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नृत्य में राधाकृष्ण के रूपों को दर्शाया
Updated Wed, 10 Jan 2018 02:17 AM IST
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वाराणसी। श्रीमठ में तीन दिवसीय श्रीरामानंदाचार्य जयंती महोत्सव का समापन संगीत संध्या के साथ किया गया। मंगलवार को सजी संगीत संध्या में बधाई गान और कथक की भावपूर्ण भक्तिमय प्रस्तुति ने सभी को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। बधाईगान को गौरव मिश्रा ने अपने स्वरों से सजाया। उनके साथ तबले पर प्रीतम मिश्र और सितार पर नीरज मिश्र ने संगत की। इसके उपरांत कथक की भावभंगिमाओं से डॉ. ममता टंडन एवं पं. रविशंकर मिश्र ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने कथक की शुरुआत श्रीराम वंदना श्रीराम चंद्र कृपालु भजमन से की। दूसरी प्रस्तुति में उन्होंने श्रीराधाकृष्ण की भावपूर्ण और भक्तिमय रूप दर्शाया। कथक का समापन उन्होंने भगवान शिव के शिवतांडव स्त्रोत से किया। इसके पूर्व प्रात:काल जगदगुरु रामानंदाचार्य रामनरेशाचार्य महाराज ने भक्तों के साथ काशी के पंचदेवों एवं मां पंचगंगा का सविधि पूजन अर्चन किया। विष्णुकाशी के अधिष्ठाता भगवान बिंदु माधवजी सहित मां ब्रह्मचारिणी, बाबा कालभैरव, दंडपाणि भैरव, गभतीश्वर महादेव, मां मंगलागौरी, श्रीमठ सिद्ध हनुमानजी तथा रामानंद चरणपादुका जी का सविधि वैदिक रीति से षोडशोपचार भव्य पूजन किया गया। स्वामी रामनरेशाचार्य ने कहा कि रससागर श्रीराम के समान ही आचार्यप्रवर रामानंदाचार्य भी संपूर्णत: रसवर्षी थे। संप्रदाय में आज भी वही परंपरा अक्षुण्ण है। भक्ति की परिपूर्णता तो गायन एवं नृत्य से होती है। श्रीमठ के मुख्य प्रबंधक विधानबाबा के संयोजन में विशिष्ट भण्डारा आयोजित हुआ। मौके पर डॉ. सियाराम तिवारी, अमूल्य शर्मा, मिथिलेश कुमार, अम्बरीष राय, शिवकुमार चौहान, पुष्कर उपाध्याय, महेन्द्र गोयल, अनिल गुप्ता एवं जगद्गुरु रामानदाचार्य आधात्मिक मण्डल के बिहार, पंजाब व राजस्थान के सदस्य भारी संख्या में उपस्थित रहे।
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उन्होंने कथक की शुरुआत श्रीराम वंदना श्रीराम चंद्र कृपालु भजमन से की। दूसरी प्रस्तुति में उन्होंने श्रीराधाकृष्ण की भावपूर्ण और भक्तिमय रूप दर्शाया। कथक का समापन उन्होंने भगवान शिव के शिवतांडव स्त्रोत से किया। इसके पूर्व प्रात:काल जगदगुरु रामानंदाचार्य रामनरेशाचार्य महाराज ने भक्तों के साथ काशी के पंचदेवों एवं मां पंचगंगा का सविधि पूजन अर्चन किया। विष्णुकाशी के अधिष्ठाता भगवान बिंदु माधवजी सहित मां ब्रह्मचारिणी, बाबा कालभैरव, दंडपाणि भैरव, गभतीश्वर महादेव, मां मंगलागौरी, श्रीमठ सिद्ध हनुमानजी तथा रामानंद चरणपादुका जी का सविधि वैदिक रीति से षोडशोपचार भव्य पूजन किया गया। स्वामी रामनरेशाचार्य ने कहा कि रससागर श्रीराम के समान ही आचार्यप्रवर रामानंदाचार्य भी संपूर्णत: रसवर्षी थे। संप्रदाय में आज भी वही परंपरा अक्षुण्ण है। भक्ति की परिपूर्णता तो गायन एवं नृत्य से होती है। श्रीमठ के मुख्य प्रबंधक विधानबाबा के संयोजन में विशिष्ट भण्डारा आयोजित हुआ। मौके पर डॉ. सियाराम तिवारी, अमूल्य शर्मा, मिथिलेश कुमार, अम्बरीष राय, शिवकुमार चौहान, पुष्कर उपाध्याय, महेन्द्र गोयल, अनिल गुप्ता एवं जगद्गुरु रामानदाचार्य आधात्मिक मण्डल के बिहार, पंजाब व राजस्थान के सदस्य भारी संख्या में उपस्थित रहे।
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