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15 लाख में बिकता है एक पैंगोलिन0
Updated Tue, 24 Apr 2018 01:52 AM IST
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वाराणसी। दुर्लभ वन्य जीव पैंगोलिन की तस्करी का अलग अर्थशास्त्र है। कुछ विशेषताआें के चलते इसकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार तक है। यही इसकी तस्करी को बढ़ावा दे रहा है। जानकारों की मानें तो सिगरा स्थित होटल प्रिया से बरामद पैंगोलिन की कीमत दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में 12 से 15 लाख रुपये के बीच है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जंगल तस्करों को नेपाली तस्कर झांसा देकर महज 30 से 50 हजार रुपये के बीच में सौदा तय कर लेते हैं। पूर्वांचल में सोनभद्र, चंदौली व मिर्जापुर और इससे सटे मध्य प्रदेश के घने जंगलों में पैंगोलिन बहुतायत में पाया जाता है।
पैंगोलिन या वज्रशल्क एक स्तनधारी जीव है और यह फसलों, शेरों व हाथियों को नुकसान पहुंचाने वाली चींटियों और दीमकों को खाता है। धरती पर यह स्तनधारी और रेप्टाइल यानी सांप-छिपकली जैसे जानवरों के बीच की कड़ी का जीव है। इसके शरीर के ऊपर ब्लेड के जैसे प्लेट्स की परत होती है और यह इतनी मजबूत होती है कि अगर शेर भी अपने दांत गड़ा दे तो कोई असर नहीं पड़ता। इस संबंध में डीएफओ गोपाल ओझा ने कहा कि मांस खाने और कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में काम आने के कारण पैंगोलिन की तस्करी दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में बढ़ी है। इनके संरक्षण का उपाय यही है कि वन संपदा को नुकसान न पहुंचाया जाए।
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पैंगोलिन या वज्रशल्क एक स्तनधारी जीव है और यह फसलों, शेरों व हाथियों को नुकसान पहुंचाने वाली चींटियों और दीमकों को खाता है। धरती पर यह स्तनधारी और रेप्टाइल यानी सांप-छिपकली जैसे जानवरों के बीच की कड़ी का जीव है। इसके शरीर के ऊपर ब्लेड के जैसे प्लेट्स की परत होती है और यह इतनी मजबूत होती है कि अगर शेर भी अपने दांत गड़ा दे तो कोई असर नहीं पड़ता। इस संबंध में डीएफओ गोपाल ओझा ने कहा कि मांस खाने और कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में काम आने के कारण पैंगोलिन की तस्करी दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में बढ़ी है। इनके संरक्षण का उपाय यही है कि वन संपदा को नुकसान न पहुंचाया जाए।
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