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साइकिल की तीली से गढ़ दी आकृतियां
Updated Mon, 06 Nov 2017 02:38 AM IST
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वाराणसी। कानपुर की गिरजा देवी ने साइकिल की तीलियों से कला का अनोखा संसार रचा है। राज्य सरकार से पुरस्कार प्राप्त गिरजा देवी की कलाकृतियां सांस्कृतिक संकुल में चल रहे शिल्प मेले में धूम मचा रही हैं। इस काम में उनकी दो बेटियां भी खास मदद कर रही हैं।
शिल्प मेले में लगे स्टॉल नंबर 60 के करीब पहुंचते ही खरीदार ठिठक जाते हैं। तीलियों और जूट के माध्यम से तैयार गुड़िया, राधा-कृष्ण, गोपियों और गांव की महिलाओं की आकृतियां हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। बच्चों से लेकर बड़े तक इन कलाकृतियों को दिलचस्पी से खरीद रहे हैं। स्टॉल संचालक कानपुर के श्रीकृष्ण गुप्ता ने बताया कि 100 रुपये से लेकर 300 रुपये तक इनके दाम हैं। आकर्षक और सस्ती होने की वजह से बेझिझक लोग खरीद रहे हैं। वहीं, मेले में आदिवासी कला भी लोगों को आकर्षित करती है। राज्य सरकार से सहायता प्राप्त ट्राइफेड इंडिया के स्टॉल पर विभिन्न प्रदेशों की जनजातियों द्वारा निर्मित सदरी, साड़ी, कुर्ते, शर्ट समेत अन्य वस्त्रों को लोग पसंद कर रहे हैं। मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध बाघ सूट भी यहां उपलब्ध है। वहीं, कश्मीरी पश्मिना हमेशा की तरह खास बनी हुई है। आठ हजार रुपये से शुरू यह शाल भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
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शिल्प मेले में लगे स्टॉल नंबर 60 के करीब पहुंचते ही खरीदार ठिठक जाते हैं। तीलियों और जूट के माध्यम से तैयार गुड़िया, राधा-कृष्ण, गोपियों और गांव की महिलाओं की आकृतियां हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। बच्चों से लेकर बड़े तक इन कलाकृतियों को दिलचस्पी से खरीद रहे हैं। स्टॉल संचालक कानपुर के श्रीकृष्ण गुप्ता ने बताया कि 100 रुपये से लेकर 300 रुपये तक इनके दाम हैं। आकर्षक और सस्ती होने की वजह से बेझिझक लोग खरीद रहे हैं। वहीं, मेले में आदिवासी कला भी लोगों को आकर्षित करती है। राज्य सरकार से सहायता प्राप्त ट्राइफेड इंडिया के स्टॉल पर विभिन्न प्रदेशों की जनजातियों द्वारा निर्मित सदरी, साड़ी, कुर्ते, शर्ट समेत अन्य वस्त्रों को लोग पसंद कर रहे हैं। मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध बाघ सूट भी यहां उपलब्ध है। वहीं, कश्मीरी पश्मिना हमेशा की तरह खास बनी हुई है। आठ हजार रुपये से शुरू यह शाल भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
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