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बाबा धाम में लड्डुओं का शिवालय, अन्नपूर्णा दरबार में सजा अन्न भंडार
Updated Sun, 22 Oct 2017 01:58 AM IST
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वाराणसी। भोले की नगरी में अन्नकूट महोत्सव की छटा देश-दुनिया से आए श्रद्धालुओं, पर्यटकों के लिए यादगार बन गई। अन्न, मेवा से बने पकवानों, मिठाइयों के भंडार सजाए गए। तीनों लोक के स्वामी बाबा विश्वनाथ के दरबार में घी के लड्डुओं का शिवालय का दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे। मां अन्नपूर्णा के धाम में भी अन्न का अनूठा पहाड़ सजाया गया। शहर के अन्य मंदिरों में भी अन्नकूट की छटा देखने के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
मंगला आरती के बाद बाबा विश्वनाथ के दरबार में सजे लड्डुओं के शिवालय का दर्शन भोर चार बजे से ही आरंभ हो गया। अन्नकूट की झांकी दर्शन के लिए लंबी कतार लगी। शिवालय के द्वार पर लड्डुओं से ही श्रीराम लिखा था। गर्भगृह में छप्पन भोग के अलावा मेवा, मिश्री, पकवान का भोग अर्पित किया गया। अन्नपूर्णा मंदिर में 80 कुंतल वजन की मेवा, फल और खोवा, छेना से बनी मिठाइयों का अन्नकूट सजाया गया। 11 कुंतल कच्चे भोग यानी चावल, दाल, तरह-तरह की सब्जियां, चटनी, अचार, पापड़ के रूप में अन्न का पहाड़ सजाया गया। यहां पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नकूट का भोग-प्रसाद मंदिर परिसर के अन्नक्षेत्र में ग्रहण किया। अन्न से बनाए गए पर्वत को प्रसाद के रूप में पाने की दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं में होड़ मची रही।
छप्पन भोग के साथ मंदिरों में सजी झांकी
अन्नकूट पर शुक्रवार को शहर के कई मंदिरों में छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। कई तरह की मिठाइयां, नमकीन और विभिन्न प्रकार के व्यंजन से देवी देवताओं का शृंगार किया गया। विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। मछोदरी के स्वामी नारायण मंदिर में छप्पन भोग की झांकी की सजाई गई। हवन पूजन दीनदयाल जालान और आरती राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी ने किया। महंत प्रेम स्वरूप दास और पुजारी घनश्याम मेहता मौजूद रहे। उधर दुर्गा मंदिर में अन्नकूट की झांकी सजाई गई। मां को छप्पन भोग अर्पित किया गया। अमरीश शुक्ल ने भक्ति गीत की गंगा बहाई। सुखदेव वायलिन पर और अशोक पांडेय ने तबले पर संगत की। आरती महंत कौशल पति द्विवेदी ने की। दुर्ग विनायक मंदिर में पंडित दीपक दूबे की देखरेख में अन्नकूट का भव्य शृृंगार किया गया।
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स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए उमड़े भक्त
मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी विग्रह के चार दिवसीय महादर्शन के लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। धनतेरस से लेकर अन्नकूट तक कुल ढाई लाख से अधिक भक्तों ने माता के दरबार में हाजिरी लगाई। अन्नकूट पर्व पर माता को छप्पन भोग लगाया गया। दोपहर 12 बजे भोग आरती के बाद भक्तों के लिए प्रसाद पाने का सिलसिला चालू हुआ। देर शाम तक प्रसाद ग्रहण करने वालों में गणमान्य लोगों के साथ शासन-प्रशासन के अधिकारी भी शामिल रहे। उप महंत शंकर पुरी के निर्देशन में प्रसाद का वितरण किया गया। महंत रामेश्वरपुरी ने रात्रि 11 बजे विशेष महाआरती की। उसके बाद स्वर्णमयी विग्रह का पट बंद हुआ। इस दौरान एग्जीक्यूटिव ट्रस्टी ए जनार्दन, जीवनंदन झा, राकेश तोमर, विक्की आदि लोग मौजूद रहे।
टूटी कई वर्षों पुरानी परंपरा
एसपी सुरक्षा ज्ञानवापी की मनमानी, सील हुआ रेड जोन
वाराणसी। विश्वनाथ मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर परिक्षेत्र में इस बार अन्नकूट पर वर्षों पुरानी परंपरा टूट गई। विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के बीच देवालयों में अन्नकूट दर्शन से भक्तों को वंचित रह जाना पड़ा। एसपी सुरक्षा ज्ञानवापी के आदेश पर अन्नपूर्णा मंदिर और विश्वनाथ मंदिर के पास बैरिकेडिंग कर दी गई थी। इसके चलते भक्त शनिदेव, कैलाश भगवान, अक्षयवट हनुमान के दर्शन के लिए नहीं पहुंच पाए।
