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संस्कृत के आदर्शों को जीवन में लाए
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वाराणसी। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली के अनुदान से शिवपुर स्थित रानी पद्मावती तारा योगतंत्र आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें ‘भारतीय संस्कृति के संरक्षण में संस्कृत वाड्ग्मय का योगदान’ विषय पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किया। उद्घाटन संस्था के प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो. कृष्णकांत शर्मा ने किया।
मुख्य वक्ता के रूप में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. रविशंकर पांडेय ने कहा भारतीय संस्कृति भारत की आत्मा है। देववाणी संस्कृ त के अभाव में भारतीय संस्कृ ति की संकल्पना नहीं की जा सकती। महाविद्यालय के प्रबंधक सुधीर मिश्रा ने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रति दुनिया आकर्षित है। संस्कृत के आदर्शों और सिद्धांतों को व्यवहार में लाने पर ही जीवन की सार्थकता है। संयोजक डॉ. कमलेश झा ने स्वागत किया। संचालन डॉ. निर्भय कुमार पांडेय, धन्यवाद प्राचार्य डॉ. वेदानंद झा ने किया।
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मुख्य वक्ता के रूप में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. रविशंकर पांडेय ने कहा भारतीय संस्कृति भारत की आत्मा है। देववाणी संस्कृ त के अभाव में भारतीय संस्कृ ति की संकल्पना नहीं की जा सकती। महाविद्यालय के प्रबंधक सुधीर मिश्रा ने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रति दुनिया आकर्षित है। संस्कृत के आदर्शों और सिद्धांतों को व्यवहार में लाने पर ही जीवन की सार्थकता है। संयोजक डॉ. कमलेश झा ने स्वागत किया। संचालन डॉ. निर्भय कुमार पांडेय, धन्यवाद प्राचार्य डॉ. वेदानंद झा ने किया।
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