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जमीन विवाद के निस्तारण में देरी से हो रहा बखेड़ा
Updated Sun, 11 Feb 2018 02:20 AM IST
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वाराणसी। चोलापुर क्षेत्र के आयर के रहने वाले रमेश राजभर अपनी जमीन की पैमाइश के लिए दो महीने से तहसील का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन लेखपाल जाने को तैयार नहीं है। पैमाइश न होने से जमीन विवाद बना हुआ है। विवाद के निस्तारण के लिए फरियादी एसडीएम से लेकर डीएम कार्यालय तक के चक्कर लगा रहे हैं। जमीन की पैमाइश करने के लिए पहले लेखपाल परेशान करते हैं फिर रिपोर्ट लगवाने के लिए कानूनगो के चक्कर लगाने होते हैं। ऐसे विवादों के जल्द दूर न होने से बखेड़ा खड़ा होता है। सोएपुर गांव में शुक्रवार को हुई आगजनी इसी का उदाहरण है। तीन महीने बाद एसडीएम ने जांच के बाद डीएम को रिपोर्ट दी। जमीन की पैमाइश किए बिना बनाई गई रिपोर्ट पर ग्रामीणों को भरोसा नहीं है।
बीते मंगलवार को जिले की तीनों तहसीलों में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया था। तीनों तहसीलों में कुल 510 शिकायतें आई थीं। इसमें तीन सौ से ज्यादा शिकायतें जमीन विवाद से जुड़ी हुई थीं। इसमें से पचास से ज्यादा ऐसे मामले थे, जिनमें दोबारा शिकायत की गई है। इससे स्पष्ट है कि शिकायतें दूर न होने से लोग परेशान हैं और उन्हें दोबारा शिकायत करनी पड़ रही है। ये हाल तब है कि जब प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं जिले के प्रभारी अधिकारी डॉ. रजनीश दूबे ने जमीन विवाद के निस्तारण के लिए तहसील और स्थानीय पुलिस की टीम बनाकर ऐसे मामलों का निस्तारण करने का निर्देश दिया गया है। जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का कहना है कि जमीन विवाद के मामले में अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण कर विवाद निस्तारण कराने का निर्देश दिया गया है।
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बीते मंगलवार को जिले की तीनों तहसीलों में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया था। तीनों तहसीलों में कुल 510 शिकायतें आई थीं। इसमें तीन सौ से ज्यादा शिकायतें जमीन विवाद से जुड़ी हुई थीं। इसमें से पचास से ज्यादा ऐसे मामले थे, जिनमें दोबारा शिकायत की गई है। इससे स्पष्ट है कि शिकायतें दूर न होने से लोग परेशान हैं और उन्हें दोबारा शिकायत करनी पड़ रही है। ये हाल तब है कि जब प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं जिले के प्रभारी अधिकारी डॉ. रजनीश दूबे ने जमीन विवाद के निस्तारण के लिए तहसील और स्थानीय पुलिस की टीम बनाकर ऐसे मामलों का निस्तारण करने का निर्देश दिया गया है। जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का कहना है कि जमीन विवाद के मामले में अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण कर विवाद निस्तारण कराने का निर्देश दिया गया है।
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