शुक्रवार को मंगला आरती के बाद काशी विश्वनाथ से मां अन्नपूर्णा की तरफ भक्तों का आगमन एसपी ज्ञानवापी सुरक्षा के आदेश से रोक दिया गया था। शनिदेव, कैलाश भगवान और अक्षयवट हनुमान के अन्नकूट दर्शन से वंचित भक्तों और क्षेत्रीय लोगों ने इसका विरोध किया तो उच्चाधिकारियों के निर्देश पर दोपहर एक बजे भक्तों के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर से अन्नपूर्णा मंदिर की तरफ आवागमन चालू किया गया। इसके बाद अक्षयवट हनुमान, शनिदेव और कैलाश भगवान का दर्शन शुरू हुआ।
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मंगला आरती के बाद बाबा विश्वनाथ के दरबार में सजे लड्डुओं के शिवालय का दर्शन भोर चार बजे से ही आरंभ हो गया। अन्नकूट की झांकी दर्शन के लिए लंबी कतार लगी। शिवालय के द्वार पर लड्डुओं से ही श्रीराम लिखा था। गर्भगृह में छप्पन भोग के अलावा मेवा, मिश्री, पकवान का भोग अर्पित किया गया। अन्नपूर्णा मंदिर में 80 कुंतल वजन की मेवा, फल और खोवा, छेना से बनी मिठाइयों का अन्नकूट सजाया गया। 11 कुंतल कच्चे भोग यानी चावल, दाल, तरह-तरह की सब्जियां, चटनी, अचार, पापड़ के रूप में अन्न का पहाड़ सजाया गया। यहां पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नकूट का भोग-प्रसाद मंदिर परिसर के अन्नक्षेत्र में ग्रहण किया। अन्न से बनाए गए पर्वत को प्रसाद के रूप में पाने की दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं में होड़ मची रही।
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छप्पन भोग के साथ मंदिरों में सजी झांकी
अन्नकूट पर शुक्रवार को शहर के कई मंदिरों में छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। कई तरह की मिठाइयां, नमकीन और विभिन्न प्रकार के व्यंजन से देवी देवताओं का शृंगार किया गया। विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। मछोदरी के स्वामी नारायण मंदिर में छप्पन भोग की झांकी की सजाई गई। हवन पूजन दीनदयाल जालान और आरती राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी ने किया। महंत प्रेम स्वरूप दास और पुजारी घनश्याम मेहता मौजूद रहे। उधर दुर्गा मंदिर में अन्नकूट की झांकी सजाई गई। मां को छप्पन भोग अर्पित किया गया। अमरीश शुक्ल ने भक्ति गीत की गंगा बहाई। सुखदेव वायलिन पर और अशोक पांडेय ने तबले पर संगत की। आरती महंत कौशल पति द्विवेदी ने की। दुर्ग विनायक मंदिर में पंडित दीपक दूबे की देखरेख में अन्नकूट का भव्य शृृंगार किया गया।
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स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए उमड़े भक्त
मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी विग्रह के चार दिवसीय महादर्शन के लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। धनतेरस से लेकर अन्नकूट तक कुल ढाई लाख से अधिक भक्तों ने माता के दरबार में हाजिरी लगाई। अन्नकूट पर्व पर माता को छप्पन भोग लगाया गया। दोपहर 12 बजे भोग आरती के बाद भक्तों के लिए प्रसाद पाने का सिलसिला चालू हुआ। देर शाम तक प्रसाद ग्रहण करने वालों में गणमान्य लोगों के साथ शासन-प्रशासन के अधिकारी भी शामिल रहे। उप महंत शंकर पुरी के निर्देशन में प्रसाद का वितरण किया गया। महंत रामेश्वरपुरी ने रात्रि 11 बजे विशेष महाआरती की। उसके बाद स्वर्णमयी विग्रह का पट बंद हुआ। इस दौरान एग्जीक्यूटिव ट्रस्टी ए जनार्दन, जीवनंदन झा, राकेश तोमर, विक्की आदि लोग मौजूद रहे।
टूटी कई वर्षों पुरानी परंपरा
एसपी सुरक्षा ज्ञानवापी की मनमानी, सील हुआ रेड जोन
वाराणसी। विश्वनाथ मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर परिक्षेत्र में इस बार अन्नकूट पर वर्षों पुरानी परंपरा टूट गई। विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के बीच देवालयों में अन्नकूट दर्शन से भक्तों को वंचित रह जाना पड़ा। एसपी सुरक्षा ज्ञानवापी के आदेश पर अन्नपूर्णा मंदिर और विश्वनाथ मंदिर के पास बैरिकेडिंग कर दी गई थी। इसके चलते भक्त शनिदेव, कैलाश भगवान, अक्षयवट हनुमान के दर्शन के लिए नहीं पहुंच पाए।
शुक्रवार को मंगला आरती के बाद काशी विश्वनाथ से मां अन्नपूर्णा की तरफ भक्तों का आगमन एसपी ज्ञानवापी सुरक्षा के आदेश से रोक दिया गया था। शनिदेव, कैलाश भगवान और अक्षयवट हनुमान के अन्नकूट दर्शन से वंचित भक्तों और क्षेत्रीय लोगों ने इसका विरोध किया तो उच्चाधिकारियों के निर्देश पर दोपहर एक बजे भक्तों के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर से अन्नपूर्णा मंदिर की तरफ आवागमन चालू किया गया। इसके बाद अक्षयवट हनुमान, शनिदेव और कैलाश भगवान का दर्शन शुरू हुआ।