पड़ताल: बनारस के सरकारी अस्पतालों में 40 फीसदी डॉक्टरों की कमी, स्वास्थ्य मंत्री बताएं- कैसे होगा 24 घंटे इलाज
वाराणसी जिले के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का संकट दूर होने का नाम नहीं ले रहा है। इसका असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों के वार्डों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की 24 घंटे तैनाती के फरमान को अमलीजमा पहनाना बड़ी चुनौती है।
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वाराणसी जिले के सरकारी अस्पतालों में 40 फीसदी डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों के वार्डों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की 24 घंटे तैनाती के फरमान को अमलीजमा पहनाना बड़ी चुनौती होगी। जिला अस्पताल से लेकर मंडलीय अस्पताल और शास्त्री अस्पताल रामनगर में जहां एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं हैं, वहीं इन अस्पतालों में फिजिशियन से लेकर सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट सहित कई अन्य विशेषज्ञ भी नहीं है।
इधर, सीएमओ ने सरकारी अस्पतालों के वार्डों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 24 घंटे तैनाती का जो फैसला लिया है, उसको अमली जामा पहनाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि एक तो ओपीडी के लिए पूरे विशेषज्ञ ही नहीं हैं, ऐसे में वार्ड में 24 घंटे ड्यूटी कराने के आदेश का सौ फीसदी अनुपालन कैसे कराया जा सकता है।
शास्त्री अस्पताल में 32 में 16 पद खाली
शास्त्री अस्पताल रामनगर में चिकित्सकों के कुल 32 पद हैं, इसमें वर्तमान समय में 16 खाली चल रहे हैं। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, प्लास्टिक सर्जन, न्यूरो सर्जन ही नहीं है। इस वजह से ओपीडी में आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना होता है। सबसे अधिक संकट इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए हैं। इसमें ईएमओ के चार स्वीकृत पद में सभी खाली चल रहे हैं।
अस्पताल में सर्जन के दो स्वीकृत पद में से एक खाली, रेडियोलॉजी और एनीसथीसिया में तीन-तीन में दो-दो पद खाली है। इसके अलावा ईएनटी में दो पदों में एक खाली, आर्थो में तीन में एक खाली हैं जबकि बाल रोग विशेषज्ञ के दो पद में एक भी नहीं है। हृदय रो, न्यूरो फिजिशियन, दंत चिकित्सक,प्लास्टिक सर्जन के एक-एक पद हैं, जो कि सभी खाली हैं। सीएमएस डॉ. अमरेंद्र चंद दूबे का कहना है कि जो भी चिकित्सक हैं, उनसे मरीजों की बेहतर सेवा की जा रही है। खाली पदों के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी हैं।
मंडलीय अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में कुल 41 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 30 चिकित्सक हैं। इसमें हृदय रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजिशियन है ही नहीं जबकि कई पदों में भी संख्या स्वीकृत के अनुसार कम हैं। एसआईसी डॉ.एसपी सिंह के अनुसार हृदय रोग विशेषज्ञ के दो पद में एक खाली, एनीस्थीसिया के तीन में एक खाली जबकि रेडियोलॉजिस्ट में तीन स्वीकृत पदों में कोई डॉक्टर नहीं है।
साथ ही ईएनटी में दो में एक, चेस्टफीजिशियन दो पद में दोनों खाली है। फिजिशियन के तीन स्वीकृत पदों में एक पर स्थायी और दो पर संविदा चिकित्सक तैनात हैं। प्लास्टिक सर्जन के साथ ही सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं के लिए कोई नहीं है। अस्पताल में जो भी चिकित्सक मौजूद हैं, उनके सहयोग से ओपीडी, वार्ड के साथ ही इमरजेंसी में भी मरीजों की सेवा की जा रही है।
जिला अस्पताल में चेस्ट फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट नहीं
दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में हृदय रोगस्वीकृत 50 पदों के सापेक्ष 31 पर स्थायी चिकित्सक हैं। इसके अलावा 13 संविदा और चार चिकित्सक पुनर्नियोजन पर हैं। सीएमएस डॉ. दिग्विजय सिंह के अनुसार अस्पताल में हृदय रोग, चेस्ट फिजिशियन, प्लास्टिक सर्जन, चर्मरोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। स्थायी के साथ ही संविदा और पुनर्नियोजन के जो भी चिकित्सक हैं, उनसे मरीजों की सेवा की जा रही है। स्थायी तैनाती के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
जिला अस्पताल में 24 घंटे वार्ड में तैनात रहेंगे चिकित्सक
सरकारी अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने वार्ड में भर्ती मरीजों के बेेहतर इलाज के उद्देश्य से जिला अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती का आदेश जारी किया है। बताया कि इस व्यवस्था से निश्चित तौर पर भर्ती मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। बताया कि अस्पतालों में खाली पदों के सापेक्ष शासन के निर्देश पर संविदा और पुनर्नियोजन के माध्यम से भी चिकित्सकों की तैनाती की जा रही है।
उधर सीएमओ के आदेश के क्रम में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिग्विजय सिंह ने 13 डॉक्टरों की दो शिफ्ट में अलग-अलग दिनों की ड्यूटी लगाई हैं। खास बात यह है कि दिन में सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी चलने के बाद वार्ड में पहली शिफ्ट में डॉक्टर दोपहर दो बजे से रात आठ बजे तक जबकि दूसरी शिफ्ट रात आठ बजे से अगले दिन सुबह आठ बजे तक डयूटी देंगे।