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BHU में हड़ताल का असर: अस्पताल की OPD में देखे गए 4919 मरीज, महज 49 ऑपरेशन; 126 मरीजों को किया गया डिस्चार्ज

Wed, 16 Oct 2024 05:15 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Wed, 16 Oct 2024 05:15 AM IST
सार

कोलकाता मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर से दरिंदगी के मामले में न्याय न मिलने पर डॉक्टरों की भूख हड़ताल के समर्थन में बीएचयू के रेजिडेंट भी हड़ताल पर हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

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Kolkata RG Kar Case BHU Hospital Doctors Strike 4919 patients seen in OPD only 49 operations
बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ दरिंदगी और हत्या के विरोध में चार दिन से भूख हड़ताल पर बैठै जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में आईएमएस बीएचयू के रेजिडेंट मंगलवार को हड़ताल पर रहे। बीएचयू अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में रेजिडेंट ने अपनी सेवाएं नहीं दीं। मंगलवार को ओपीडी में केवल 4919 मरीज ही देखे गए, जबकि केवल 49 मरीजों के ही ऑपरेशन हो सके।
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लिहाजा ओपीडी में केवल कंसल्टेंट ही बैठे। इस वजह से मरीजों की भीड़ ओपीडी के अंदर से बाहर तक लगी रही। बुधवार को भी हड़ताल जारी रहेगी। रेजिडेंट की हड़ताल का असर आपरेशन थियेटर से लेकर जांच काउंटर रहा। आम दिनों में बीएचयू अस्पताल में छह हजार से अधिक मरीज आते हैं। जबकि सभी विभागों को मिलाकर करीब 100 मरीजों की सर्जरी होती है।
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रेजिडेंट के ओपीडी और सामान्य सर्जरी में सेवा न देने से इसका ग्राफ भी गिर गया। मंगलवार को न्यूरोलॉजी, मेडिसिन, सर्जरी, हृदय रोग विभाग, गैस्ट्रोलॉजी, यूरोलॉजी सहित अन्य विभागों की ओपीडी के साथ ही एमसीएच विंग में गर्भवती महिलाओं की भी भीड़ रही।
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पर्चा जमा करने के बाद मरीज बाहर लाइन में खड़े होकर डॉक्टर को दिखाने को लिए इंतजार करते रहे। इधर ओपीडी के बाहर कोई स्ट्रेचर पर तो कोई व्हीलचेयर पर अपने मरीज को लेकर डॉक्टर को दिखाने के लिए खड़ा रहा। इधर जूनियर रेजिडेंट के न बैठने का असर यह रहा तीन बजे तक न्यूरोलॉजी विभाग, सर्जरी विभाग सहित अन्य विभागों में मरीजों की लाइन लगी रही।

ओपीडी हाल में बैठे रहे मरीज, जांच काउंटर पर नहीं दिखी भीड़

आईएमएस बीएचयू के रेजिडेंट के हड़ताल पर रहने से मरीजों को डॉक्टर को दिखाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। पर्चा जमा करने के बाद कुछ मरीज ओपीडी के बाहर खड़े रहे तो कुछ ओपीडी हाल में रखी कुर्सियों पर बैठकर इंतजार करते रहे। आम दिनों में जहां कंसल्टेंट के साथ ही रेजिडेंट के देखने से मरीज समय से दिखाकर चले जाते थे और कुर्सियां दोपहर तक खाली रहती थीं। मंगलवार की दोपहर ढाई बजे तक कुर्सी भरी रही।
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