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प्रवासियों के कुंभ में सौंदर्य, संस्कृति, समरसता का संगम
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वाराणसी। ऐढ़े गांव स्थित टेंट सिटी को सौंदर्य से परिपूर्ण किया गया है। कलात्मकता बेजोड़ है तो संस्कृति का भी उतना ही खयाल रखा गया है। दीवारों पर इतिहास जीवंत होता दिखता है। किले की आकृतियां प्राचीनता से परिचय कराती हैं तो गेट के आकार, मंदिरों की प्रतिकृति आध्यात्म दर्शन। सुख सुविधाएं नूतन हैं।
तंबुओं के शहर को वैभवशाली बनाने की पूरी कोशिश की गई है। तंबुओं से बड़े-बड़े हॉल बनाए गए हैं। चारों तरफ की दीवारों पर प्राचीन काशी दिखती है। यहां संस्कृति को चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है। घाट, गंगा और यहां की गलियों को भी दर्शाया गया है। आतिथ्य की तैयारी भी काशी की परंपरा के अनुरूप है, बस इसमें आधुनिकता का तड़का है। टेंट में फर्नीचर नए जमाने का है तो रोशनी के लिए अब लुप्त होने के कगार पहुंच चुकी लालटेन की व्यवस्था है, लेकिन इसमें बाती की जगह बल्ब ने ले ली है। बाहर अंधेरा मिटाने के लिए नए जमाने की फैंसी लाइट्स को जगह दी गई। अस्थाई ही सही, लेकिन टेंट सिटी की खूबसूरती लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
फाइव स्टार होटल सरीखी सुविधाएं
तंबुओं में फाइव स्टार सरीखी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश है। 10 से 20 तंबुओं की कॉलोनियां बनाई गई हैं। बीच में टहलने और बैठने के लिए ओपेन एरिया है। बीच-बीच में शेड लगाए गए हैं। टेंट के बाहर बैठने के लिए फर्नीचर से सजी गैलरी है। तंबू के अंदर डबल बेड, एलईडी टीवी, आलमारी, इंटरकॉम और ब्लोवर आदि लगाया गया है। सोफे भी हैं। वॉशरूम में कंबोड, वॉश बेसिन, शॉवर भी है। 24 घंटे पानी की आपूर्ति होगी। तंबुओं की तीन श्रेणियां हैं, जिनमें त्रिवेणी कॉटेज (कॉटेज कैटेगरी), सरस्वती स्विस काटेज (डीलक्स रॉयल कॉटेज) व काशी विला शामिल हैं। काशी विला को कमरों की शक्ल दी गई है, जहां परिवार के साथ ठहरा जा सकता है। इन श्रेणियों के हिसाब से ही खाने की व्यवस्था होगी।
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जिम और स्पा भी
टेंट सिटी में जिम, स्पा व योग की सुविधा भी मिलेगी। परिसर में ही जिम्नेजियम, योग केंद्र व स्पा केंद्र भी बनाया जा रहा है। जिम का सामान भी परिसर में पहुंच गया है। आर्ट गैलरी भी लगाई जा रही है।
टेंट सिटी में हाट, स्टेडियम में लगेंगे 90 स्टॉल
टेंट सिटी में हाट भी लगाई जा रही है, यहां करीब 25 स्टाल लगाए जाएंगे। इसमें काशी के प्रसिद्ध खान-पान के साथ शिल्प व अन्य जरूरी सामग्री की बिक्री होगी। स्टेडियम में जिला उद्योग केंद्र की कला व शिल्प को प्रदर्शित करते 90 स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इसमें 10 जीआई उत्पादों के साथ प्रदेश की शिल्प व कला का प्रदर्शन होगा। यहां अतिथि खरीदारी भी कर सकेंगे। टीएफसी में शिल्प का लाइव प्रदर्शन भी किया जाना है।
परिसर में ही अस्पताल
अतिथियों के बीमार होने या चोट जैसी किसी अवस्था के लिए टेंट सिटी में ही अस्पताल खुलने जा रहा है। यहां आपात चिकित्सा के साथ ही अन्य आवश्यक सुविधाएं होंगी। इसके लिए दो कमरे तैयार किए गए हैं।
क्षेत्र का बदला नक्शा
बड़ा लालपुर व ऐढ़े टेंट सिटी जाने का रास्ता बदला नजर आ रहा है। दीन दयाल हस्तकला संकुल के आसपास बनी सोसाइटी व घरों की दीवारों पर घाट, गलियां, साधु-संतों की आकृतियां दिखती हैं। ऐढ़े की तरफ बढ़ने पर सड़क के दोनाें तरफ व रिंग रोड पर दूर-दूर तक रंग-बिरंगी कलाकृतियां नजर आती हैं।
सेल्फीप्वाइंट बनें तंबू
