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दबंगों के आगे परिवहन निगम लाचार
Updated Thu, 13 Dec 2018 02:07 AM IST
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वाराणसी। मजबूरी या मिलीभगत। कारण चाहे जो भी हो, लेकिन इन दिनों चौधरी चरण सिंह बस स्टेशन के बाहर दबंगों का बोलबाला है। वे अपनी गाड़ियों को धड़ल्ले से संचालित करवा रहे हैं और जिम्मेदार इन्हें टोकना तक उचित नहीं समझ रहे। इससे निगम के राजस्व में भी असर पड़ रहा है, लेकिन अधिकारी इसको लेकर चुप्पी साधे हैं।
कैंट बस स्टेशन से प्रयागराज, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर सहित विभिन्न रूटों के लिए कुल 580 बसें संचालित की जाती हैं। इनमें 78 अनुबंधित बसें भी शामिल हैं। निगम के नियमों के मुताबिक प्राइवेट बसें डिपो से कम से कम एक किमी दूर ही सवारी बैठा सकती हैं, लेकिन यहां स्थिति इसके उलट है। डिपो के ठीक बाहर ही डग्गामार वाहनों का कब्जा रहता है। इन गाड़ियों पर उत्तर प्रदेश परमिट संख्या बड़े अक्षरों में लिखा है। इतना ही नहीं काशी और कैंट जैसे शब्द भी गाड़ियों पर अंकित करवा दिए गए हैं। जिन्हें देखने से यात्री इन्हें अनुबंधित बसें समझते हैं, लेकिन ये अनुबंधित होती नहीं हैं। मुख्य सड़क पर एक के बाद एक आधे घंटे की अंतराल पर ये गाड़ियां सवारियों को बैठाने के बाद रवाना होती हैं। इन बसों पर सवारियां भी निगम के परिचालकों की मिली भगत से आसानी से बैठाई जाती हैं, क्योंकि निगम के कतिपय परिचालक भी कम दूरी की सवारियों को बैठाने में अक्सर आनाकानी करते हैं। इस वजह से ज्यादातर सवारियां इन बसों में बैठ जाती हैं और निगम के राजस्व में नुकसान होता है। निगम के एक कर्मचारी ने यहां तक कह दिया कि उन्हें नौकरी करनी है न कि प्राइवेट बस चालक-परिचालकों और उनके मालिकों से गाली-गलौज। इस बाबत पूछने पर डिपो के सेवा प्रबंधक और प्रभारी आरएम केपी सिंह भी चुप्पी साध लिए। उन्होंने कहा कि मैं दो-चार दिन के लिए आरएम का कार्य देख रहा हूं। वे आएंगे तो ही इस बारे में कुछ बता सकते हैं।
इनसेट--
जौनपुर की घटना से डर रहे अफसर
बीते दिनों जौनपुर में एआरएम केशरी नंदन चौधरी ने ऐसे डग्गामार वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ अभियान चलाया था। इस दौरान एक गाड़ी पर जुर्माना ठोंक दिया। इससे नाराज भाजपा के एक विधायक समर्थकों के साथ एआरटीओ कार्यालय पहुंचे और जमकर हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ अभद्रता भी की। मामले ने तूल पकड़ा तो एआरटीओ और एआरएम जौनपुर ने लाइन बाजार थाने में तहरीर भी दी, लेकिन अगले ही दिन मामला दबा दिया गया।
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कैंट बस स्टेशन से प्रयागराज, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर सहित विभिन्न रूटों के लिए कुल 580 बसें संचालित की जाती हैं। इनमें 78 अनुबंधित बसें भी शामिल हैं। निगम के नियमों के मुताबिक प्राइवेट बसें डिपो से कम से कम एक किमी दूर ही सवारी बैठा सकती हैं, लेकिन यहां स्थिति इसके उलट है। डिपो के ठीक बाहर ही डग्गामार वाहनों का कब्जा रहता है। इन गाड़ियों पर उत्तर प्रदेश परमिट संख्या बड़े अक्षरों में लिखा है। इतना ही नहीं काशी और कैंट जैसे शब्द भी गाड़ियों पर अंकित करवा दिए गए हैं। जिन्हें देखने से यात्री इन्हें अनुबंधित बसें समझते हैं, लेकिन ये अनुबंधित होती नहीं हैं। मुख्य सड़क पर एक के बाद एक आधे घंटे की अंतराल पर ये गाड़ियां सवारियों को बैठाने के बाद रवाना होती हैं। इन बसों पर सवारियां भी निगम के परिचालकों की मिली भगत से आसानी से बैठाई जाती हैं, क्योंकि निगम के कतिपय परिचालक भी कम दूरी की सवारियों को बैठाने में अक्सर आनाकानी करते हैं। इस वजह से ज्यादातर सवारियां इन बसों में बैठ जाती हैं और निगम के राजस्व में नुकसान होता है। निगम के एक कर्मचारी ने यहां तक कह दिया कि उन्हें नौकरी करनी है न कि प्राइवेट बस चालक-परिचालकों और उनके मालिकों से गाली-गलौज। इस बाबत पूछने पर डिपो के सेवा प्रबंधक और प्रभारी आरएम केपी सिंह भी चुप्पी साध लिए। उन्होंने कहा कि मैं दो-चार दिन के लिए आरएम का कार्य देख रहा हूं। वे आएंगे तो ही इस बारे में कुछ बता सकते हैं।
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जौनपुर की घटना से डर रहे अफसर
बीते दिनों जौनपुर में एआरएम केशरी नंदन चौधरी ने ऐसे डग्गामार वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ अभियान चलाया था। इस दौरान एक गाड़ी पर जुर्माना ठोंक दिया। इससे नाराज भाजपा के एक विधायक समर्थकों के साथ एआरटीओ कार्यालय पहुंचे और जमकर हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ अभद्रता भी की। मामले ने तूल पकड़ा तो एआरटीओ और एआरएम जौनपुर ने लाइन बाजार थाने में तहरीर भी दी, लेकिन अगले ही दिन मामला दबा दिया गया।
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