{"_id":"5a3c1fc14f1c1bf4688c2b13","slug":"81513889729-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धूल और धुएं से बिगड़ रही पर्यावरण की सेहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धूल और धुएं से बिगड़ रही पर्यावरण की सेहत
Updated Fri, 22 Dec 2017 02:33 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। शहर में धूल और धुएं से भी पर्यावरण की सेहत बिगड़ रही है। इसकी बड़ी वजह है सड़कों की खस्ताहाली और जाम। विकास कार्यों के लिए मनमाने तरीके से सड़कें खोद दी गई हैं। न तो समय से विकास कार्यों को पूरा कराया जा रहा है और न ही सड़कें दुरुस्त की जा रही हैं। खस्ताहाल सड़कें जाम का सबब बन रही हैं। एक तरफ उड़ती धूल तो दूसरी तरफ जाम में फंसे वाहनों का धुएं के बीच सांस लेना मुश्किल हो जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले पांच सालों में धूल और धुएं के चलते शहर में प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
कहीं सीवेज, पेयजल तो कहीं गैस पाइप लाइन और बिजली तारों को भूमिगत करने के लिए खुदाई की गई है। जगह-जगह फ्लाईओवर और आरओबी के लिए सड़कें खोदी गई हैं। निर्धारित समयावधि में काम पूरा न कराए जाने का खामियाजा आम जनता को न सिर्फ खस्ताहाल सड़कों पर रोजाना जाम की समस्या के रूप में भुगतना पड़ रहा है बल्कि शहर का पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। खस्ताहाल सड़कों से उड़ती धूल मुसीबत का सबब बनी है तो वहीं इन सड़कों पर रोजाना जाम लगने से हालात और गंभीर हो रहे हैं। खुदाई वाली सड़कों पर रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में जाम में फंसे वाहनों के धुएं से पार पाना मुश्किल हो जाता है। लखनऊ में धूल के कारण की प्रदूषण का स्तर बढ़ गया था। शासन के निर्देश पर वहां प्रमुख मार्गों पर पानी का छिड़काव कराए जाने के साथ ही खुदाई के कार्यों को जल्द पूरा करा लिया गया, इससे वहां प्रदूषण के स्तर में काफी कमी आई लेकिन यहां ऐसा कोई प्रयास अब तक नहीं किया गया है। फ्लाईओवर निर्माण की वजह से चौकाघाट से लहरतारा तक की सड़कें टूटी हुई है। भूमिगत तार बिछाने के लिए आईपीडीएस ने शहर के बड़े हिस्से में सड़कों की खुदाई कर रखी है। वरुणापार में पांडेयपुर-आजमगढ़ मार्ग समेत कई अन्य स्थानों पर फिर सीवर और पेयजल की पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है। पिछले तकरीब पांच साल से शहर में किसी न किसी विकास कार्यों की वजह से खुदाई चल रही है। एक ही सड़क की अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग बार खुदाई कराने से मुश्किलें और बढ़ी हैं।
विज्ञापन
कहीं सीवेज, पेयजल तो कहीं गैस पाइप लाइन और बिजली तारों को भूमिगत करने के लिए खुदाई की गई है। जगह-जगह फ्लाईओवर और आरओबी के लिए सड़कें खोदी गई हैं। निर्धारित समयावधि में काम पूरा न कराए जाने का खामियाजा आम जनता को न सिर्फ खस्ताहाल सड़कों पर रोजाना जाम की समस्या के रूप में भुगतना पड़ रहा है बल्कि शहर का पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। खस्ताहाल सड़कों से उड़ती धूल मुसीबत का सबब बनी है तो वहीं इन सड़कों पर रोजाना जाम लगने से हालात और गंभीर हो रहे हैं। खुदाई वाली सड़कों पर रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में जाम में फंसे वाहनों के धुएं से पार पाना मुश्किल हो जाता है। लखनऊ में धूल के कारण की प्रदूषण का स्तर बढ़ गया था। शासन के निर्देश पर वहां प्रमुख मार्गों पर पानी का छिड़काव कराए जाने के साथ ही खुदाई के कार्यों को जल्द पूरा करा लिया गया, इससे वहां प्रदूषण के स्तर में काफी कमी आई लेकिन यहां ऐसा कोई प्रयास अब तक नहीं किया गया है। फ्लाईओवर निर्माण की वजह से चौकाघाट से लहरतारा तक की सड़कें टूटी हुई है। भूमिगत तार बिछाने के लिए आईपीडीएस ने शहर के बड़े हिस्से में सड़कों की खुदाई कर रखी है। वरुणापार में पांडेयपुर-आजमगढ़ मार्ग समेत कई अन्य स्थानों पर फिर सीवर और पेयजल की पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है। पिछले तकरीब पांच साल से शहर में किसी न किसी विकास कार्यों की वजह से खुदाई चल रही है। एक ही सड़क की अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग बार खुदाई कराने से मुश्किलें और बढ़ी हैं।
विज्ञापन