टेंट सिटी देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले लोग तंबुओं के साथ फोटो और सेल्फी ले रहे हैं। दीवारों पर बनी कलाकृतियां भी लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।
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तंबुओं के शहर को वैभवशाली बनाने की पूरी कोशिश की गई है। तंबुओं से बड़े-बड़े हॉल बनाए गए हैं। चारों तरफ की दीवारों पर प्राचीन काशी दिखती है। यहां संस्कृति को चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है। घाट, गंगा और यहां की गलियों को भी दर्शाया गया है। आतिथ्य की तैयारी भी काशी की परंपरा के अनुरूप है, बस इसमें आधुनिकता का तड़का है। टेंट में फर्नीचर नए जमाने का है तो रोशनी के लिए अब लुप्त होने के कगार पहुंच चुकी लालटेन की व्यवस्था है, लेकिन इसमें बाती की जगह बल्ब ने ले ली है। बाहर अंधेरा मिटाने के लिए नए जमाने की फैंसी लाइट्स को जगह दी गई। अस्थाई ही सही, लेकिन टेंट सिटी की खूबसूरती लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
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फाइव स्टार होटल सरीखी सुविधाएं
तंबुओं में फाइव स्टार सरीखी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश है। 10 से 20 तंबुओं की कॉलोनियां बनाई गई हैं। बीच में टहलने और बैठने के लिए ओपेन एरिया है। बीच-बीच में शेड लगाए गए हैं। टेंट के बाहर बैठने के लिए फर्नीचर से सजी गैलरी है। तंबू के अंदर डबल बेड, एलईडी टीवी, आलमारी, इंटरकॉम और ब्लोवर आदि लगाया गया है। सोफे भी हैं। वॉशरूम में कंबोड, वॉश बेसिन, शॉवर भी है। 24 घंटे पानी की आपूर्ति होगी। तंबुओं की तीन श्रेणियां हैं, जिनमें त्रिवेणी कॉटेज (कॉटेज कैटेगरी), सरस्वती स्विस काटेज (डीलक्स रॉयल कॉटेज) व काशी विला शामिल हैं। काशी विला को कमरों की शक्ल दी गई है, जहां परिवार के साथ ठहरा जा सकता है। इन श्रेणियों के हिसाब से ही खाने की व्यवस्था होगी।
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जिम और स्पा भी
टेंट सिटी में जिम, स्पा व योग की सुविधा भी मिलेगी। परिसर में ही जिम्नेजियम, योग केंद्र व स्पा केंद्र भी बनाया जा रहा है। जिम का सामान भी परिसर में पहुंच गया है। आर्ट गैलरी भी लगाई जा रही है।
टेंट सिटी में हाट, स्टेडियम में लगेंगे 90 स्टॉल
टेंट सिटी में हाट भी लगाई जा रही है, यहां करीब 25 स्टाल लगाए जाएंगे। इसमें काशी के प्रसिद्ध खान-पान के साथ शिल्प व अन्य जरूरी सामग्री की बिक्री होगी। स्टेडियम में जिला उद्योग केंद्र की कला व शिल्प को प्रदर्शित करते 90 स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इसमें 10 जीआई उत्पादों के साथ प्रदेश की शिल्प व कला का प्रदर्शन होगा। यहां अतिथि खरीदारी भी कर सकेंगे। टीएफसी में शिल्प का लाइव प्रदर्शन भी किया जाना है।
परिसर में ही अस्पताल
अतिथियों के बीमार होने या चोट जैसी किसी अवस्था के लिए टेंट सिटी में ही अस्पताल खुलने जा रहा है। यहां आपात चिकित्सा के साथ ही अन्य आवश्यक सुविधाएं होंगी। इसके लिए दो कमरे तैयार किए गए हैं।
क्षेत्र का बदला नक्शा
बड़ा लालपुर व ऐढ़े टेंट सिटी जाने का रास्ता बदला नजर आ रहा है। दीन दयाल हस्तकला संकुल के आसपास बनी सोसाइटी व घरों की दीवारों पर घाट, गलियां, साधु-संतों की आकृतियां दिखती हैं। ऐढ़े की तरफ बढ़ने पर सड़क के दोनाें तरफ व रिंग रोड पर दूर-दूर तक रंग-बिरंगी कलाकृतियां नजर आती हैं।
सेल्फीप्वाइंट बनें तंबू
टेंट सिटी देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले लोग तंबुओं के साथ फोटो और सेल्फी ले रहे हैं। दीवारों पर बनी कलाकृतियां भी लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।