{"_id":"5b1ec81b4f1c1b694d8b5e25","slug":"71528743963-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानी के बिना कैसे डालें नर्सरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानी के बिना कैसे डालें नर्सरी
Updated Tue, 12 Jun 2018 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर। जिले की नहरों में पानी नहीं है तो ज्यादातर नलकूप खराब हैं। ऐसे में जहां सब्जी की फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रहीं, वहीं धान की नर्सरी डालने का काम पिछड़ रहा है। इससे किसान काफी परेशान हैं। उन्हें धान की खेती पिछड़ने की चिंता सता रही है।
मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी के बाद बेहतर बारिश होने की उम्मीद लगाकर किसान नर्सरी डालने में लग गए हैं। बारिश न होने से नहर और नलकूप के सहारे 80 फीसदी किसान नर्सरी डालते हैं। अब तक नहरों में पानी नहीं आया, वहीं 50 से अधिक राजकीय नलकूप खराब पड़ गए हैं। पानी न मिलने से किसान नर्सरी डालने को लेकर चिंतित हो गए हैं। बैराखास गांव के किसान अनुपम आनंद, ज्ञानपुर के सुरेश चंद्र, मिल्की के भोलानाथ उपाध्याय ने कहा कि किसानों की जरूरत पर न तो नहरें चालू होती हैं और ना ही नलकूप दुरुस्त रहते हैं। जिले की 16 हजार हेक्टेयर खेती नहरों पर निर्भर है। इस बार नहरों की सफाई भी नहीं हो सकी है। अधिशासी अभियंता नहर केएन जायसवाल ने कहा कि 10 से 11 जून तक नहरें चालू हो जाएंगी। बजट न होने से अब नवंबर-दिसंबर में रबी सीजन के दौरान नहरों की सफाई होगी। अधिशासी अभियंता नलकूप अनंत नारायण ने कहा कि जिले में 524 राजकीय नलकूप हैं, जिनमें से 15 नलकूप यांत्रिक दोष के कारण बंद हैं, जिसे सुधारा जा रहा है। बताते चलें कि इस साल 47 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई होनी है।
विज्ञापन
मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी के बाद बेहतर बारिश होने की उम्मीद लगाकर किसान नर्सरी डालने में लग गए हैं। बारिश न होने से नहर और नलकूप के सहारे 80 फीसदी किसान नर्सरी डालते हैं। अब तक नहरों में पानी नहीं आया, वहीं 50 से अधिक राजकीय नलकूप खराब पड़ गए हैं। पानी न मिलने से किसान नर्सरी डालने को लेकर चिंतित हो गए हैं। बैराखास गांव के किसान अनुपम आनंद, ज्ञानपुर के सुरेश चंद्र, मिल्की के भोलानाथ उपाध्याय ने कहा कि किसानों की जरूरत पर न तो नहरें चालू होती हैं और ना ही नलकूप दुरुस्त रहते हैं। जिले की 16 हजार हेक्टेयर खेती नहरों पर निर्भर है। इस बार नहरों की सफाई भी नहीं हो सकी है। अधिशासी अभियंता नहर केएन जायसवाल ने कहा कि 10 से 11 जून तक नहरें चालू हो जाएंगी। बजट न होने से अब नवंबर-दिसंबर में रबी सीजन के दौरान नहरों की सफाई होगी। अधिशासी अभियंता नलकूप अनंत नारायण ने कहा कि जिले में 524 राजकीय नलकूप हैं, जिनमें से 15 नलकूप यांत्रिक दोष के कारण बंद हैं, जिसे सुधारा जा रहा है। बताते चलें कि इस साल 47 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई होनी है।
विज्ञापन