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भदोही हादसा साइड स्टोरी- एक- छटपटाते रहे मासूम भागा चालक
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ज्ञानपुर (भदोही)। समय: सुबह 8.15 बजे। स्थान: लखनो गांव। बुजुर्ग जयशंकर शुक्ल अपने दरवाजे के सामने बैठकर आग ताप रहे थे। उनकी पत्नी सीता सुबह के काम में व्यस्त थीं। बहू सुमन टिफिन बनाकर बच्चे को स्कूल भेजने के लिए वैन का इंतजार कर रही थी। इसी बीच बच्चों से भरी वैन पहुंची और चालक मनोज यादव बच्चे को बैठाने के लिए वैन बैक करने लगा कि वैन में आग लग गई। बच्चे चिल्लाने लगे तो चालक वैन से उतरकर अपनी जान बचाने के लिए भाग गया। यह आंखों देखी घटना बयां करते हुए बुजुर्ग जयशंकर सिहर उठते हैं।
वे कहते हैं कि वैन से निकल रही लपटें इतनी विकराल थीं कि बाहर खड़ा चार साल का उनका पौत्र भी झुलस गया। संयोग था कि वह ज्यादा नहीं जला। उनके दोनों पैर ही झुलसे है। वैन के अंदर बैठे बच्चे चिल्लाने लगे। गाड़ी का गेट लॉक था, इससे बच्चे छटपटाने लगे। चालक ने लॉक खोलने का प्रयास किया या नहीं, यह समझ में नहीं आया, लेकिन वह बच्चों को वैन में तड़पता छोड़कर भाग गया। इसके बाद सीता और बहू सुमन दौड़ पड़ीं। तब तक आसपास के लोग भी आ गए और गेट खोलने का प्रयास करने लगे, लेकिन बात नहीं बनी तो लोहे के रम्मा से गेट को तोड़ा गया और बच्चों को निकाला गया, तब तक वे काफी झुलस चुके थे। घटना के बाद सभी की जबान पर यही था कि काश! चालक ने वैन का गेट खोल दिया होता तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती।
पॉलिथीन से बांधा था क्षतिग्रस्त गैस पाइप
ज्ञानपुर। जिस मारुति वैन में घरेलू गैस सिलिंडर लगा कर बच्चों को ढोया जा रहा था, उसमें सुरक्षा को लेकर भी लापरवाही की हदें पार कर दी गई थीं। स्कूल के समीप के एक दुकानदार ने बताया कि वैन में रखे गैस सिलिंडर की पाइप फटी हुई थी। एक दिन पहले चालक उसमें गैस भरवाने के लिए गया तो पता चला कि पाइप क्षतिग्रस्त है तो उसने पाइप को पॉलिथीन से बांधकर गाड़ी चलाई, लेकिन पाइप को बदलवाने की कोशिश नहीं की। संभव है कि गैस रिसाव हो रहा होगा और इंजन गर्म होने से आग लग गई हो।
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बहादुरी के लिए सम्मानित होंगी सीता देवी
ज्ञानपुर। जलती वैन में छटपटा रहे बच्चों को बचाने का साहस दिखाने वाली सीता देवी को सम्मानित किया जाएगा। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि उन्होंने काबिले-तारीफ काम किया है। इसके लिए वह सम्मान की हकदार हैं। उनका पहले ठीक से इलाज हो जाए तो उन्हें सम्मानित किया जाएगा। उनकी बहू सुमन ने भी बच्चों को बचाने में योगदान किया।
वे कहते हैं कि वैन से निकल रही लपटें इतनी विकराल थीं कि बाहर खड़ा चार साल का उनका पौत्र भी झुलस गया। संयोग था कि वह ज्यादा नहीं जला। उनके दोनों पैर ही झुलसे है। वैन के अंदर बैठे बच्चे चिल्लाने लगे। गाड़ी का गेट लॉक था, इससे बच्चे छटपटाने लगे। चालक ने लॉक खोलने का प्रयास किया या नहीं, यह समझ में नहीं आया, लेकिन वह बच्चों को वैन में तड़पता छोड़कर भाग गया। इसके बाद सीता और बहू सुमन दौड़ पड़ीं। तब तक आसपास के लोग भी आ गए और गेट खोलने का प्रयास करने लगे, लेकिन बात नहीं बनी तो लोहे के रम्मा से गेट को तोड़ा गया और बच्चों को निकाला गया, तब तक वे काफी झुलस चुके थे। घटना के बाद सभी की जबान पर यही था कि काश! चालक ने वैन का गेट खोल दिया होता तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती।
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पॉलिथीन से बांधा था क्षतिग्रस्त गैस पाइप
ज्ञानपुर। जिस मारुति वैन में घरेलू गैस सिलिंडर लगा कर बच्चों को ढोया जा रहा था, उसमें सुरक्षा को लेकर भी लापरवाही की हदें पार कर दी गई थीं। स्कूल के समीप के एक दुकानदार ने बताया कि वैन में रखे गैस सिलिंडर की पाइप फटी हुई थी। एक दिन पहले चालक उसमें गैस भरवाने के लिए गया तो पता चला कि पाइप क्षतिग्रस्त है तो उसने पाइप को पॉलिथीन से बांधकर गाड़ी चलाई, लेकिन पाइप को बदलवाने की कोशिश नहीं की। संभव है कि गैस रिसाव हो रहा होगा और इंजन गर्म होने से आग लग गई हो।
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बहादुरी के लिए सम्मानित होंगी सीता देवी
ज्ञानपुर। जलती वैन में छटपटा रहे बच्चों को बचाने का साहस दिखाने वाली सीता देवी को सम्मानित किया जाएगा। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि उन्होंने काबिले-तारीफ काम किया है। इसके लिए वह सम्मान की हकदार हैं। उनका पहले ठीक से इलाज हो जाए तो उन्हें सम्मानित किया जाएगा। उनकी बहू सुमन ने भी बच्चों को बचाने में योगदान किया।