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प्रतिवर्ष 60 से 70 सेमी. नीचे जा रहा भूगर्भ जलस्तर
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जिले में जल दोहन के चलते भू-गर्भीय जल स्तर 65 से 70 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष नीचे जा रहा है। इसी का परिणाम है कि जिले के तीन विकास खंड डार्क जोन में चले गए हैं। इनमें विकास खंड आराजीलाइन, हरहुआ और पिंडरा ब्लॉक शामिल हैं। इसी प्रकार चिरईगांव, बड़ागांव, चोलापुर की स्थिति भी ठीक नहीं है। शहरी इलाके की हालत भी कुछ इसी दिशा में जा रही है। भूगर्भ विभाग के अनुसार साल में 60 से 70 सेंटीमीटर पानी नीचे जा रहा है। 1980 से अब तक भूगर्भ जल सात से नौ मीटर नीचे चला गया है। यदि जल दोहन बंद नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में लोग पानी की किल्लत हो सकती है। दस साल पहले डार्क जोन में पानी काफी ऊपर था। दस साल पहले हरहुआ ब्लाक में जलस्तर 10.50 मीटर रहा। आराजीलाइन ब्लाक में 10.40 मीटर रहा। पिंडरा ब्लॉक में 11.49 मीटर रहा।
जल दोहन रोकने के उपाय
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग
- पौधरोपण
- गांवों में तालाबों की खोदाई
- घर के आगे कच्ची जमीन छोड़ने के लिए प्रेरित करना
- पानी का अपव्यय रोकने के लिए जागरूक करना
जल दोहन करने वालों पर जुर्माने और सजा का प्राविधान
अवैध जलदोहन वालों पर प्रशासन की ओर से कड़ी कार्रवाई 10 साल पहले की गई थी। इस दौरान एक अवैध रूप से जलदोहन करने वालों को जुर्माने की कार्रवाई की गई थी। दो लाख रुपये से अधिक की वसूली की गई थी। जल दोहन के लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होती है। निर्धारित मात्रा से अधिक जल दोहन करने पर यूपी ग्राउंड वाटर मैनेजमेंट एंड रेगुलेशन एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई का प्राविधान किया गया है। सजा अपराध की प्रकृति पर तय करने का प्राविधान किया गया है।
आंकड़े
- 80 प्रतिशत -भू-जल से सिंचाई कार्य
- 85 प्रतिशत -भू-जल से औद्योगिक कार्य
- 95 प्रतिशत -भू-जल से पेयजल कार्य
- 904 मिलीमीटर-औसत वर्षा
----
हरहुआ ब्लाक - मानसून पूर्व 15.97, मानसून बाद 14.80
काशी विद्यापीठ ब्लाक - मानसून पूर्व 12.82, मानसून बाद 07.79
चिरईगांव ब्लाक - मानसून पूर्व 13.28, मानसून बाद 07.45
पिंडरा ब्लाक - मानसून पूर्व 16.49, मानसून बाद 13.29
सेवापुरी ब्लाक - मानसून पूर्व 13.11, मानसून बाद 07.23
आराजीलाइन ब्लाक- मानसून पूर्व 15.42, मानसून बाद 10.79
बड़ागांव ब्लाक - मानसून पूर्व 11.25, मानसून बाद 08.06
चोलापुर ब्लाक - मानसून पूर्व 09.00, मानसून बाद 06.00
उपरोक्त आंकड़े मीटर में
जल संचय के लिए प्रयास जारी
प्रदेश सरकार ने जल संचय के लिए वर्षा जल है जीवन धारा, इसका संचयन संकल्प हमारा, का नारा दिया है। इस वर्ष शासन -प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी कर उन्हें वर्षा जल के संचयन के लिए जोड़ा जाए। कोरोना संक्रमण में यह कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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तालाबों को पाटने से रिचार्जिंग हुई कम
भूगर्भ जल विभाग के रिटायर्ड अधिकारी वीपी सिंह ने बताया कि वर्षा के बाद पानी सबसे ऊपर होता है। वर्षा शुरू होने से पहले जलस्तर नीचे चला जाता है। पहले तालाब पोखरे काफी होते थे। इनको पाटने से रिचार्जिंग कम हुई है। सामान्य बारिश पर पर्याप्त पानी मिल जाता है। शहरी क्षेत्र में जलस्तर नीचे जाने की वजह नदी आधारित सरकारी पेयजल योजनाओं का फेल होना है। बीते एक दशक में 700 करोड़ से अधिक बजट से गंगा आधारित पेयजल योजना को मूर्तरूप दिया जा रहा है। कुछ काम हुआ है जबकि कई कार्य बाकी हैं। लिहाजा, 20 लाख की शहरी आबादी के साथ ही कल-कारखानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भूगर्भीय जल का अतिदोहन ही किया जा रहा है। वहीं, दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण पानी के अवैध कारोबार को बढ़ावा मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी नहरों के अभाव के कारण भूगर्भीय जल से ही सिंचाई हो रही है।
