिंह ने बड़ा खुलासा करते हुए साफ कहा कि फरवरी, 2013 में भवन स्वामी ने निर्माण शुरू कराया था। तब निर्माण रोकने के लिए नोटिस जारी किया गया था। इसकी सूचना 14 फरवरी को चौक थाने पर भी दी गई थी। रात में निर्माण होने की आशंका पर 10 जुलाई, 2013 और जून, 2014 में तत्कालीन एसएसपी को चोरी-छिपे निर्माण पर रोेक लगाने के लिए दो बार पत्र लिखा गया था। बाद में जून, 2014 में भवन सील कर दिया गया और अगस्त में ध्वस्तीकरण का आदेश दे दिया गया। इस बीच भवन स्वामी ने आयुक्त न्यायालय में अपील कर दी। मार्च, 2015 में आयुक्त न्यायालय को वीडीए ने भवन से जुड़ी पत्रावली उपलब्ध करा दी गई।
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तब से अब तक आयुक्त न्यायालय की ओर से भवन निर्माण पर स्थगनादेश पारित किए जाने या बेसमेंट ढहाने के निर्देश से संबंधित फाइल वीडीए को नहीं मिल पाई है। जिसके चलते ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पाई। करीब तीन साल हो गए हैं और वीडीए को मंडलायुक्त के आदेश और फाइल आने का इंतजार है।
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इसके साथ ही सचिव ने एसएसपी आरके भारद्वाज द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद से दालमंडी में निर्माणाधीन बेसमेंट की दूरी 100 मीटर बताए जाने को भी खारिज कर दिया। कहा, स्थलीय निरीक्षण के बाद पाया गया कि जिस मिल्लत मार्केट (पहले बंशीधर कटरा) में बेसमेंट बना है, उसकी दूरी मंदिर से 750 मीटर है। एसएसपी ने बेसमेंट के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कहा था कि जहां निर्माण हुआ है, वहां से मंदिर की दूरी 100 मीटर है।