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रोजगार सेवक की तलाश में उलझा प्रशासन
Updated Wed, 10 Jan 2018 01:29 AM IST
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ज्ञानपुर। औराई के नटवां गांव में वर्ष 2008 से 2014 तक नौकरी करने वाले रोजगार सेवक के खिलाफ शिकायत के बाद जांच शुरू हुई तो मामला इस बिंदु पर अटक गया कि आखिरकार रोजगार सेवक था कौन। आरोपी युवक खुुद को रोजगार सेवक नहीं होने की बात कह रहा है। अब जांच अधिकारी ने रोजगार सेवक को तलाशने के लिए बीडीओ से जरूरी दस्तावेज मांगा है। मामले में युवक का बैंक स्टेटमेंट, मस्टर रोल भी तलब किया गया है।
कागजी हेराफेरी कर रोजगार सेवक की नौकरी हासिल करने के मामले में अधिकारी उलझ गए हैं। नटवा गांव निवासी नवनीत पुत्र ओम प्रकाश ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर गांव के शिकायत की थी कि रोजगार सेवक शेषमणि मिश्र फर्जी अभिलेख के सहारे नौकरी कर रहा है। मामले की जांच के लिए डीएम ने श्रमायुक्त रोजगार अजीत सिंह को नामित किया था। जांच शुरू हुई तो पता चला कि आवेदन पत्र में नाम और फोटो किसी का और मार्कशीट दूसरे की लगाकर अभ्यथी ने नौकरी हासिल की थी। छह वर्ष तक हर महीने मानदेय भी ले रहा था। जांच अधिकारी ने शेषमणि मिश्र को नोटिस भेजा तो उसने शपथ पत्र देकर यह स्पष्ट किया कि वह ग्राम पंचायत नटवां का रोजगार सेवक कभी रहा ही नहीं। इसके बाद से जांच अधिकारी परेशान हैं कि आखिर रोजगार सेवक कौन है। अब उस दौरान नटवां के रोजगार सेवक के रूप में मानदेय कौन ले रहा था, इसका पता लगाने के लिए बैंक का स्टेटमेट और मस्टर रोल को मांगा गया है। श्रमायुक्त ने कहा कि बैंक से मानदेय किसके खाते में जा रहा था, इसका पता लगाया जा रहा है। दो दिन में कागजात आने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा। सीडीओ हरिशंकर सिंह ने कहा कि मामले की जांच पूरी होने पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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कागजी हेराफेरी कर रोजगार सेवक की नौकरी हासिल करने के मामले में अधिकारी उलझ गए हैं। नटवा गांव निवासी नवनीत पुत्र ओम प्रकाश ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर गांव के शिकायत की थी कि रोजगार सेवक शेषमणि मिश्र फर्जी अभिलेख के सहारे नौकरी कर रहा है। मामले की जांच के लिए डीएम ने श्रमायुक्त रोजगार अजीत सिंह को नामित किया था। जांच शुरू हुई तो पता चला कि आवेदन पत्र में नाम और फोटो किसी का और मार्कशीट दूसरे की लगाकर अभ्यथी ने नौकरी हासिल की थी। छह वर्ष तक हर महीने मानदेय भी ले रहा था। जांच अधिकारी ने शेषमणि मिश्र को नोटिस भेजा तो उसने शपथ पत्र देकर यह स्पष्ट किया कि वह ग्राम पंचायत नटवां का रोजगार सेवक कभी रहा ही नहीं। इसके बाद से जांच अधिकारी परेशान हैं कि आखिर रोजगार सेवक कौन है। अब उस दौरान नटवां के रोजगार सेवक के रूप में मानदेय कौन ले रहा था, इसका पता लगाने के लिए बैंक का स्टेटमेट और मस्टर रोल को मांगा गया है। श्रमायुक्त ने कहा कि बैंक से मानदेय किसके खाते में जा रहा था, इसका पता लगाया जा रहा है। दो दिन में कागजात आने के बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा। सीडीओ हरिशंकर सिंह ने कहा कि मामले की जांच पूरी होने पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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