जल संरक्षण की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। मनरेगा से सभी ब्लाकों में पोखरे और तालाबों की खोदाई कराई गई है। इसके अलावा कुछ सरकारी भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाई गई है। जहां नहीं लगे हैं वहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाई जाएगी। -अभिषेक गोयल, सीडीओ
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जल दोहन रोकने के उपाय
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग
- पौधरोपण
- गांवों में तालाबों की खोदाई
- घर के आगे कच्ची जमीन छोड़ने के लिए प्रेरित करना
- पानी का अपव्यय रोकने के लिए जागरूक करना
जल दोहन करने वालों पर जुर्माने और सजा का प्राविधान
अवैध जलदोहन वालों पर प्रशासन की ओर से कड़ी कार्रवाई 10 साल पहले की गई थी। इस दौरान एक अवैध रूप से जलदोहन करने वालों को जुर्माने की कार्रवाई की गई थी। दो लाख रुपये से अधिक की वसूली की गई थी। जल दोहन के लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होती है। निर्धारित मात्रा से अधिक जल दोहन करने पर यूपी ग्राउंड वाटर मैनेजमेंट एंड रेगुलेशन एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई का प्राविधान किया गया है। सजा अपराध की प्रकृति पर तय करने का प्राविधान किया गया है।
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आंकड़े
- 80 प्रतिशत -भू-जल से सिंचाई कार्य
- 85 प्रतिशत -भू-जल से औद्योगिक कार्य
- 95 प्रतिशत -भू-जल से पेयजल कार्य
- 904 मिलीमीटर-औसत वर्षा
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हरहुआ ब्लाक - मानसून पूर्व 15.97, मानसून बाद 14.80
काशी विद्यापीठ ब्लाक - मानसून पूर्व 12.82, मानसून बाद 07.79
चिरईगांव ब्लाक - मानसून पूर्व 13.28, मानसून बाद 07.45
पिंडरा ब्लाक - मानसून पूर्व 16.49, मानसून बाद 13.29
सेवापुरी ब्लाक - मानसून पूर्व 13.11, मानसून बाद 07.23
आराजीलाइन ब्लाक- मानसून पूर्व 15.42, मानसून बाद 10.79
बड़ागांव ब्लाक - मानसून पूर्व 11.25, मानसून बाद 08.06
चोलापुर ब्लाक - मानसून पूर्व 09.00, मानसून बाद 06.00
उपरोक्त आंकड़े मीटर में
जल संचय के लिए प्रयास जारी
प्रदेश सरकार ने जल संचय के लिए वर्षा जल है जीवन धारा, इसका संचयन संकल्प हमारा, का नारा दिया है। इस वर्ष शासन -प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी कर उन्हें वर्षा जल के संचयन के लिए जोड़ा जाए। कोरोना संक्रमण में यह कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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तालाबों को पाटने से रिचार्जिंग हुई कम
भूगर्भ जल विभाग के रिटायर्ड अधिकारी वीपी सिंह ने बताया कि वर्षा के बाद पानी सबसे ऊपर होता है। वर्षा शुरू होने से पहले जलस्तर नीचे चला जाता है। पहले तालाब पोखरे काफी होते थे। इनको पाटने से रिचार्जिंग कम हुई है। सामान्य बारिश पर पर्याप्त पानी मिल जाता है। शहरी क्षेत्र में जलस्तर नीचे जाने की वजह नदी आधारित सरकारी पेयजल योजनाओं का फेल होना है। बीते एक दशक में 700 करोड़ से अधिक बजट से गंगा आधारित पेयजल योजना को मूर्तरूप दिया जा रहा है। कुछ काम हुआ है जबकि कई कार्य बाकी हैं। लिहाजा, 20 लाख की शहरी आबादी के साथ ही कल-कारखानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भूगर्भीय जल का अतिदोहन ही किया जा रहा है। वहीं, दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण पानी के अवैध कारोबार को बढ़ावा मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी नहरों के अभाव के कारण भूगर्भीय जल से ही सिंचाई हो रही है।
जल संरक्षण की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। मनरेगा से सभी ब्लाकों में पोखरे और तालाबों की खोदाई कराई गई है। इसके अलावा कुछ सरकारी भवनों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाई गई है। जहां नहीं लगे हैं वहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाई जाएगी। -अभिषेक गोयल, सीडीओ