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लमही में सजा खुशियों का मेला
Updated Mon, 31 Jul 2017 02:26 AM IST
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वाराणसी। कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही में जश्न का माहौल है। प्रेमचंद की जयंती पर सजने वाले मेले में शामिल होने के लिए गांव के लोगों ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुंशी जी की जयंती के लिए सज रहे लमही की रौनक रविवार को देखते ही बनती थी। मुंशी प्रेमचंद न्यास को सजाने के लिए सुबह से ही कारीगर लगे हुए थे।
रविवार को लमही में प्रवेश करते ही गांव में जश्न सरीखा नजारा था। साफ-सफाई के साथ ही प्रशासनिक अमला भी महोत्सव को मूर्त रूप देने में लगा हुआ था। मुंशी प्रेमचंद न्यास में पंडाल सजा रहे इद्दू ने बताया कि हम लोग सुबह से ही टेंट लगा रहे हैं। सोमवार को यहां बड़ा मेला लगेगा। थोड़ी देर में किड्स गुरु कुल के बच्चे भी पहुंचे और उन्होंने मुंशी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। सीमांस, कौशल, सत्यम, स्वस्तिक और आलोक ने बताया कि उन्होंने प्रेमचंद की कई कहानियां पढ़ी हैं। आज वे उन कहानियों को रचने वाले मुंशी जी का गांव घूमने आए हैं।
प्रेमचंद की कहानी न भूत न भविष्य, सदैव वर्तमान
वाराणसी। प्रेमचंद की कहानी न भूत है न भविष्य है वह तो सदैव वर्तमान है। कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद ने कहा था कि मेरा जीवन और मेरी रचना सपाट सड़क की तरह नहीं होगी वहां आपको गढ्ढे भी मिलेंगे। वहां आप झील, झरना और झुरमुट देखना चाहेंगे तो आपको निराशा होगी। ये बातें जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने कहीं। वह रविवार को लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद रिसर्च संस्थान के सभागार में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
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‘मुंशी प्रेमचंद और आज का समय’ विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप जिस तरह कथा सम्राट की कहानियों को देखेंगे उन्हें उस रूप में पाएंगे। आज भी ईदगाह का हामिद, गोदान का होरी और बूढ़ी काकी भी दिख जाएंगी, नमक का दरोगा दिख जाएगा। डॉ. इंदीवर पांडेय ने कहा कि उनके लेखन में सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह का भाव था।
डॉ. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद के विचारों में साहित्य मनोरंजन की वस्तु नहीं वरन जीवन प्रगति की गाथा है। डॉ. रामसुधार सिंह, डॉ. सुरेंद्र प्रताप, डॉ. मुक्ता प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ला आदि ने भी प्रेमचंद की लेखनी और उनकी प्रतिबद्धता पर चर्चा की। संचालन डॉ. अत्रि भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, डॉ. सुभाष चंद्र यादव, डॉ. हरेंद्र नारायण सिंह, अतुल सिंह, मनोज श्रीवास्तव, सुरेश चंद्र दूबे, रामानंद तिवारी, आनंद राव आदि उपस्थित रहे। संयोजन क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र के केंद्र प्रमुख डॉ. रत्नेश वर्मा ने किया।
लमही महोत्सव में आज
शतरंज के खिलाड़ी का प्रदर्शन एवं पैनल डिस्कशन बीएचयू द्वारा
नाट्य प्रस्तुतियां
प्रेम रंग
बूढ़ी काकी
पंच परमेश्वर
कफन
गोदान
मैकू
मंत्र
लोक गायन
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रविवार को लमही में प्रवेश करते ही गांव में जश्न सरीखा नजारा था। साफ-सफाई के साथ ही प्रशासनिक अमला भी महोत्सव को मूर्त रूप देने में लगा हुआ था। मुंशी प्रेमचंद न्यास में पंडाल सजा रहे इद्दू ने बताया कि हम लोग सुबह से ही टेंट लगा रहे हैं। सोमवार को यहां बड़ा मेला लगेगा। थोड़ी देर में किड्स गुरु कुल के बच्चे भी पहुंचे और उन्होंने मुंशी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। सीमांस, कौशल, सत्यम, स्वस्तिक और आलोक ने बताया कि उन्होंने प्रेमचंद की कई कहानियां पढ़ी हैं। आज वे उन कहानियों को रचने वाले मुंशी जी का गांव घूमने आए हैं।
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प्रेमचंद की कहानी न भूत न भविष्य, सदैव वर्तमान
वाराणसी। प्रेमचंद की कहानी न भूत है न भविष्य है वह तो सदैव वर्तमान है। कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद ने कहा था कि मेरा जीवन और मेरी रचना सपाट सड़क की तरह नहीं होगी वहां आपको गढ्ढे भी मिलेंगे। वहां आप झील, झरना और झुरमुट देखना चाहेंगे तो आपको निराशा होगी। ये बातें जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने कहीं। वह रविवार को लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद रिसर्च संस्थान के सभागार में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
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‘मुंशी प्रेमचंद और आज का समय’ विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आप जिस तरह कथा सम्राट की कहानियों को देखेंगे उन्हें उस रूप में पाएंगे। आज भी ईदगाह का हामिद, गोदान का होरी और बूढ़ी काकी भी दिख जाएंगी, नमक का दरोगा दिख जाएगा। डॉ. इंदीवर पांडेय ने कहा कि उनके लेखन में सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह का भाव था।
डॉ. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद के विचारों में साहित्य मनोरंजन की वस्तु नहीं वरन जीवन प्रगति की गाथा है। डॉ. रामसुधार सिंह, डॉ. सुरेंद्र प्रताप, डॉ. मुक्ता प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ला आदि ने भी प्रेमचंद की लेखनी और उनकी प्रतिबद्धता पर चर्चा की। संचालन डॉ. अत्रि भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, डॉ. सुभाष चंद्र यादव, डॉ. हरेंद्र नारायण सिंह, अतुल सिंह, मनोज श्रीवास्तव, सुरेश चंद्र दूबे, रामानंद तिवारी, आनंद राव आदि उपस्थित रहे। संयोजन क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र के केंद्र प्रमुख डॉ. रत्नेश वर्मा ने किया।
लमही महोत्सव में आज
शतरंज के खिलाड़ी का प्रदर्शन एवं पैनल डिस्कशन बीएचयू द्वारा
नाट्य प्रस्तुतियां
प्रेम रंग
बूढ़ी काकी
पंच परमेश्वर
कफन
गोदान
मैकू
मंत्र
लोक गायन